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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में आदिगुरू शंकराचार्य की 108 फी ऊंची प्रतिमा का अनावरण करने वाले हैं। पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मध्यप्रदेश सरकार के 20 वर्षों के कार्यकाल का जो रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने जारी किया था, उसमें प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को दुनियाभर में पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार के कार्यों का भी उल्लेख किया गया है।
मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) ने अपनी कला और रचनात्मकता में नवीनतम तकनीक को शामिल तो किया, लेकिन अपनी संस्कृति को कभी नहीं छोड़ा। यही वजह है कि हमारी कला, भोजन और रचनात्मकता का न सिर्फ भारतवर्ष
(India)
बल्कि पूरा विश्व लोहा मान रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने पिछले 20 वर्षों में प्रदेश की सांस्कृतिक संपन्नता को बढ़ाने में अभूतपूर्व काम किया है। आंकारेश्वर (Ankareshwar) में बन रहे अद्वैत संस्थान (Advaita Sansthan), उज्जैन (Ujjain) में महाकाल कॉरिडोर (Mahakal Corridor) इसका बहुत ही खूबसूरत प्रतिफल हैं। इसी तरह म्यूजिक सेक्टर (Music sector) के लिए ग्वालियर (Gwalior) को यूनेस्को क्रिएटिव सिटी नेटवर्क (UNESCO Creative Cities Network) में शामिल करने प्रस्ताव भी प्रेषित किया गया है, साथ ही भोपाल के मोती महल में राजाभोज म्यूजियम के लिए केंद्र सरकार द्वारा राशि मंजूर किया जाना भी शामिल है।
मध्यप्रदेश में दोनों ज्योतिर्लिंग मंदिर के आसपास धर्म- संस्कृति को विकसित किया जा रहा है। उज्जैन में महाकाल लोक के साथ खंडवा
(Khandwa)
के ओंकारेश्वर स्थित ओंकार पर्वत पर अध्यात्म लोक 'एकात्मधाम' विस्तार ले रहा है। यहां ओंकार पर्वत को काटकर 28 एकड़ जमीन पर इसकी स्थापना की जा रही है। यहां आदि गुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित होगी, जिसका अनावरण अगले महीने किया जाना तय हुआ है। 54 फीट ऊंचे आधार पर आदि गुरु शंकराचार्य (Adi Guru Shankaracharya) की बाल्य अवस्था की 108 फीट की मूर्ति की स्थापना के लिए काम किया जा रहा है। चार स्लैब में बनने वाले आधार स्तंभ का कार्य अंतिम चरण में है। लगभग 2400 करोड़ रुपए के बजट से बनने वाले इस स्थान के बाकी बचे हिस्से का काम दिसंबर 2024 तक पूरा होगा। मध्यप्रदेश सरकार ने ओंकारेश्वर में बन रहे एकात्मधाम प्रोजेक्ट को पहली बार अधिकृत तौर पर देश के सामने रखा। देश के जाने-माने संत, विद्वान और ओपिनियन मेकर्स की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने इस प्रोजेक्ट की बारीकियों पर निर्णय लिया है।
एकात्मधाम में होगा अद्वैत वेदांत संस्थान
आदि गुरु शंकराचार्य जी ने भारत की तीन बार परिक्रमा की। उन्होंने दुनिया को अद्वैत वेदांत का सिद्धांत दिया। इस "एकात्मधाम' में आदि गुरु शंकराचार्य के जीवन दर्शन को बताने वाला संग्रहालय, अद्वैत वेदांत सिद्धांत के अध्ययन के लिए संस्थान भी होगा। ओंकार पर्वत पर स्थापित होने वाली "एकात्मधाम' यानी एकात्मता की प्रतिमा को 'स्टैच्यू ऑफ वननेस' (Statue of Oneness) नाम दिया गया है। यहां प्रशिक्षण एवं सूचना केंद्र, अभय घाट, संन्यास और गुफा मंदिर सहित 35 हजार पेड़ों का वन विहार होगा। अन्नपूर्णा मंदिर (Annapurna Temple), पंचायत मंदिर के साथ ओम स्तंभ, कला, प्रदर्शनी जैसी अद्भुत रचनाओं का विस्तार किया जाएगा।
वर्चुअल नाव की सवारी, 3D गैलरी
'स्टैच्यू ऑफ वननेस' को आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और MPSTDC (मध्यप्रदेश स्टेट टूरिस्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) के मार्गदर्शन में आकार दिया जा रहा है। एकात्मधाम में आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा के साथ एक संग्रहालय परिसर भी होगा। यह पारंपरिक मंदिर स्थापत्य शैली के अनुरूप होगा। संग्रहालय में 3D होलोग्राम प्रोजेक्शन गैलरी, कलाकृतियां, स्क्रीन थिएटर और 'अद्वैत नर्मदा विहार' (Advaita Narmada Vihar) नाम से वर्चुअल नाव की सवारी होगी। इसमें लोग आचार्य शंकर की महान शिक्षाओं का ऑडियो-विजुअल यात्रा के जरिए आनंद ले सकेंगे।
उज्जैन में श्री महाकाल लोक ने खोले आर्थिक विकास के द्वार
श्री महाकाल लोक उज्जैन में विकास की एक नई क्रांति लेकर आया है। इस 'लोक' ने उज्जैन शहर या कहें कि पूरे जिले का आर्थिक परिदृश्य बदलने का चमत्कार कर दिया है। श्री महाकाल लोक अपनी पूर्णता के साथ उज्जैन के नागरिकों को आत्मनिर्भरता, रोजगार और विकास की नई राह पर ले जा रहा है। उज्जैन में इस वक्त होटल-रेस्तरां और टैक्सी सेवा के साथ ही रेलवे व सार्वजनिक परिवहन के अन्य साधनों ने जो छलांग लगाई है, वह अचंभित भी करती है। उज्जयिनी में स्थानीय रोजगार में वृद्धि हुई है और लोगों में आत्मनिर्भरता बढ़ी है। उज्जैन में लोगों की आवाजाही बढ़ने से कैसे यहां की तस्वीर बदल रही है। जाहिर है कि जब स्थानीय निकायों व सरकारी ऐजेंसियों के पास राजस्व के जरिये बढ़ेंगे तो स्थानीय रहवासियों के लाभ का दायरा व्यापक होगा। कुल मिलाकर उज्जैन में हर तरह के व्यवसाय में जबरदस्त उछाल आया है।
सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए सदैव तत्पर
वर्ष 2017 में नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान ओंकारेश्वर में मन में विचार आया कि जहां आदि गुरु शंकराचार्य ने 8 वर्ष की उम्र में दीक्षा ग्रहण की। ज्ञान प्राप्त कर भारत भ्रमण पर निकले। इस दीक्षास्थली पर उनकी प्रतिमा हो, संग्रहालय हो, अद्वैत वेदांत का यह दुनिया का केंद्र बने । अद्वैत वेदांत, सनातन और भारतीय संस्कृति का केंद्र प्रदेश को बनाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार (Government of Madhya Pradesh) सदैव तत्पर है। प्रदेश में जनजातीय कला, संस्कृति और विरासत को सहेज कर रखा जाएगा।
शिवराज सिंह चौहान , मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश
Editorial

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