Pratahkal - Jodhpur News Update - Instructions to give compassionate appointment to needy widow daughter-in-law
जोधपुर : राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में विवाहित पुत्री की बजाय दो बच्चियों के पालन- पोषण के लिए संघर्ष कर रही विधवा पुत्रवधु को अनुकंपा नियुक्ति का पात्र माना है। कोर्ट ने राज्य सरकार (State Government) को चार सप्ताह में याचिकाकर्ता को उचित पद पर नियुक्ति देने को कहा है। न्यायाधीश विनित कुमार माथुर की एकल पीठ में याचिकाकर्ता नीरजा सिंघवी की ओर से अधिवक्ता खेतसिंह ने पैरवी की। याचिका में शिक्षा विभाग के उप सचिव के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें विधवा पुत्रवधु को अनुकंपा नियुक्ति देने से इनकार किया गया था।
याचिका के अनुसार याचिकाकर्ता दिवंगत सरकारी कर्मचारी संतोष सिंघवी की बहू है। वर्ष 2021 में संतोष सिंघवी और उसके कुछ समय बाद याची के पति विनित सिंघवी की कोविड से मृत्यु हो गई थी। बाद में याची के ससुर की मृत्यु हो जाने से दो बच्चियों के पालन-पोषण का सारा दायित्व पुत्रवधु के जिम्मे आ गया। याचिकाकर्ता की शादी 2017 में हुई थी और जून 2020 में उसकी जुड़वां बेटियां हुईं। याचिकाकर्ता के आवेदन को खारिज करने पर मृतका की विवाहित पुत्री मोनिका ने अनुकंपा नियुक्ति की मांग की। अधिवक्ता ने कहा कि अपने परिवार के लिए एकमात्र प्रदाता के रूप में याचिकाकर्ता संकट की स्थिति का सामना कर रही है और अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य प्राथमिक आजीविका कमाने वाले की मृत्यु के कारण परिवार को संकट और निराशा से राहत देना है।
नियमों की उदार व्याख्या : एकल पीठ ने माना कि याचिकाकर्ता संकटपूर्ण दौर से गुजर रही है और वह अपने और दो बेटियों के भरण-पोषण के लिए एकमात्र जिम्मेदार है। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि विधायिका का इरादा ऐसी कठिनाइयों का सामना करने वाले आश्रितों को राहत प्रदान करना है, और इस मामले में याचिकाकर्ता विधवा पुत्रवधु तुलनात्मक रूप से विवाहित पुत्री से ज्यादा अनुकंपा नियुक्ति की हकदार है। ऐसे मामलों में नियमों की उदार व्याख्या की आवश्यकता है। चार सप्ताह का समय

Editorial

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