Pratahkal - Udaipur News Update - Life imprisonment for brother-in-law and partner who killed brother-in-law
उदयपुर : जिले के झाडोल थाना क्षेत्र में भूमि विवाद के चलते पड़ोसी के साथ मिलकर साले ने कुल्हाड़ी से हमला कर जीजा की नृशंस हत्या (Murder) करने के आरोप में अदालत ने दोनों आरोपियों (Two Accused) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
जानकारी के अनुसार रेखा पत्नी उमेश डामोर निवासी कंथारिया फला तावड़ी वेला झाड़ोल ने 21 अक्टूबर 2017 को रिपोर्ट दी थी कि 20 अक्टूबर को शाम 7 बजे वह अपनी सास छतरी, ससुर लक्ष्मण व बच्चे अजय-संजय के साथ घर पर थी। इस दौरान पड़ोसी ककुआ पुत्र नाना डूंगरी और सास का भाई सकिया पुत्र साजू पारगी कुल्हाड़ी लेकर आए । ककुआ ने ससुर लक्ष्मण के सिर में सिर और हाथ पर वार किए। बचाव करने वह बीच में गई तो सकिया ने कुल्हाड़ी की लकड़ी से उसे पीटा। जिससे वह अपनी सास के साथ जान बचाकर भाग गई। कुछ देर बाद दोनों वापस आई तो ससुर के शरीर पर कुल्हाड़ी के वार के निशान थे और उनकी मौत हो चुकी थी। इस दौरान पति उमेश वाडदखेडा गांव गया हुआ था। वापस लौटने पर उसे घटना बताई। रेखा, ककुआ और सकिया के मकान के बीच नाले की जमीन को सास छतरी ने जेसीबी से समतल कराया था। जिसको लेकर दोनों आरोपी रंजिश रखते थे। इस पर पुलिस ने कार्यवाही करते हुए मृतक के साले कंथारिया फलां तावड़िया वेला झाड़ोल निवासी सकिया पुत्र राजू पारगी और उसके पड़ोसी ककुआ पुत्र नाना डूंगरी को गिरफ्तार किया। आरोपियों के खिलाफ जांच पूर्ण कर अदालत में अपर लोक अभियोजक संदीप श्रीमाली के माध्यम से आरोप पत्र पेश किया। इस मामले में 21 गवाह और 33 दस्तावेज प्रदर्शित कर दोनों आरोपियों पर आरोप सिद्ध करने में सफल रहा। अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किये गये पीड़िता मृतक की बहू रेखा डामोर सहित अन्य चश्मदीद गवाहों ने घटना की पुष्टि की। सभी गवाहों के साथ चिकित्सकीय साक्ष्य के आधार पर दोनों आरोपियों पर आरोप सिद्ध करने में अभियोजन पक्ष सफल रहा। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अपर जिला एवं सेशन न्यायालय क्रम-4 की पीठासीन अधिकारी जयमाला पानीगर ने चिकित्सकीय साक्ष्य, चश्मदीद गवाहों एवं गवाहों द्वारा एक-दूसरे के बयानों की पुष्टि करने के साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी ककुआ व सकिया को दोषी करार देते हुए भादसं की धारा 302/34 में आजीवन कारावास व दस-दस हजार रुपये जुर्माना, 323/34 में एक-एक वर्ष का कारावास व पांच- पांच सौ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

Editorial

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