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गंदगी से परेशान शोभागपुरा में स्कूली बच्चों को लेकर जाम लगाया
By EditorialPublished on
शहर के शोभागपुरा (Shobhagpura) में सरकारी स्कूल के बच्चों (Government School Children) ने गंदगी से परेशान (Troubled By The Mess) होकर शोभागपुरा मुख्य रोड़ पर जाम लगा दिया। बच्चों का कहना है कि दो महिने से क्षेत्र में कचरा (Garbage) नहीं उठ रहा है, जिससे लोग परेशान है।

उदयपुर : शहर के शोभागपुरा (Shobhagpura) में सरकारी स्कूल के बच्चों (Government School Children) ने गंदगी से परेशान (Troubled By The Mess) होकर शोभागपुरा मुख्य रोड़ पर जाम लगा दिया। बच्चों का कहना है कि दो महिने से क्षेत्र में कचरा (Garbage) नहीं उठ रहा है, जिससे लोग परेशान है। क्षेत्र में ऑटो टिपर नहीं आ रहे है, जिससे कचरा एकत्रित हो रहा है गंदगी हो रही है। बच्चों का कहना है कि स्कूल के पास मुख्य मार्ग के किनारे कचरे के होने से वे पढ़ नहीं पा रहे है। मवेशियों का जमघट रहने से हर समय हादसे की आशंका रहती है, वहीं मच्छर-मक्खियां पनपने से बीमारियां फैलने का भी डर बना हुआ है। इसी से परेशान होकर शुम्रवार सुबह करीब 11 बजे बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग जुटे। स्कूली बच्चे भी उनके साथ हो गए। अभिभावकों का कहना है कि कुछ बच्चे बीमार भी हो चुके हैं। करीब 100 से ज्यादा बच्चे और लोग सड़क के चोबीच बैठ गए। इससे दोनों लेन की आवाजाही रुक गई। लोगों ने यूआईटी और प्रशासन के खिलाफनारे भी लगाए। जाम का पता लगते ही सुखेर थाने का जाब्ता पहुंचा। जवानों ने समझाने की कोशिश की, लेकिन ये लोग नहीं माने। सभी जिम्मेदार अधिकारियों को बुलाने की मांग पर अड़ गए। इस क्षेत्र से निकलने वाले लोगों को गलियों से होकर निकलना पड़ा। बाद में यूआईटी से प्रतिनिधि आए और उन्होंने आश्वस्त किया कि शीघ्र ही सफाई करवा दी जाएगी और इसे नियमित रखा जाएगा। तब जाकर छात्र माने और जाम खोला। साथ ही चेताया कि यदि फिर से गंदगी रही तो इस बार उग्र आंदोलन करेंगे। दो माह से बंद है वाहन इस क्षेत्र में दो महीने से कचरा संग्रहण वाहन नहीं आ रहे है। शोभागपुरा, भुवाणा, मीरा नगर, चित्रकूट नगर, केसर विहार, नाकोड़ा पुरम, बुरहानी नगर समेत करीब एक दर्जन कॉलोनियों में 2 महीने से ऑटो टिपर नहीं पहुंच रहे हैं। आसपास के रेस्टोरेट होटल वाले अपना वेस्ट रात के समय वहीं डंप कर जाते हैं। दूसरी ओर कॉलोनियों में भी हालात ऐसे ही हैं। कचरा संग्रहण वाहन नहीं आने से लोग खाली प्लॉटों में डाल रहे है। ये लोग ऑटो टिपर चालकों को हर महीने 50-50 रुपए भी दे रहे थे।

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