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नई दिल्ली/ जयपुर (एजेंसी)। कांग्रेस (Congress) इस बार के विधानसभा चुनाव (Vidhansabha Election) में पिछली गलतियों से सबक लेते हुए टिकट पैटर्न बदलने जा रही है। सत्ता में रहकर हर बार ज्यादातर मंत्री-विधायकों को रिपीट करती आ रही पार्टी इस बार 65 से 70 प्रतिशत तक नए चेहरों को टिकट देने की कोशिश में है। टिकट चयन के मामले में कांग्रेस पहली बार मल्टी लेवल वर्किंग कर रही है।
प्रदेश इकाई के साथ सेंट्रल लीडरशिप भी इस बार राजस्थान (Rajasthan) से ज्यादा उम्मीदें दिखने के कारण काफी गंभीर है। हर सीट पर उम्मीदवार चयन में बारीकी से हार जीत का आकलन किया जा रहा है। कांग्रेस चाहती है कि राजस्थान में इस बार सरकार रिपीट करने का रिकॉर्ड तोड़े।
पार्टी की ओर से कराए गए विभिन्न सर्वे में 50 प्रतिशत मौजूदा मंत्रियों और विधायकों की फील्ड में स्थिति कमजोर मिली है। यानी आधे विधायकों को फिर से टिकट मिलने की गारंटी नहीं है। यही कारण है कि सीएम अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) से लेकर प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा (Sukhjinder Singh Randhawa) जिताऊ उम्मीदवार को ही टिकट देने की बात कह कर नेताओं को टिकट कटने के लिए पहले से ही तैयार रहने के संकेत दे रहे हैं।
एआईसीसी ने तय किया है कि चुनाव में 50% चेहरे युवा होंगे और इनमें भी महिलाओं की भागीदारी प्रमुखता से होगी। लोकल स्तर पर पार्टी के खिलाफ एंटी इन्कम्बेंसी कम करने के लिहाज से उन सीटों पर इस बार खास बदलाव करने की तैयारी है, जहां लगातार एक ही परिवार को टिकट मिलता आ रहा है। इसके अलावा दो बार चुनाव हारने वाले नेताओं को भी टिकट मिलने की उम्मीद कम है। राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल
(KC Venugopal)
का कहना है कि राजस्थान को लेकर पार्टी का पूरा फोकस और सोच की दिशा इस पॉइंट पर है कि सरकार कैसे रिपीट हो ? हम देख रहे हैं। कि पिछले चुनावों में वे कौनसी गलतियां रहीं जब सत्ता में रहते हुए अच्छे काम के बावजूद हम वापस सरकार नहीं बना पाए। इस बार उन्हीं गलतियों से राजस्थान प्रदश काग्रस कमटा सबक लेकर आगे बढ़ रहे हैं । उसी हिसाब से फैसले लिए जाएंगे।
एआईसीसी ने तय किए टिकट के 5 बड़े पैरामीटर
1. 50 प्रतिशत युवाओं को टिकट, महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।
2. जिस सीट पर लगातार एक ही परिवार को टिकट मिलता आ रहा वहां बदलाव संभव ।
3. लगातार दो बार चुनाव हारने वालों को टिकट नहीं, नए लोगों को मिलेगा मौका।
4. किसी बड़े नेता की टिकट में सिफारिश नहीं चलेगी, सर्वे में जो जिताऊ उसी को टिकट ।
5. भ्रष्टाचार के आरोपों और विवादों से घिरे विधायकों को टिकट नहीं।
2 बड़े फैक्ट्स उम्मीदवार चयन के लिए
1. पार्टी सत्ता में रहते विधायकों को दोबारा मैदान में उतारती है तो ज्यादातर हारते हैं
2013 में कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए 105 उम्मीदवार रिपीट किए थे। इनमें से 91 हार गए थे। रिपीट किए गए प्रत्याशियों में 75 विधायक भी शामिल थे, लेकिन सिर्फ 5 ही जीते थे। बाकी 70 विधायकों को हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस ने इस चुनाव में 31 ऐसे लोगों को टिकट दिया था, जो पिछले चुनाव में हार गए थे। इनमें से भी मात्र 9 ही जीते थे।
2003 के चुनाव से पहले कांग्रेस सत्ता में थी । 153 सीटों के साथ अशोक गहलोत सीएम थे। चुनाव में कांग्रेस महज 56 सीटों पर सिमट गई थी। फिर से निर्वाचित होने वाले विधायकों का प्रतिशत मात्र 17 पर अटक गया था। यानी 153 सीटों के साथ सत्ता में रही कांग्रेस के सिर्फ 34 ही विधायक फिर से चुनकर विधानसभा पहुंच सके थे।
2. मंत्री रहकर चुनाव लड़ने वाले ज्यादातर नेता फिर से जीत नहीं पाते
2013 के चुनाव में गहलोत मंत्रिमंडल में शामिल रहे 31 मंत्री सीट नहीं बचा पाए थे। हारने वाले मंत्रियों में डॉ. जितेंद्र सिंह, राजेंद्र पारीक, हेमाराम और हरजीराम बुरड़क, दुरू मियां, भरतसिंह, बीना काक, शांति धारीवाल, भंवरलाल मेघवाल, ब्रजकिशोर शर्मा, परसादीलाल, जैसे दिग्गज नेता शामिल थे।
2003 के चुनाव में सत्ता के खिलाफ पब्लिक में पनपी नाराजगी के कारण गहलोत मंत्रिमंडल के 18 मंत्री हार गए थे। हारने वाले मंत्रियों में डॉ. कमला बेनीवाल, डॉ. जकिया, हरिसिंह कुम्हेर, डॉ. जितेंद्र सिंह, मास्टर भंवरलाल मेघवाल, इंदिरा मायाराम, जनार्दन सिंह गहलोत, माधव सिंह दीवान, हबीबुर्रहमान, छोगाराम बाकोलिया, गुलाबसिंह शक्तावत, हरेंद्र मिर्धा, खेतसिंह राठौड़, तैयब हुसैन शामिल थे।
Editorial

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