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7 जूलर्स से 10.60 करोड़ की ठगी
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मुंबई पुलिस (Mumbai Police) की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने करीब सात जूलर्स (Jewellers) से 10.60 करोड़ की ठगी और धोखाधड़ी के आरोप में एक दंपत्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि दंपत्ति ने इन जूलरों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है और किराये पर दिये गये दुकान और गाला के लिये जूलरों से लिया गया सिक्युरिटी डिपॉजिट नहीं लौटाया है।

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मुंबई । मुंबई पुलिस (Mumbai Police) की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने करीब सात जूलर्स (Jewellers) से 10.60 करोड़ की ठगी और धोखाधड़ी के आरोप में एक दंपत्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि दंपत्ति ने इन जूलरों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है और किराये पर दिये गये दुकान और गाला के लिये जूलरों से लिया गया सिक्युरिटी डिपॉजिट नहीं लौटाया है।
ईओडब्ल्यू अधिकारियों के मुताबिक, इस दंपत्ति ने जूलरों से सिक्युरिटी डिपॉजिट के तौर पर पैसे लिये थे। यह रकम पांच साल के लिये विलेपार्ले में एक पांच सितारा होटल में दुकान और गाला की जगह किराये पर देने के लिये ली गई थी। हालांकि जूलर्स ने साल 2021 में यह जगहें खाली कर दी थीं, लेकिन आरोपी दंपत्ति ने जूलर्स को उनका सिक्युरिटी डिपॉजिट नहीं लौटाया था।
जूलर महेंद्रकुमार जैन (52) की शिकायत पर पुलिस ने विठ्ठलवाडी निवासी गोविंद वर्मा और उसकी पत्नी श्वेता वर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
शिकायत के अनुसार आरोपी दंपत्ति ने ज्वेल ट्रेंड्स प्राइवेट लिमिटेड नामक एजेंसी के जरिये वर्ष 2018 और वर्ष 2023 के बीच विलेपार्ले के एक पांच सितारा होटल में दुकानें और गाला की जगहों को जैन और अन्य छह जूलर्स को किराये पर दिया था। दंपत्ति ने इन जूलर्स से कुल मिलाकर 10.60 करोड़ रुपये की रकम सुरक्षा जमाराशि के तौर पर ली थी। वर्ष 2021 में पांच सितारा होटल द्वारा जूलर्स को सूचित किया गया कि आरोपी दंपत्ति ने यह जगह केवल 2021 तक के लिये ही किराये पर ली थी और इस तरह इन जूलर्स को जगह खाली करने के लिये कहा गया। जूलर्स का किराया अनुबंध वर्ष 2023 तक का था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें यह जगहें खाली करनी पड़ी थी।
जगहें खाली करने के बाद जब जूलर्स ने दंपत्ति से सिक्युरिटी डिपॉजिट लौटाने की मांग की तो दंपत्ति टालमटोल करते रहे। थक-हारकर जूलर्स ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी। एलटी मार्ग पुलिस ने गोविंद वर्मा और उनकी पत्नी श्वेता वर्मा के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया। चूंकि यह मामला करोड़ों में है, लिहाजा कानूनी नियमों के अनुसार यह पूरा मामला ईओडब्ल्यू को सौंप दिया गया है।

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