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नये नियमों से चैरिटेबल संस्थाओं के छूटे पसीने, सरकार से मोहलत की मांग
By EditorialPublished on
सरकार ने चैरिटेबल ट्रस्ट्स (Charitable Organizations) के लिये ऑडिट रिपोर्ट (Audit Report) के नियम बेहद कड़े कर दिये हैं। सरकार ने इस साल इस बाबत नये नियम लागू किये हैं जिसके बाद देशभर के चैरिटेबल ट्रस्ट्स को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन नये नियमों के तहत अब ट्रस्ट को अपने वित्तीय विवरण बहुत बारीकी से और विस्तृत स्वरुप में जमा करना अनिवार्य है। नामची और बड़े ट्रस्ट तो किसी तरह इन नियमों को निभा भी लेंगे लेकिन मध्यम और छोटे स्तर के धर्मादाय संस्थाओं अर्थात चैरिटेबल ट्रस्ट के लिये यह काफी दिक्कत भ

मुंबई । सरकार ने चैरिटेबल ट्रस्ट्स (Charitable Organizations) के लिये ऑडिट रिपोर्ट (Audit Report) के नियम बेहद कड़े कर दिये हैं। सरकार ने इस साल इस बाबत नये नियम लागू किये हैं जिसके बाद देशभर के चैरिटेबल ट्रस्ट्स को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन नये नियमों के तहत अब ट्रस्ट को अपने वित्तीय विवरण बहुत बारीकी से और विस्तृत स्वरुप में जमा करना अनिवार्य है। नामची और बड़े ट्रस्ट तो किसी तरह इन नियमों को निभा भी लेंगे लेकिन मध्यम और छोटे स्तर के धर्मादाय संस्थाओं अर्थात चैरिटेबल ट्रस्ट के लिये यह काफी दिक्कत भरा साबित हो रहा है।
टैक्स के जानकारों की मानें तो सरकार ने जितने कड़े नियम लागू कर दिये हैं और प्रक्रिया को जितना विस्तृत और जटिल बना दिया है कि चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के लिये भी इस तरह की रिपोर्टिंग पेचीदा काम हो गया है।
देशभर में लाखों चैरिटेबल ट्रस्ट हैं और अब उन्हें यह समझ ही नहीं आ रहा है कि अपने वित्तीय विवरणों की जानकारी देते समय उन्हें क्या जानकारी देनी है और किस तरह से देनी है? यह दिक्कत और ज्यादा इसलिये महसूस हो रही है कि सितंबर अंत तक वित्तीय कामकाज के ब्यौरे जमा किये जाने हैं।
मोटे तौर पर जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक, अब चैरिटेबल ट्रस्ट को अपने ट्रस्टियों और उनके रिश्तेदारों, सेटलर्स और आर्थिक योगदान देनेवालों सभी की पूरी जानकारी देनी होगी। कितना पैसा दान स्वरूप में लिया गया, किससे लिया गया और किस माध्यम से लिया गया, यह सारा कुछ रिपोर्ट करना होगा। इलेक्ट्रॉनिक तरीके से स्वीकार की गई राशि और अन्य भुगतान माध्यम के जरिये प्राप्त राशि का अलग-अलग ब्यौरा देना होगा। विदेश से भी अगर दान मिलता है, भले ही वह रुपये में मिले, लेकिन उसकी भी पूरी विस्तृत जानकारी देनी होगी। इस तरह के तमाम मापदंड और शर्तें हैं जिन्हें अब चैरिटेबल ट्रस्ट को पूरा करना ही होगा। इनमें कोई भी कोताही करने या कोई भी जानकारी नहीं देने पर ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द हो सकता है। चैरिटेबल ट्रस्ट के सामने पेश आई इस दिक्कत का असर चार्टर्ड एकाउंटेंट्स पर भी पड़ता नजर आ रहा है। कामकाज में कोताही होने पर उनकी भी जवाबदेही तय होने से उनके लिये भी यह एक नया संकट है। लिहाजा चेम्बर ऑफ टॅक्स कंसल्टेंट्स और बॉम्बे चार्टर्ड एकाउंटेंट्स सोसायटी ने वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की है कि नये नियमों के अनुपालन को फिलहाल कुछ समय के लिये स्थगित किया जायेगा। सरकार से उम्मीद की जा रही है कि नये नियमों पर अमल सालभर के लिये टाल दिया जाये ताकि चैरिटेबल ट्रस्ट इसके लिये अपने आप को तैयार कर सकें।
दलील यही दी जा रही है कि ज्यादातर चैरिटेबल ट्रस्ट संचालित करनेवाले लोग पेशेवर नहीं है और वे अपना कोई निजी कारोबार या नौकरी करते हुये चैरिटेबल ट्रस्ट का कार्य संचालित करते हैं। लिहाजा उनके लिये इस तरह की जटिल औपचारिकताओं को पूरा करना काफी कठिन है। हालांकि नियमों का यह नया प्रारूप सरकार ने फरवरी में ही जारी कर दिया था, लेकिन ट्रस्ट अगस्त में ही चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की नियुक्ति कर सकते थे, जिसके बाद सीए के लिये भी सितंबर अंत तक सारा काम निपटाना मुमकिन नहीं है। यही वजह है कि फिलहाल मौजूदा स्थिति को देखते हुये सरकार से मोहलत की उम्मीद की जा रही है।

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