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नई दिल्ली (एजेंसी) । इंडिया गठबंधन (India Alliance) के समन्वय समिति की बैठक के बाद कांग्रेस (Congress) महासचिव केसी वेणुगोपाल (KC Venugopal) ने कहा है कि हम जातिगत जनगणना (caste survey) के मुद्दे को आगे बढ़ाएंगे। इस तरह एक बात तो पक्की हो गई है कि जातिगत जनगणना के मुद्दे को इंडिया गठबंधन लोकसभा चुनावों (loksabha election) में ब्रह्मास्त्र की तरह इस्तेमाल करने वाला है। हालांकि ये फैसला जातिगत जनगणना की विरोधी रहीं पश्चिम बंगाल (West bengol) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) की पार्टी टीएमसी (TMC) की अनुपस्थिति के बावजूद लिया गया है।
घोसी (Ghosi) उपचुनाव के परिणामों को अगर नजीर माने तो भाजपा
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का इस फैसले से चिंतित होना लाजिमी है। उत्तर प्रदेश (utter pradesh) और बिहार (Bihar) में अगर भाजपा को सीट नहीं मिलती है तो सत्ता में वापसी का जादुई आंकड़ा मुश्किल हो सकता है। उत्तर प्रदेश में हुए 2022 के चुनावों में बी ओबीसी (obc) आबादी वाले जिलों में भाजपा को सीट न मिलना बताता है कि पिछड़े वोट उसके खिसक रहे हैं। पर भाजपा इतनी जल्दी हार मानने वाली नहीं है। विपक्ष की काट के लिए भाजपा के पास 5 तोड़ हैं।
1- रोहिणी कमिशन
भाजपा जातिगत जनगणना के काट की तैयारी 2017 से ही कर रही है । जब रोहिणी कमीशन का गठन इसलिए किया गया कि किस तरह ओबीसी आरक्षण का लाभ सभी पिछड़ी जातियों को मिल सके। इसी साल जुलाई में इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपी है। कहा जा रहा है कि केंद्र आगामी विशेष अधिवेशन में ही इसे संसद के सामने रख सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार रोहिणी आयोग ने ओबीसी कोटा के तहत केंद्र सरकार की नौकरियों और एजुकेशनल संस्थानों में प्रवेश के आंकड़ों का विश्लेषण किया है ।सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि आरक्षण की मलाई का 97% हिस्सा ओबीसी की 25 प्रतिशत उपजातियों ने कब्जा लिया है करीब 983 ओबीसी जातियों को हिस्सेदारी न के बराबर है। कहा जा रहा है कि सरकार आयोग की सिफारिश के आधार पर ओबीसी आरक्षण को तीन से चार श्रेणी में बांट सकती है।
2 - पीएम मोदी के पिछड़े होने कि ब्राण्डिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने एक बार कांग्रेस (Congress) पर निशाना साधते हुए खुद को पिछड़ी जाति का बताया और कहा था कि पछड़ा वर्ग की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul gandhi) उस समय पीएम को लगातार 'चौकीदार चोर है (Chokidar chor hai)' और 'सभी चोरों का सरनेम मोदी है' जैसे बयान दे रहे थे। मोदी ने कहा, पिछड़ा होने की वजह से, हम पिछड़ों को अनेक बार ऐसी परेशानियां झेलनी पड़ी हैं। अनेक बार कांग्रेस और उसके साथियों ने मेरी हैसियत बताने वाली, मेरी जाति बताने वाली बातें कही हैं।
प्र.म. के इस बयान के बाद भाजपा नेताओं में प्र.म. को पिछड़ी जाति का बताने की होड़ लग गई थी। इसमें कोई दो राय नहीं कि 2019 के चुनावों में भाजपा को पिछड़ी जातियों को गोलबंद करने में इससे काफी मदद मिली थी। 2019 तक तो प्र.म. को पिछड़ा बताने की बात सामान्य तरीके से हो रही थी । पत्रकार विनोद जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाकर पिछड़ी जाति के ध्रुवीकरण की कोशिश करती है तो निश्चित है भाजपा पीएम मोदी की जाति को लेकर कैंपेन करेगी और बैकवर्ड प्राइड की तौर पर पेश करेगी।
3 - विश्वकर्मा योजना की लांचिंग
सरकार की विश्वकर्मा भगवान के नाम पर एक बहुत बड़ी योजना लॉन्च करने की तैयारी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई मौकों पर इस योजना की जानकारी दी है। 17 सितम्बर से केंद्र सरकार विश्वकर्मा योजना की शुरूआत करने जा रही है। यह योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों जैसे लोहार, सुनार, कुम्हार, बढ़ई, मूर्तिकार आदि की जिंदगी बदल सकती है। जाहिर है कि ये कारीगर जातियां पिछड़ी जातियां हैं, जिनकी संख्या बहुत बड़ी है। सबसे बड़ी बात ये है कि इनमें अधिकतर ऐसी हैं जिन्होंने ओबीसी आरक्षण का लाभ बहुत कम उठाया है।
4- भाजपा को ओबीसी पार्टी की पहचान देना
भारतीय जनता पार्टी की पहचान सवर्णों और बनियों की पार्टी के रूप में रही है। पार्टी को वोट तो ओबीसी दे रहे हैं पर पहचान आज भी सवर्णों की पार्टी की है। थिंकटैंक सीएसडीएस और लोकनीति के एक सर्वे बताता है कि उत्तर प्रदेश में 2019 में अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल यादवों का 60 फीसदी वोट सपा-बसपा गठबंधन को गया तो 23 फीसदी ने भाजपा गठबंधन को वोट दिया था । ओबीसी की दूसरी बड़ी जाति कोइरी-कुर्मी के वोट का 80 फीसदी हिस्सा भाजपा को मिला था। यादव - कोइरी - कुर्मी को छोड़ दें ओबीसी की अन्य जातियों में से 72 फीसदी ने भाजपा को वोट दिया था।
2019 में तो भाजपा को पिछड़ों का बंपर वोट मिला है। पर 2022 विधानसभा चुनावों में अगर यूपी को नजीर माने तो पिछड़े कुछ नाराज दिखे। शायद यही कारण है कि के दिनों में भाजपा की कार्यकारिणी की लिस्ट हो, मंत्रीमंडल हो या विधानपरिषद और राज्यसभा के कैंडिडेट हो सभी में पिछड़ी जातियों से आने वाले लोग बहुसंख्या में होती है। जाहिर है कि भाजपा लोकसभा चुनावों (loksabha election) में भी टिकट बंटवारे से लेकर और संगठन और प्रचार समितियों तक में पिछड़ी जातियों के लोग ही बहुतायत में रहने वाले हैं।
5- जातिगत जनगणना का विरोध न करके
विपक्ष जहां जातिगणना की डिमांड करके भाजपा को बैकफुट में ढकेलने की तैयारी में है, वहीं पार्टी जातिगत जनगणना का विरोध न करने की रणनीति पर चलकर विपक्ष के ब्रह्मास्त्र (Brahmastra) को फुस्स कर सकती है। बिहार (bihar) में जातिगत जनगणना की डिमांड करने वाली सर्वदलीय टीम में शामिल हो कर पार्टी ने संकेत पहले ही दे दिए थे। सुप्रीम कोर्ट में जातिगत जनगणना का केंद्र ने विरोध न करके एक और संकेत दे दिया है। कि वो आगामी दिनों में उसकी क्या रणनीति रहने वाली है।
Editorial

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