✕
नित्य नूतन हो जाने की प्रकृति है सनातन धर्म
By EditorialPublished on
हृदयनारायण दीक्षित : सनातन शब्द का अर्थ है जो सदा से है और जिसका आदि या कोई अंत नहीं है। प्रकृति की प्रत्येक इकाई गुणधर्म होता है। अग्नि का धर्म ताप है और स्पर्श वायु का धर्म है। मनुष्य का धर्म लोकमंगल के कर्तव्य हैं। इस तरह संपूर्ण अस्तित्व के संविधान का

x

हृदयनारायण दीक्षित : सनातन शब्द का अर्थ है जो सदा से है और जिसका आदि या कोई अंत नहीं है। प्रकृति की प्रत्येक इकाई गुणधर्म होता है। अग्नि का धर्म ताप है और स्पर्श वायु का धर्म है। मनुष्य का धर्म लोकमंगल के कर्तव्य हैं। इस तरह संपूर्ण अस्तित्व के संविधान का नाम है सनातन धर्म | सनातन धर्म भारत का धर्म है।
इसका ध्येय विश्व लोकमंगल है, पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के पुत्र एवं मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना से की और सनातन को पूरी तरह मिटाने का आह्वान किया। स्टालिन की पार्टी द्रमुक के एक और नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा ने सनातन को एड्स और कुष्ठ रोग जैसा बता दिया। ऐसे बयान सनातन का अपमान हैं। इससे करोड़ों लोगों का मन आहत है।
सनातन को लेकर सद्गुरु जग्गी वासुदेव का कहना है, 'सनातन धर्म कोई ऐसी प्रक्रिया नहीं है जो आपको यह बताए कि इस पर विश्वास कीजिए नहीं तो आप मर जाएंगे। यह आपको प्रेरित करता है कि आपके मन में प्रश्न उठें।' प्रश्न और जिज्ञासा सनातन धर्म के महत्वपूर्ण तत्व हैं। विभिन्न कारणों से हुए मतांतरणों के बावजूद भारत में बहुसंख्यक इसी धर्म में आस्था रखते हैं।
वैदिक काल के दार्शनिक ऋषि प्रकृति और मनुष्यों के स्वाभाविक परिवेश के प्रति जिज्ञासु रहे। उन्होंने देखा कि अस्तित्व नियमबंधन में हैं। उन्होंने प्रकृति की शक्तियों को भिन्न-भिन्न देव नाम दिए। उन्होंने प्राकृतिक नियमों को भी ऋतु सत्य और धर्म आदि नाम दिए । प्रकृति प्रत्यक्ष सत्य है उसकी शक्तियां भी प्रत्यक्ष सत्य हैं और नियम भी प्रत्यक्ष सत्य हैं। यही सत्य मानव समाज में भी दिखाई पड़ता है। नियमों का पालन करना कर्तव्य है । यही धर्म भी है। ऋवेद में उल्लेख है, 'अग्नि के नियमों का कोई उल्लंघन नहीं कर सकता।'
नदियां ऊपर से नीचे समुद्र की ओर बहती हैं। यह प्रकृति का नियम है और जल का धर्म । नदियां ऋतावरी कही गई हैं। ऋ अर्थात प्रकृति के संविधान की पालनकर्ता । सूर्य के लिए उल्लेख है, 'उसके नियम को इंद्र, वरुण और रुद्र आदि देवता भी नहीं तोड़ सकते। ऋषि वायु से कहते हैं, 'नियमों के अनुसार चलने वाले मरुद्गण और सरस्वती हमारी स्तुतियां सुनें ।' सभी दिव्य शक्तियां प्रकृति के नियमों का पालन करती हैं। नियम तोड़ने का अधिकार किसी को नहीं है । यही अस्तित्व का नियम है। इसे ऋ कहते हैं । ऋ और धर्म पर्यायवाची हैं। वैदिककालीन मान्यता थी कि नियम पालन कराना वरुण देवता का कर्तव्य है । ऋवेद के अनुसार 'यह काम भी वह धर्मानुसार ही करते हैं। सूर्य भी धर्मानुसार संसार को प्रकाश से भरते हैं। सूर्योदय, सूर्यास्त, दिन-रात सब नियमानुसार हैं। सारे नियम सत्य हैं। सनातन हैं।' ऋतु, सत्य और धर्म एक जैसे हैं । भारतीय परंपरा में विष्णु बड़े देवता हैं। वह अवतार लेते हैं, लेकिन विष्णु के लिए भी धर्म पालन अनिवार्य है। ऋवेद के अनुसार 'उन्होंने तीन पग चलकर ब्रह्मांड नाप दिया था, लेकिन वह कार्य भी धर्मानुसार पूरा किया। बृहदारण्यक उपनिषद में उल्लेख है, 'जिससे सूर्य उदय- अस्त होता है, उस धर्म को देवताओं ने बनाया।' प्रकृति की शक्तियां नियम बंधन के अनुशासन में हैं तो मनुष्यों को भी तद्नुसार धर्म-नियमों का पालन करना चाहिए। सनातन धर्म का विकास