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अलास्का जहाज यात्रा 12 : तेज हवाओं के थपेड़ों में डगमगाते जहाज से घबराहट
By EditorialPublished on
जहाज का पूल एरिया सबसे लोकप्रिय स्थान था। यहां हर दम भीड़ लगी रहती थी। हाट बाजार में अब कपड़ों के साथ ज्वेलरी के सामान की टेबलें भी लगा दी गई थी। ज्वेलरी असली थी, नकली थी क्या पता मगर लोग खरीद जरूर रहे थे। यहीं एक टेबल पर घड़ियां भी बिक रही थीं।

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जहाज का पूल एरिया सबसे लोकप्रिय स्थान था। यहां हर दम भीड़ लगी रहती थी। हाट बाजार में अब कपड़ों के साथ ज्वेलरी के सामान की टेबलें भी लगा दी गई थी। ज्वेलरी असली थी, नकली थी क्या पता मगर लोग खरीद जरूर रहे थे। यहीं एक टेबल पर घड़ियां भी बिक रही थीं।
हम लोग पूल के गलियारे में लगी कुर्सियों पर बैठ गये। यहां से समुद्र का नजारा अच्छी तरह से देखा जा सकता था। लहरें तेज उठ रही थी फिर भी जहाज पर इसका असर नहीं था। मुनीश को अब तक सी-सिकनेस की कोई शिकायत महसूस नहीं हुई थी। गर्दन पर लगा पेच अच्छी तरह काम कर रहा था। वैसे भी जहाज के अन्य यात्रियों को भी इस तरह की शिकायत करते हुए नहीं देखा था।
किसी भी प्रकार की बीमारी या संक्रमण को रोकने के लिये पूरे जहाज में सेनेटाइजर स्टेन्ड लगे थे। खास कर के खाने पीने के स्थानों पर ये बहुतायत से थे।
एक खूबसूरत दरवाजे सा स्टेन्ड बना कर उन पर सेनेटाइजर की बोतल गई थी। आते जाते यात्री इस बोतल को हल्की सी दबाते तो उसमें से तरल पद निकल आता था। इस पदार्थ को हाथों में मल लेने से किसी भी प्रकार के नष्ट हो जाते हैं। अक्सर क्रूज की यात्राओं में महामारी फैलने की आशंका रहती है इससे बचने के लिये इस तरह की सावधानी आवश्यक है।
पहले तो मुझे पता नहीं चला कि यह चीज क्या है, मगर जब प्रीति ने इसकी जानकारी दी तो मैं भी निरन्तर इसका उपयोग करने लगा। भारत में लड़कियों का इसका उपयोग करते देखा तो मैं समझता था शायद यह भी इनके प्रसाधन की कोई चीज है।
धीरे धीरे पानी में हल चल बढ़ने लगी, हवाएं तेज हो गई, हम लोग खिड़कियों से सुरक्षित थे मगर जो लोग खुले डेक पर थे ये सभी अन्दर आ जहाज अब डगमगाने लगा। कई लोग डर कर अपने कमरों में जा कर सो गये। तभी जहाज के माईक से दो व्हिसल बजी। हम सब सांसे रोक कैप्टेन की इन्तजार करने लगे। केप्टन ने कहा कि यात्रियों को घबराने की आवश्य है, जहाज नियन्त्रण में है. मौसम की खराबी की वजह से समुद्र में उथल पुथल हुई है, शीघ्र ही हवाओं के शान्त हो जाने की सम्भावना है।
इस घोषणा के बाद सबको तसल्ली हो गई। जो अपने कमरों की तरफ रहे थे वे भी रूक गये। कुछ ही देर बाद वाकई समुद्र शान्त हो गया। जहाज का डगमगाना बन्द हो गया और तमाम गतिविधियां पूर्ववत चालू हो गई।
इस बीच लंच का समय हो गया था। लोग केफेटेरिया में जमा होने शुरू है गये थे। हम भी पूल साईड से उठ कर केफेटेरिया में पहुँच गये। सुबह जितनी भीड़ नहीं थी, कई टेबलें खाली थी। मेरी निगाहें पीटर को ढूंढ रही थी। वो कहीं नजर नहीं आ रहा था। एक वेटर को उसके बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह इटेलियन सेक्शन में होगा। मुनीश ने वहां जाकर पूछा तो बताया गया कि आते ही उसे हमारे टेबल पर भेज देंगे।
मुनीश लौट आया, बाकी लोग प्लेटें लेकर अपनी अपनी पसन्द की चीजें भर लाये। इन लोगों ने खाना शुरू ही किया था कि दूर से पीटर आता नजर आया। वह दूर सीधे हमारे टेबल पर ही आया, उसके साथ एक वेटर था जिसकी ट्रे में दो तीन डोंगे थे। पीटर ने यह सब सामान हमारी टेबल पर रखने को कह दिया। इतनी सारी चीजें सब मेरे लिये। में खा थोड़े ही पाउंगा। आलू मटर की सब्जी, चावल, पापड़, आलू टिकिया, छोले वगैरा तरह तरह के सामान थे। रोटियां फिर मोटी मोटी थी। बाकी तीनों ने भी इसमें से कुछ कुछ ले लिया। लंच में भी भारतीय भोजन मिल जाने से मैं प्रसन्न हो गया। अब शेष दिनों में भी यही सब मिलता रहेगा इसकी निश्चिन्तता हो मई ।
