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नाबालिग पत्नी को नहीं भेजने पर दामाद ने सास की हत्या कर मार्बल स्लरी में फैंका
By EditorialPublished on
नाबालिग पत्नी को बार-बार कहने के बाद भी नहीं भेजने से आवेश में आए एक दामाद अपनी सास को बहला- फुसलाकर अपने साथ राजसमंद अपने गांव लेकर गया और उसके साथ मारपीट कर गला घोंटकर हत्या कर शव को मार्बल स्लरी यार्ड में फैंक दिया। महिला का फोन आरोपी ने भुवाणा में फैंक दिया।

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उदयपुर : नाबालिग पत्नी (Underage Wife) को बार-बार कहने के बाद भी नहीं भेजने से आवेश में आए एक दामाद अपनी सास को बहला- फुसलाकर अपने साथ राजसमंद अपने गांव लेकर गया और उसके साथ मारपीट (Fight) कर गला घोंटकर हत्या कर शव को मार्बल स्लरी यार्ड में फैंक दिया। महिला का फोन आरोपी ने भुवाणा में फैंक दिया। महिला का फोन बरामद होने पर पुलिस (Police) ने शंका के आधार पर आरोपी को पकड़ा और मृतका का शव मार्बल स्लरी यार्ड से बरामद किया गया। जो आधे से अधिक मार्बल स्लरी में धंस चुका था।
मामला सुखेर थाना क्षेत्र का है। गीता (33) पत्नी सुरेन्द्र सिंह निवासी गोवणा ब्यावर हाल हवा मंगरी सुखेर ने अपनी पुत्री जान्हवी कुँवर (16) की शादी इसी वर्ष 12 मई को ईश्वर सिंह पुत्र धनसिंह निवासी आरना केलवा राजसमंद से करवाई थी। शादी के दौरान यह तय किया था कि बालिग होने पर ही जान्हवी कुँवर को ससुराल भेजा जाएगा और तब वह अपने पीहर में रहकर पढ़ाई करेगी। साथ ही यह भी तय किया गया था कि जान्हवी कुंवर ससुराल जाने के बाद भी वह वहां पर पढ़ाई करेगी। शादी के कुछ दिनों बाद पता चला कि ईश्वर सिंह की पूर्व में शादी हो चुकी है, जिससे उसका तलाक भी हो चुका है। यह बात भी जान्हवी के परिजनों से छिपाई गई। शादी के बाद से ही ईश्वर सिंह लगातार दबाव बना रहा था कि गीता अपनी पुत्री जान्हवी को ससुराल भेज दे पर गीता पूर्व में तय हुए वायदे के अनुसार ससुराल नहीं भेज रही थी। इसी को लेकर ईश्वर सिंह नाराज चल रहा था।
रविवार को ईश्वर सिंह उदयपुर आया और अपनी सास गीता कुँवर को बहला- फुसलाकर साथ लेकर अपने गांव आरना केलवा राजसमंद लेकर गया। दोपहर को जान्हवी ने मां गीता को फोन किया तो गीता ने कहा कि वह कुछ समय में रवाना हो रही है। शाम को वापस फोन किया तो गीता ने फोन नहीं उठाया। इस पर लगातार कई बार फोन किया तो केवल मैसेज ही आ रहे थे। जब ईश्वर सिंह को फोन तो उसने कहा कि उसकी मां निकल चुकी है। शाम तक नहीं आने पर गीता की दोनों बेटियां जान्हवी व ईशिका दोनों सुखेर थाने पहुँची और रिपोर्ट दी। इस पर पुलिस ने गीता की लोकेशन निकलवाई तो उसकी लोकेशन मीरानगर में एक होटल के पास आई।
इस पर दोनों बेटियां तलाशने के लिए गई तो काफी तलाशने के बाद भी उसका पता नहीं चला। बेटियों ने सोचा कि मां घर पर आ गई होगी तो वे पुनः घर पर गई तो मां घर पर नहीं थी। इस पर सुखेर थाने पर जाकर बताया तो फिर से लोकेशन निकलवाई तो फिर से फोन की लोकेशन फिर से वहीं पर निकली। इस पर मीरानगर में एक होटल पर जाकर देखा तो गीता का फोन झाड़ियों में पड़ा मिला यह देखकर पुलिस को शंका हुई और सुखेर थाने से जाब्ता ईश्वर सिंह के गांव आरना केलवा राजसमंद गया। वहां पर जाकर ईश्वरसिंह की मां से पूछा तो मां ने बताया कि ईश्वर सिंह माइंस पर गया है।
पुलिस ने शंका के आधार पर घर की छत पर जा देखा तो वहां पर ईश्वर सिंह भागने का प्रयास कर रहा था, जिसे पुलिस ने पकड़ा और अपने साथ सुखेर थाने पर लेकर आई। यहां पर पूछताछ में ईश्वर सिंह में पहले तो ईश्वर सिंह मना करता रहा और बाद में जब सख्ती से पूछा तो ईश्वर सिंह ने बताया कि उसने अपनी सास गीता की हत्या कर शव को मार्बल स्लरी डम्पिंग यार्ड में फेंक दिया। इस पर पुलिस पुनः आरना गांव केलवा राजसमंद गई, जहां पर मार्बल स्लरी डम्पिंग यार्ड से गीता का शव बरामद किया। शव के गले में दो जगह पर रस्सियों के निशान थे और सीने पर भी मारपीट करने के निशान थे। पुलिस ने शव बरामद कर हत्या मामला दर्ज कर शव का मेडिकल ज्यूरिष्ठ विभाग के आचार्य डॉ अखिलेश शर्मा, गायनिक विभाग की डॉ सुनिता शेखावत एवं मेडिकल ज्यूरिष्ठ डॉ सौरभ करिया की टीम के मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवा शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। मृतका के परिजनों की आर्थिक स्थिति खराब होने पर मृतका के शव का वैकुण्ठ धाम सेवा संस्थान के सुपुर्द किया। संस्थान के हिरालाल साहू व शंकरदयाल शर्मा ने मृतका के परिजनों के साथ अंतिम संस्कार करवाया गया।
पत्नी को साथ रखना चाहता था और सास आड़े आ रही थी
जांच में सामने आया कि ईश्वर सिंह अपनी पत्नी जान्हवी कुंवर को अपने साथ रखना चाहता था, पर गीता कुंवर अपनी 16 साल की बेटी को साथ नहीं भेजना चाहती थी। इसी कारण ईश्वर सिंह काफी नाराज चल रहा था। इसी कारण ईश्वर सिंह अपनी सास गीता को साथ लेकर गया, जहां पर विवाद हुआ और ईश्वर सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर गीता की हत्या कर दी।
मामा के भरोसे हो गई दोनों बेटियां
जान्हवी और ईशिका का एक मात्र सहारा उनकी मां गीता थी। बताया जा रहा है कि जब ये दोनों छोटी थी, तभी उनके पिता का निधन हो गया था तो मां दोनों को लेकर उदयपुर आ गई थी। अप पीहर में रहकर बड़ा किया था। गीता नौकरी करती थी और बड़ी मशक्कत से शादी की थी। अब मां की मौत के बाद दोनों बेटियों का एक मात्र सहारा उनका मामा है।

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