Pratahkal - Main News Update - '1033 crore loss to ICICI Bank due to one decision'
नई दिल्ली : आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) की पूर्व एमडी और सीईओ चंदा कोचर (Chanda Kochhar), उनके पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन के फाउंडर वेणुगोपाल धूत (Venugopal Dhoot) के खिलाफ दायर चार्जशिट में बड़ी बात सामने आई है। आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन ग्रुप को दिए गए 1000 करोड़ रूपये से अधिक की राशि नॉन परफॉर्मिंग एसेट बन गई। जब लोन लेना वाल कर्जदाता रकम को चुकाने में सक्षम नहीं होता, तो बैंक की रकम फंस जाती है और फिर बैंक इसे एनपीए घोषित कर देता है।
10 हजार पन्नों की चार्टशीट
10 हजार से अधिक पन्नों की चार्जशीट में केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया है कि चंदा कोचर को आईसीआईसीआई की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बैंक की एमडी और सीईओ बनने के बाद एक मई 2009 से वीडियोकॉन ग्रुप को छह 'रूपी टर्म लोन' (आरटीएल) मंजूर किए गए। आरोपपत्र में कहा गया है कि जून 2009 से अक्टूबर 2011 के बीच बैंक द्वारा समूह को कुल 1875 करोड़ रूपये के आरटीएल स्वीकृत किए गए थे।
5 करोड़ का घर 11 लाख में ट्रांसफर
सीबीआई ने आरोप लगाया कि दीपक कोचर मुंबई में सीसीआई (CCI) चैंबर्स स्थित एक फ्लैट में रहते थे, जिसका मालिकाना हक वीडियोकॉन समूह पास था। चंदा कोचर वीडियोकॉन ग्रुप के स्वामित्व वाले उस फ्लैट में रहती रहीं और बाद में फ्लैट उनके पारिवारिक ट्रस्ट को ट्रांसफर कर दिया गया। उस ट्रस्ट के प्रबंधक ट्रस्टी दीपक कोचर हैं। फ्लैट को अक्टूबर 2016 में 11 लाख रूपये की मामूली रकम पर ट्रांसफर किया गया था, जबकि फ्लैट की कीमत वर्ष 1996 में ही 5.25 करोड़ रूपये थी।
बैंक को 1033 करोड़ का नुकसान
आरोप पत्र में कहा गया है कि आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन समूह को स्वीकृत ऋण सुविधाएं जून 2017 में एनपीए में बदल गईं। इसमें 1033 करोड़ की बकाया राशि थी। इसके चलते आईसीआईसीआई बैंक को 1033 करोड़ रूपये और ब्याज का नुकसान उठाना पड़ा। मामले के सभी आरोपी जमानत पर जेल से बाहर हैं और मामले की सुनवाई की अगली तारीख 29 अगस्त है।
ट्रेन से सीईओ के पद पर पहुंची थीं चंदा कोचर
चंदा कोचर ने 1984 में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में आईसीआईसीआई ज्वाइन किया था। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 22 साल थी। कोचर को आईसीआईसीआई में काम के प्रति उनके नजरिए देखकर प्रबंध निदेशक और सीईओ का पद सौंपा गया था। कोचर की योग्यता का पता बैंक को उस समय ही चल गया था, जब 1993 में उन्हें कॉर्पोरेट बैंकिंग का चार्ज दिया गया। कोचर ने एक साल का टार्गेट 3 महीने में ही पूरा कर लिया था।
चंदा कोचर ने ली थी रिश्वत
सीबीआई ने कहा कि चंदा कोचर ने 64 करोड़ रूपये की 'रिश्वत' ली और इस तरह अपने इस्तेमाल के लिए बैंक के धन का दुरूपयोग भी किया।
केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि वेणुगोपाल धूत ने प्लांट और मशीनरी के लिए लोन लिया था। आरोप-पत्र में दावा किया गया कि 305.70 करोड़ रूपये की राशि को डायवर्ट किया गया और कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया गया।
Editorial

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