✕
सरलता से होती है आत्मा की शुद्धि
By EditorialPublished on
तीर्थंकर समवसरण में बुधवार को आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने कहा कि आठ कर्मों में छठा है नाम कर्म। नाम कर्म से शरीर की सुन्दरता, वाणी का प्रभाव, तीर्थंकर जैसी स्थिति भी नाम कर्म से प्राप्त होने वाली स्थिति है। नाम कर्म के दो प्रकार होते हैं- शुभ नाम कर्म और अशुभ नाम कर्म।

x

मुंबई । तीर्थंकर समवसरण में बुधवार को आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने कहा कि आठ कर्मों में छठा है नाम कर्म। नाम कर्म से शरीर की सुन्दरता, वाणी का प्रभाव, तीर्थंकर जैसी स्थिति भी नाम कर्म से प्राप्त होने वाली स्थिति है। नाम कर्म के दो प्रकार होते हैं- शुभ नाम कर्म और अशुभ नाम कर्म। शुभ नाम कर्म के उदय से अनुकूल स्थितियां प्राप्त होती हैं। अशुभ नाम कर्म के उदय से जीव को प्रतिकूल परिस्थितियां प्राप्त होती हैं। भगवती सूत्र में प्रश्न किया गया कि शुभ नाम कर्म का बंध किन कारणों से होता है। उत्तर प्रदान करते हुए बताया गया कि काय ऋजुता, भावात्मक ऋजुता, भाषा ऋजुता आदि से शुभ नाम कर्म का बंध होता है। सरलता होती है तो शुभ नाम कर्म का बंध होता है। सार में कहा जाए तो सरलतापूर्ण व्यवहार हो तो शुभ नाम कर्म का बंध होता है। शुभ नाम कर्म बंध के उदय से आदमी को अनुकूल स्थितियां प्राप्त होती हैं। अशुभ कर्म बंध के कारण आदमी को जीवन में प्रतिकूलताएं प्राप्त होती हैं। सरलता से शुद्धि होती है और शुद्ध आत्मा ही उत्थान की दिशा में गति कर सकती है।
इसके बाद उन्होंने आचार्य कालूगणी की मालवा प्रदेश की यात्रा का वर्णन किया।
Next Story
Related News
X

