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दानधर्म जीवन का अंग
By EditorialPublished on
विरार (Virar) जैन स्थानक में पर्यूषण (Paryushana) के दूसरे दिन साध्वी डॉ स्नेहप्रभा ने कहा कि दान से समृद्धि, ऋद्धि व सिद्धी प्राप्त होती है।

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मुंबई । विरार (Virar) जैन स्थानक में पर्यूषण (Paryushana) के दूसरे दिन साध्वी डॉ स्नेहप्रभा ने कहा कि दान से समृद्धि, ऋद्धि व सिद्धी प्राप्त होती है। दान से विपत्तियाँ दूर होती है, संपत्ति नजदीक आती है। लक्ष्मी देवी का आगमन होता है। ईश्वर दोस्त बन जाते हैं व दुर्जन सज्जन हो जाते हैं। साध्वी डॉ. प्रज्ञाश्री ने अंतगढसूत्र का वाचन किया। सभा में अध्यक्ष लक्ष्मीलाल कच्छारा, प्रकाश दुगड, गहरीलाल जैन आदि मौजूद रहे। संचालन प्रकाश सोलंकी ने किया।

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