Lok Sabha Elections 2024
नई दिल्ली (एजेंसी)। 2024 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) में भाजपा (BJP) की अगुआई वाले एनडीए को चुनौती देने के लिए बना विपक्ष का इंडिया गठबंधन (india alliance) एक सवाल का जवाब ढूंढने में उलझ सा गया है। इस गुट में साथ आए सहयोगी भी अंदरखाने मान रहे हैं कि सीट (Seats) शेयरिंग सबसे बड़ा मुद्दा है। बुधवार दिल्ली में समन्वय समिति (Coordination Committee) की बैठक में कई फैसले लिए गए लेकिन सीटों की बात आगे के लिए टाल दी गई। इस बीच, फारूक अब्दुल्ला ने एक फॉर्म्युला सुझाया है। उन्होंने कहा कि जिन सीटों पर पहले से ही इंडिया (India) के घटक दलों का कब्जा है, उन पर बात न हो। मतलब वह सीट उसके पास ही रहने दिया जाए। इसके जरिए वह चाहतेहैं कि सीट शेयरिंग पर चर्चा उन सीटों के लिए हो जो भाजपा (BJP) या इंडिया से इतर दूसरे दलों के पास हैं। वैसे इससे भी बड़ा एक सवाल है जिस पर विपक्षी पार्टियां बात करने से कतराती हैं और वह है प्रधानमंत्री का उम्मीदवार कौन होगा? दो दर्जन से ज्यादा पार्टियां इंडिय के छाते में साथ आई हैं। भले ही ये न बोलें लेकिन दावेदार कई दिखते हैं। भाजपा (BJP) इस बात पर तंज भी कसती है।
कांग्रेस पार्टी (Congress Party) लगातार राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को 2024 के लिए प्रोजेक्ट कर रही है। अध्यक्ष भले ही मल्लिकार्जुन खरगे हैं लेकिन कांग्रेस के ट्विटर हैंडल पर राहुल गांधी छाए हुए हैं। भारत जोड़ो यात्रा के समय से कांग्रेस भी 'इमेज बिल्डिंग' में तल्लीन दिख रही है। कांग्रेस का तर्क है कि भाजपा (BJP) को शिकस्त देने के लिए वही ऐसी मुख्य विपक्षी पार्टी है जिसका पूरे देश में प्रभाव है। यहां वह सीटों नहीं बल्कि विरासत में मिली कांग्रेस की विचारधारा को आगे कर रही है। खैर, सवाल यह है क्षेत्रीय क्षत्रप कैसे मानेंगे। क्या दिल्ली और पंजाब में सीटें बांटने के लिए अरविंद केजरीवाल तैयार होंगे। क्या अखिलेश यादव को कांग्रेस यूपी में ज्यादा सीटें देगी ?
प्र.म. पद को लेकर सभी पार्टियां चुनाव नतीजों का इंतजार करना चाहेंगी। उन्हें लग रहा है कि अभी सबकी महत्वाकांक्षाएं सामने आ जाएंगी, नतीजे जैसे रहेंगे उस हिसाब से फैसला लेने में आसानी होगी। खैर, पिछले 48 घंटों में जो बयान आए हैं उससे लगता है कि प्र.म. पद को लेकर कैसे विपक्षी गठबंधन उलझा हुआ है।
पहले बात नीतीश की
अंदरखाने कहा जा रहा है कि नीतीश नाराज हैं। वह इंडिया गठबंधन का संयोजक बनना चाहते हैं शायद उससे प्र.म. पोस्ट के लिए रास्ता खुल जाए। दूसरी बात, वह इस गठबंधन का नाम कुछ और रखना चाहते थे। हालांकि जेडीयू कह रही है कि ये भाजपा के लोग भ्रम पैदा कर रहे हैं।
पहले जदयू के अध्यक्ष ललन सिंह ने एक सभा में खुलेआम कहा कि नीतीश कुमार देश का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। इसके बाद भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी ने कह दिया कि बिहार को छोड़ दीजिए, देश के कई राज्यों के लोग नीतीश कुमार को प्र.म. देखना चाहते हैं। वैसे, नीतीश कुमार से जब मीडिया पूछता है तो वह कहते हैं कि पद की कोई इच्छा नहीं है, लेकिन उनके नेता उन्हें प्र.म. उम्मीदवार बताकर इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं। बिहार के मंत्री ने कहा कि अगर सर्वे कराया जाए तो ऐसे बहुत लोग मिलेंगे जो चाहते हैं कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बनें। उन्होंने जोर देकर कहा कि नीतीश कुमार ने केंद्र और बिहार में सेवा दी है। बिहार में 17 साल सीएम रहे हैं। उनकी शुचिता पर कोई प्रश्न चिह्न नहीं लगा है और ना उनकी पारदर्शिता पर ।
विदेश में ममता से गजब सवाल ?
हां, वीडियो सोशल मीडिया पर भी है। श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे बुधवार को दुबई में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिले तो मुस्कुराते हुए पूछ लिया कि क्या वह विपक्षी दलों के गठबंधन का नेतृत्व करने जा रही हैं ? दुबई हवाई अड्डे पर ममता भी इस सवाल से हैरान रह गईं। उन्होंने जवाब दिया, 'अगर लोग हमारा समर्थन करते हैं, तो हम कल इस स्थिति (सत्ता) में हो सकते हैं।' साफ है कि ममता के मन में भी प्र.म. बनने की तमन्ना है।
राहुल के लिए कांग्रेस की बैटिंग ?
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) लगातार सोशल मीडिया के जरिए भाजपा पर निशाना साध रहे हैं। भारत जोड़ो यात्रा के बाद उनको लेकर लोगों का नजरिया थोड़ा बदलता दिखा है। उनकी लोकसभा सदस्यता गई और बाद में संसद में लौटे तो भाजपा (BJP) पर आक्रामक रहे। इस समय वह वायनाड से सांसद है। कुछ हफ्ते पहले खबर आई थी कि राहुल गांधी अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता हरीश रावत कहते हैं कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के साथ उनकी मोहब्बत की दुकान चल रही है। जब नेतृत्व का सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि खरगे जी कह चुके हैं कि सब लोग मिलकर चुनाव लड़ेंगे और 2024 में रिजल्ट आने के बाद बैठेंगे और चंद घंटों में तय कर लेंगे। क्या राहुल गठबंधन से पहले कांग्रेस (Congress) के नेता यानी प्र.म. कैंडिडेट मान लिए जाएं? इसका भी सीधे-सीधे कांग्रेस (Congress) के लोग जवाब देने से बचते हैं।
Editorial

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