Pratahkal - Udaipur News Update - Historical decision of NGT on the petition of lake lover Anil Mehta
उदयपुर : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भोपाल (Bhopal) बेंच ने ने उदयपुर (Udaipur) की फतहसागर झील के संरक्षण से संबंधित झील प्रेमी अनिल मेहता (Anil Mehta) याचिका पर सुनवाई करते हुए झीलों के इर्द गिर्द शोर (नोईस) प्रदूषण, प्रकाश (लाईट) प्रदूषण तथा पूरे झील पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण पर अभूतपूर्व फैसला देते हुए झील पर ईको सेंसिटिव जोन के प्रतिबंध लागू करने के निर्देश दिए है। यह फैसला देशभर की झीलों की सुरक्षा व संरक्षण का मार्ग प्रशस्त करेगा। वहीं झीलों के भीतर व किनारों पर तीव्र लाइटों के प्रदूषण प्रभाव पर पूरे देश के लिए लाईट प्रदूषण पर शीघ्र ही नियम व गाइड लाइन बनेंगी। उदयपुर के झील विशेषज्ञ डॉ अनिल मेहता द्वारा पर्यावरण कानून विशेषज्ञ भाग्यश्री पंचोली के सहयोग से दायर इस याचिका पर पैरी एडवोकेट मैत्रेय पृथ्वी राज घोरपाडे ने की।
प्रधिकरण की जस्टिस सुधीर अग्रवाल (Sudhir Agarwal) तथा विशेषज्ञ डॉ अफरोज अहमद की बेंच ने फतहसागर झील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के बालाकृष्णन एवं अन्य बनाम भारत संघ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार यदि किसी झील, तालाब को वेटलैंड के रूप में अधिसूचित नहीं भी करे तब भी यदि वह झील, तालाब भारत सरकार के वेटलैंड एटलस में उल्लेखित दो लाख पंद्रह हजार वेटलैंड में सम्मिलित है तो उसे राज्य सरकारों को वेटलैंड संरक्षण नियम के तहत संरक्षित करना होगा । इस निर्णय से फतहसागर सहित पिछोला, बड़ी, उदयसागर, जयसमंद सहित राज्य की सभी झीलों को अब संरक्षित करना होगा।
फतहसागर के संबंध में प्राधिकरण ने राजस्थान राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को झील के आस-पास के केचमेंट के उस प्रभाव क्षेत्र, जोन ऑफ इन्फ्लूएंस का निर्धारण करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें होने वाली गतिविधियों का झील के पारिस्थितिकी तंत्र तथा पारिस्थितिकी सेवाओं पर विपरीत असर पड़ सकता है। प्राधिकरण ने इस प्रभाव क्षेत्र को वेटलैण्ड नियमो के तहत संरक्षित करने को कहा है। एनजीटी ने कहा कि सज्जन गढ़ में भी इको सेंसिटिव जोन के लिए निर्धारित नियम फतहसागर झील व उसके प्रभाव क्षेत्र पर लागू होंगे।
फैसले में कहा गया है कि इस तथ्य के बावजूद कि सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य इको सेंसिटिव जोन में फतहसागर झील तथा इसके प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा आता है। राजस्थान के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के प्रमुख सचिव, प्रधान मुख्य वन संरक्षकए, वन्यजीव और सभी सहायक अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे फतहसागर व इसके प्रभाव क्षेत्र का इको सेंसिटिव जोन के प्रावधानों के अनुसार संरक्षण करे तथा तुरंत इस क्षेत्र के लिए वन्यजीव अभयारण्य अधिसूचना जारी करे।
राज्य वेटलैंड अथॉरिटी फतहसागर के पिछले दस वर्षों के उच्चतम भराव तल (एफटीएल) के औसत स्तर से पचास मीटर तक की दूरी में नाव घाटों को छोड़कर कोई भी स्थायी निर्माण प्रतिबंधित करना होगा । झील व प्रभाव क्षेत्र में अतिक्रमण मुक्त करना होगा और भू रूपांतरण नहीं किए जा सकेंगे। ठोस कचरा, इलेक्ट्रोनिक कचरा, सीवरेज, गंदे पानी को रोकना होगा। एनजीटी का फैसला झील क्षेत्रों में प्रकाश प्रदूषण को लेकर महत्वपूर्ण है। याचिका कर्ता अनिल मेहता, पर्यावरण विधि वेत्ता भाग्यश्री पंचोली तथा वकील मैत्रेय पृथ्वी राज घोरपाडे ने याचिका में प्रकाश प्रदूषण के दुष्प्रभावों पर वैज्ञानिक लेखों को प्रस्तुत किया था।
प्राधिकरण ने कहा कि आज तक भारतीय परिस्थितियों के संदर्भ में प्रकाश प्रदूषण के संबंध में कोई प्रमाणित जांच या शोध नहीं किया गया है और कम से कम किसी को रिकॉर्ड पर तो नहीं रखा गया है। इसमें संदेह नहीं किया जा सकता है कि कुछ परिस्थितियों में उच्च तीव्रता वाली रोशनी वन्यजीवों और विभिन्न श्रेणियों की अन्य प्रजातियों और प्रकृति के लिए भी हानिकारक हो सकती है, लेकिन इस पहलू पर विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है एवं उचित दिशा-निर्देश तैयार किए जाने की आवश्यकता है।
प्राधिकरण ने भारत सरकार के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय को निर्देश दिया कि वो प्रकाश प्रदूषण के मुद्दे पर आवश्यक अध्ययन करने और भारतीय संदर्भ में ऐसे प्रदूषण को लेकर आवश्यक प्रावधान बनाए । प्राधिकरण ने याचिका की अनुपालना के लिए पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, राजस्थान राज्य वेटलैंड प्राधिकरण, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, जिला कलेक्टर, नगर निगम उदयपुर को आगामी 15 नवम्बर तक सेंट्रल जोन भोपाल बेंच में रिपोर्ट पेश करने के खल करने के निर्देश दिए हैं


Editorial

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