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नेहरू पर शाह की बात से खुश हुए अधीर
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मॉनसून सत्र (Monsoon Session) में दिल्ली (Delhi) सेवा बिल को लेकर लोकसभा (Lok Sabha) में गुरूवार को बहस हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बात रखते हुए आम आदमी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान, उन्होंने कांग्रेस से अपील भी की कि वह इस बिल का विरोध नहीं करे, क्योंकि बिल के पास हो जाने के बाद आम आदमी पार्टी 'इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं रहने वाली ।

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नई दिल्ली : मॉनसून सत्र (Monsoon Session) में दिल्ली (Delhi) सेवा बिल को लेकर लोकसभा (Lok Sabha) में गुरूवार को बहस हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बात रखते हुए आम आदमी पार्टी पर जमकर निशाना साधा।
इस दौरान, उन्होंने कांग्रेस से अपील भी की कि वह इस बिल का विरोध नहीं करे, क्योंकि बिल के पास हो जाने के बाद आम आदमी पार्टी 'इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं रहने वाली । संसद में बहस के दौरान अमित शाह ने जवाहर लाल ने नेहरू, सरदार पटेल समेत तमाम नेताओं का भी जिक्र किया, जिस पर कांग्रेस (Congress) नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhary) काफी खुश हो गए। उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि अमित शाह ने जवाहर लाल नेहरू की तारीफ की, जिसे सुनकर उन्हें मन किया कि गृह मंत्री को शक्कर - शहद खिला दें। दरअसल, बिल पर बहस के दौरान अमित शाह ने कहा कि दिल्ली की स्थापना 1911 में अंग्रेजों के शासन द्वारा की गई थी। 1919 और 1935 में ब्रिटिश सरकार ने चीफ कमिशनर प्रोविंस का नोटिफिकेशन किया। आजादी के बाद पट्टाभि सीतारमैया कमेटी ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की सिफारिश की, लेकिन जब वह संविधान सभा के सामने आई तब पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, राजाजी, राजेंद्र प्रसाद और डॉ. अंबेडकर जैसे नेताओं ने इसका विरोध किया और कहा कि यह उचित नहीं होगा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। शाह के अनुसार, पंडित नेहरू ने तब कहा था कि रिपोर्ट आने के दो साल बाद आज दुनिया बदल गई है, भारत बदल गया है, ऐसे में इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता और इसे स्वीकार करना वास्तविकता से मुंह मोड़ना होगा।
शाह ने विधेयक का विरोध करने वाले कांग्रेस सदस्यों से कहा कि आज वे जिसका विरोध कर रहे हैं, उसकी सिफारिश पंडित नेहरू ने की थी । उन्होंने कहा कि 1993 के बाद दिल्ली में कभी कांग्रेस और कभी भाजपा की सरकार आईं और दोनों में से किसी दल ने दूसरे (विपक्ष ) के साथ झगड़ा नहीं किया, लेकिन 2015 में ऐसी सरकार आई जिसका मकसद सेवा करना नहीं, केवल झगड़ा करना है।

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