जहाज पर एक शादी की पार्टी भी आयोजित थी। दुल्हा-दुल्हन, दोनों के परिवार व रिश्तेदार व अतिथि सब जहाज पर थे। शादी क्रूज से पहले हो चुकी थी मगर पार्टी के रूप में सभी लोगों को यात्रा करवाई जा रही थी। वैसे जहाज पर शादियां भी होती हैं, इसके लिये विशेष व्यवस्था है जिसका अलग से शुल्क लिया जाता है। शादी करने वालों हेतु रिसेप्शन का इन्तजाम भी जहाज द्वारा किया जाता है। सामान्य रिसेप्शन का प्रति थाली सौ डालर तथा थोड़े भव्य रिसेप्शन का 150 डालर अतिरिक्त लिया जाता है। वैसे शादी पार्टी की एक साथ बुकिंग होती है तो टिकट की कीमत में रियायत हो जाती है तो बराबर ही पड़ जाता है।
आजकल डेस्टीनेशन वेडिंग्ज का जमाना है। उदयपुर में भी ढेर सारे लोग दुनिया भर से आकर शादियां करते हैं। क्रूज पर भी शादियां करवाने का चलन बढ़ यहा है। अन्यत्र होने वाली शादियों में तो दुल्हा-दुल्हन हनीमून मनाने बाहर कहीं जाते हैं। कूल पर शादी की विशेषता यह है कि उनकर हनीमून भी यहाँ हो जाता है। इसके लिये क्रूज कम्पनी विशेष व्यवस्था करती है।
जहाज अगले 20-22 घन्टे निरन्तर चलने वाला था। जहाज पर जगह जगह गतिविधियां जारी थी। कई अपने कमरों में जाकर सो गये तो कई टी.वी. देख रहे थे। कमरों में अपनी मनपसन्द अंग्रेजी फिल्म देखी जा सकती थी। जहाज पर एक स्था और सेलून भी था, यहां शरीर की मालिश करवाई जा सकती थी। गर्म पत्थरों से मालिश भी होती थी। कई प्राईवेट ट्रीटमेन्ट रूम थे कई दम्पत्तियां इन कमरों में मालिश करवाती थी। एक गर्म पानी का कुण्ड भी था जहां टर्कीश बाथ ले सकते थे।
स्त्रियों के लिये फ्लावर एरेन्जमेन्ट की तरह मेक अप तथा पाक कला की कक्षाएं भी आयोजित थी। जहाज के प्रवीण शेफ यहां तरह तरह की रसोई बनाना सीखाते थे। जहाज में यात्रा कर रहे बच्चों को भी व्यस्त रखने का पूरा ध्यान रखा गया था। इनके लिये कई तरह के खेल-कूद व मनोरंजन तो थे ही साथ ही इन्हें कुछ सीखाने की कक्षाएं भी चलती थी। इनमें नाश्ता सजाना, कागज से बनाना आदि थे।
कभी यहां कभी वहां इधर उधर देखते फिरते पूरा दिन कैसे निकल गया. ही नहीं चला। काफी समय तो खाने पीने में ही निकल जाता है। लंच खतम हु नहीं कि चाय चाय के बाद डिनर फिर स्पा। दिन भर खाते ही रहो। शौचालय भी जगह जगह प्रचुर मात्रा में बने हुए थे।
कमरे में जल्दी लौट कर नाश्ते का फार्म भर कर बाहर लटका दिया ताकि सुबह कमरे में ही नाश्ता आ जाये। वापस उपर डेक पर जाकर बैठ गये। थियटर्स में नृत्य गीत के रंगारंग कार्यक्रम जारी थे। इनमें भी विविधता थी। एक दिन मैजिक शो होने वाला था तो एक दिन नाटक। इसी तरह अन्यत्र कोमेडी शो भी चल रहे थे। जहाज वाले कई एन्टरटेनमेन्ट टूप्स से अनुबन्ध कर लेते हैं। इस टूप के कलाकार ही कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। इनमें कई बार कई प्रसिद्ध टी.वी. या भी होते हैं।
समुद्र हालांकि शान्त था मगर ठंडी एवं तीखी हवाएं चल रही थीं। डेक पर बैठ पाना संभव नहीं हो रहा था। कई लोग सामने अलमारियों में रखी कम्बले ओड ओढ कर बैठ गये थे और मौसम का आनन्द ले रहे थे। हमने भी कम्बलें ले ली और ओढ़ कर थोड़ी देर और बैठे फिर भी ठंड इतनी थी कि बैठा नहीं जा रहा था। जह ज्यू ज्यू उत्तर दिशा की ओर बढ रहा था तापमान कम होता जा रहा था। सुबह तक हम अलास्का की सीमा में प्रवेश करने वाले थे, यह मौसम उसी का सूचक प्रती हो रहा था। थोड़ी देर इधर उधर और मटरगश्ती कर कमरे में लौट आये। कमरे में भी ठंड महसूस हो रही थी मगर कमरे का तापमान नियंत्रित किया जा सकता था। बाथरूम के बाहर एक रेगूलेटर लगा था, उसमें तापमान बढ़ा दिया तो ठंड कम हो गई। हमारी जहाज की यात्रा के दूसरे दिन को अलविदा कह सो गये।

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