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जयपुर (कार्यालय संवाददाता) मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) विधानसभा (Vidhansabha) से पहले हर वर्ग को चुनाव खुश करने में जुटे हैं। अब अनुसूचित जाति (एससी) SC और अनुसूचित जनजाति (एसटी) ST वर्ग को साधने के लिए गहलोत इन दोनों वर्गों का आरक्षण दो-दो प्रतिशत बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं । प्रस्ताव तैयार किए जाने के साथ ही विधि विशेषज्ञों की सलाह ली जा रही है। कांग्रेस (Congress) की रणनीति है कि आचार संहिता घोषित होने से पहले आरक्षण बढ़ाने की घोषणा कर दी जाए, ताकि चुनावी लाभ लिया जा सके।
वर्तमान में प्रदेश में एससी को 16 और एसटी को 12 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है । दो- दो प्रतिशत बढ़ाने पर एससी को 18 और एसटी को 14 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा ।
गहलोत सरकार का तर्क है कि एससी, एसटी के विभिन्न संगठन जाति के आधार पर आरक्षण (Reservation) बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री गहलोत ने पिछले महीने में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की मौजूदगी में बांसवाड़ा (Banswara) में ओबीसी (OBC) का आरक्षण 21 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की घोषणा की थी, लेकिन उस पर अमल नहीं हो सका है । अगर वह भी लागू हो जाता है तो एससी व एसटी का दो-दो प्रतिशत आरक्षण बढ़ाने पर प्रदेश में कुल आरक्षण 64 से बढ़ाकर 74 प्रतिशत हो जाएगा। सीएम लगातार केंद्र सरकार से जातिगत जनगणना (Caste Census) कराने की मांग कर रहे हैं । गहलोत ने प्रदेश स्तर पर जातिगत जनगणना करवाने की बात भी कही है। यह है राजनीतिक गणित : राज्य की 200 विधानसभा सीटों में से एससी के लिए 34 और एसटी के लिए 25 सीटें आरक्षित हैं। साथ ही 50 सीटों पर एससी की आबादी 20 प्रतिशत के करीब है। करीब दो दर्जन सीटों पर एसटी की आबादी 20 प्रतिशत है। वहीं, लोकसभा
(Loksabha)
की 25 सीटों में से 4 एससी व 3 एसटी के लिए आरक्षित हैं। जनसंख्या के लिहाज से 15 प्रतिशत से अधिक एससी और 14 प्रतिशत एसटी हैं।
एसटी में उदयपुर (Udaipur) संभाग की 17 सीटों पर आदिवासियों का प्रभाव है । इन क्षेत्रों में करीब एक दशक पहले तक कांग्रेस का प्रभाव था, लेकिन अब भारतीय ट्राइबल पार्टी (Indian Tribal Party) और भारतीय आदिवासी पार्टी (Tribal Party of India) सक्रिय है। इसका नुकसान कांग्रेस को हुआ । अब आरक्षण बढ़ाकर कांग्रेस सरकार इस वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है।
Editorial

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