प्राकृतिक नियमों के विस्तार से हुआ। सनातन धर्म रिलीजन या मजहब नहीं है। रिलीजन और मजहब में एक ईश्वर और एक देवदूत की आस्था है। प्रत्येक मजहब या रिलीजन का एक पवित्र ग्रंथ है। उनके सत्य अंतिम हैं। उन पर कोई तर्क और जिज्ञासा नहीं हो सकती, लेकिन सनातन में ईश्वर भी प्रश्न और जिज्ञासा के दायरे में आते हैं। धर्म-नियम धारण करना सभी तत्वों का धर्म है। बृहदारण्यक उपनिषद के अनुसार धर्म सभी भूतों का मधु- सार है और सभी भूत धर्म का मधु-सार हैं। यही सनातन है । धर्म पालन में जबरदस्ती नहीं है। सनातन में स्वतंत्र विवेक की महत्ता है। श्रीकृष्ण ने गीता में अर्जुन से कहा, 'इस प्रकार मैंने तुम्हे गुह्य ज्ञान बता दिया।
इस पर ठीक से विचार करो और अपनी इच्छानुसार जो चाहो सो करो।' दुनिया के किसी भी पंथ मजहब में ऐसी छूट नहीं है। ऋवेद के हजारों मंत्रों में कहीं भी आज्ञासूचक वाक्य नहीं हैं। सनातन का आधार विवेकपूर्ण दर्शन है। इसका सतत विकास हुआ है। सनातन धर्म परंपरा में नित्य नूतन हो जाने की प्रकृति है। इसमें कालबाह्य को छोड़ने और कालसंगत को जोड़ने की क्षमता है। कुछ कालबाह्य मान्यताएं भी संभव हैं। सनातनधर्मी अनेक महानुभावों ने रूढ़ियों की समाप्ति का काम किया है। राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद, विवेकानंद आदि महानुभावों ने सती प्रथा, बाल विवाह, अस्पृश्यता आदि कुरीतियों के विरुद्ध लोक जागरण का काम किया। अस्पृश्यता और जातिभेद जैसी बुराइयों की समाप्ति को लेकर डा. आंबेडकर, डा. हेडगेवार और डा. लोहिया ने भी खूब परिश्रम किया। तमिल भूमि के वासी कंबन ने रामकथा लिखी और सनातन धर्म को प्रतिष्ठा दी। इसी भूमि के राजगोपालाचारी ने भारतीय संस्कृति के लिए अविस्मरणीय काम किया । उन्होंने सभी वर्गों के मंदिर प्रवेश की मुहिम चलाई। यहीं से निकले विश्वविख्यात दार्शनिक डा. राधाकृष्णन ने भारतीय दर्शन को विश्वव्यापी बनाया। उन्होंने जोसेफ स्टालिन को समझाया कि रक्तपात बुरा है। इसी भेंट में स्टालिन ने उनसे पूछा कि भारत की लोकप्रिय भाषा कौन सी है ? राधाकृष्णन ने हिंदी का नाम लिया। राष्ट्रपति रहे विज्ञानी एपीजे अब्दुल कलाम भी तमिलनाडु के थे । द्वै दर्शन में भक्ति भाव भरने वाले रामानुजाचार्य भी यहीं के थे। आश्चर्य है कि उदयनिधि स्टालिन ने अपने बयान से ऐसे तमाम महानुभावों के कार्यों को भी अपमानित किया । सनातन धर्म में आज्ञासूचक संहिता नहीं है। छह प्राचीन दर्शन एवं लोकायत जैसे नास्तिक दर्शन भी सनातन धर्म का हिस्सा हैं। यहां सुसंगत दार्शनिक दृष्टिकोण है। सनातन धर्म किसी देवदूत की उद्घोषणा नहीं है । सनातन धर्म का न कोई आदि है न कोई अंत । प्रश्न है कि क्या उदयनिधि स्टालिन इस्लाम या ईसाइयत को भी इसी तरह निशाने पर ले सकते हैं? आखिर वह ऐसा अनर्गल बयान कैसे दे सकते हैं? प्रश्न यह भी है कि द्रमुक के सहयोगी दलों के नेता उनके बयान का विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं? (लेखक उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हैं)
- sanatan dharma eternal religion Indian philosophy nature's laws universal principles cosmic order questioning curiosity spirituality Hridayanarayan Dixit spiritual leader Indian traditions MK Stalin Udhayanidhi Stalin political leaders derogatory comments A. Raja DMK leader religious remarks Sadhguru Jaggi Vasudev spiritual guru questioning belief Vedic philosophy natural laws dharma Vishnu divine duty cosmic order Religious tolerance free will spiritual exploration Sanatan Dharma Controversy

Editorial
Next Story
Related News
X
