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तप से आत्मा का नूर खिलता है
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विरार में साध्वी डॉ. स्नेहप्रभा मसा, साध्वी डॉ. प्रज्ञाश्री मसा के सान्निध्य में प्रवचन कार्यक्रम जारी है। शनिवार को उन्होंने कहा कि तप आत्मा (Soul) की सुगंध है। तप से आत्मा का नूर खिलता है। तपस्या से ही जीवन और परभव में आत्मिक लब्धि सुख मिलता है।

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मुंबई । विरार में साध्वी डॉ. स्नेहप्रभा मसा, साध्वी डॉ. प्रज्ञाश्री मसा के सान्निध्य में प्रवचन कार्यक्रम जारी है। शनिवार को उन्होंने कहा कि तप आत्मा (Soul) की सुगंध है। तप से आत्मा का नूर खिलता है। तपस्या से ही जीवन और परभव में आत्मिक लब्धि सुख मिलता है। जैसे बर्तन को तपाये बिना दूध गरम नहीं लेता, दही छाछ मक्खन नहीं मिलता है, वैसे ही शरीररूपी बर्तन को तप अग्नि से गरम करने पर मुक्तिरूपी मक्खन प्राप्त होता है। साध्वी डॉ. प्रज्ञाश्री ने गीतिका प्रस्तुत की।
इस अवसर पर वरुण सोलंकी, महेंद्र सोलंकी ने विचार रखे। संघ अध्यक्ष लक्ष्मीलाल कच्छारा महामंत्री प्रकाश सोलंकी कोषाध्यक्ष हिम्मत दौलावत नवयुवक मंडल अध्यक्ष जितेंद्र दोसी दयालाल परमार, खुबीलाल जैन आदि जुटे हैं।

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