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मुंबई। बुधवार को आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahasramana) ने श्रावक-श्राविकाओं सहित चतुर्दशी के संदर्भ में उपस्थित चारित्रात्माओं को भी मंगल प्रेरणा प्रदान की। तेरापंथ धर्मसंघ (Terapantha Dharmasangh) की मर्यादा-व्यवस्था के अंतर्गत माह की चतुर्दशी तिथि का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसलिए समस्त चारित्रात्माएं आचार्य महाश्रमण की मंगल सन्निधि में उपस्थित हुए। आचार्यश्री ने उन्हें हाजरी का वाचन करते हुए संघनिष्ठा की प्रेरणा प्रदान की। बुधवार को चतुर्दशी तिथि के कारण आचार्य महाश्रमण की एक ओर साध्वी समाज (Sadhvi Samaj) तो दूसरी ओर संत समाज (Saint Samaj) नजर आ रहा था। सामने की ओर समणीवृन्द व श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति थी। आचार्यश्री (Acharya Shri) ने चतुर्दशी (Chaturdashi) के संदर्भ में हाजरी का वाचन करते हुए कहा कि आज शासनमाता साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा (Sadhvipramukh Kanakaprabha) के मासिकी पुण्यतिथि का दिन भी है। उन्होंने उपस्थित चारित्रात्माओं को विविध प्रेरणाएं भी प्रदान कीं। मुनि देवकुमार (Muni Devkumar) और मुनि विपुलकुमार (Muni Vipulkumar) ने लेखपत्र का वाचन किया। कार्यक्रम में साध्वीवर्या ने भी उद्बोधित किया। साध्वी उदितयशा ने आचार्यश्री के समक्ष 31 की तपस्या का प्रत्याख्यान किया।
Editorial

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