devasi samaj
जोधपुर (कासं ) । अखिल राजस्थान (rajasthan) स्तर के देवासी समाज (Devasi samaj) का महाकुंभ (mahakumbha) रविवार को रावण का चबूतरा (ravan ka chabutara) मैदान में आयोजित किया गया। आयोजन समिति के गणेश व सुखदेव देवासी ने पत्रकारों को बताया कि पिछले दो माह से संपूर्ण राजस्थान में जनसंपर्क कर आमंत्रण के लिए समाज के लोगों को पीले चावल बांटे गए थे।
देवासी ने बताया कि आजादी के बाद प्रथम बार विशाल महाकुंभ आयोजित कर समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व, शैक्षणिक उत्थान, पशुपालकों की समस्याओं, एमबीसी वर्ग आरक्षण को पर गहन मंथन कर निर्णय लिए संविधान की नौवीं अनुसूची में गए। महाकुंभ आयोजन के प्रति शामिल करवाने, घूमंतू संपूर्ण राजस्थान में भारी उत्साह निष्क्रमणीय पशुपालक है। प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों के आवासीय विद्यालय खुलवाने प्रत्येक गांव-ढाणी से लोग बसों सहित समाज के ज्वलंत मुद्दों व गाड़ियों में जोधपुर पहुंचे। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी को मद्देनजर रखते हुए विशेष इंतजाम भी किए गए थे। इस दौरान जेतेश्वर धाम सिणधरी महंत पारसाराम, संत तीर्थगिरी, बालसंत कृपाराम, राजयोगी संध्यानाथ, महंत योगी लक्ष्मणनाथ के सानिध्य में महाकुंभ में केंद्रीय उन कल्याण बोर्ड अध्यक्ष गोरधन राईका, पूर्व मंत्री रतन देवासी, पूर्व मंत्री ओटाराम देवासी, भाजपा के वरिष्ठ नेता जगदीश खाराबेरा है। समाज के लोगों की संख्या वरिष्ठ कांग्रेस नेता सतपाल के अनुसार राजनीति में देवासी, सांवलाराम देवासी भागीदार बनाया जाए। भीनमाल, भूपेंद्र देवासी
(Bhupendra Devasi)
जालौर (Jalore), भंवरलाल देवासी (Bhanwarlal Devasi) सिवाना (Siwana), वरिष्ठ नेता खानुराम रुडकली व सत्ताराम थापन सहित गुजरात (gujrat) से राज्यसभा सांसद बाबूभाई देसाई, पूर्व सांसद सागर राईका व कर्नाटक (karnataka), महाराष्ट्र (maharashtra), मध्यप्रदेश (madhyapradesh), आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) राज्यों से बड़ी संख्या में प्रवासी लोग शामिल हुए।
देवासी समाज ने की ये 5 मांग
1. आरक्षण को लेकर विसंगतियों को दूर करने के साथ ही देवासी समाज को रिजर्वेशन का उचित लाभ दिया जाए।
2. देशभर में देवासी समाज के लाखों लोग हैं, लेकिन राजनीतिक भागीदारी बहुत कम
3. जिला और ब्लॉक स्तर पर देवासी समाज की शिक्षण संस्थाओं का निर्माण किया जाए।
4. पशुपालक बिरादरी (pashupaalak biraadaree) से आते हैं। हरियाणा (Haryana), गुजरात (Gujrat), मेवाड़ (Mewar), गोरवाड़ (Gorwad) तक गाय, ऊंट, भेड़-बकरी चराते हैं। समाज के लोग जो घुमंतू हैं उनके पास आवासीय पट्टे नहीं होते। वे भूमि से वंचित रहते हैं। घर लौटते हैं तो उन्हें रहने की जगह नहीं मिलती। भूमिहीन देवासी समाज के लोगों को गांव में पट्टा दिया जाए। रेवड़ चराने वाले लोगों को सरकार पट्टा आवंटित करे।
5. घुमंतू परिवार के बच्चों के लिए प्रदेशभर में आवासीय विद्यालय खोले जाएं।
Editorial

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