Pratahkal-Celibacy, the mine of all gems
मुंबई । विरार जैन स्थानक में पर्वाधिराज पर्यूषण (Paryushana) के तीसरे दिन साध्वी डॉ स्नेहप्रभा ने कहा कि शील को ब्रह्मचर्य (Celibacy) भी कहते हैं। तीन लोक की संपदा और सब रत्नों की खान ब्रह्मचर्य (शील) है। धर्मसभा में माँ जिनवाणी अंतगढ सूत्र का वाचन साध्वी डॉ. प्रज्ञाश्री ने किया। लक्ष्मीलाल कच्छारा, भूरालाल जैन, हिम्मत दोलावत, प्रकाश, शौकीन दुगड, चंद्रप्रकाश तलेसरा, गहरीलाल जैन, कालुलाल कच्छारा आदि की उपस्थिति रही।
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