Sagasji Bavji Udaipur
उदयपुर (वि) । लोक देवता के रूप में जन-जन के आराध्य देव श्रीसरदार सिंह जी कुंवरा सगसजी बावजी का जन्मोत्सव शुक्रवार को दाता भवन 21, जोगपोल मण्डी की नाल स्थित स्थानक पर धूमधाम से मनाया गया । महन्त मिठ्ठालाल चित्तौड़ा एवं सुशील चित्तौड़ा के मार्गदर्शन में राज शाही ठाट-बाट से आयोजन हुए। रात्रि में श्री सगस जी बावजी का विशेष शाही श्रृंगार धारण कराया गया बावजी श्री के श्रृंगार में वर्क, रजत डंक, मोठड़ा, आमली- चन्द्रमा स्वर्ण व रजत जड़ित कण्ठला, स्वर्ण बादला, छत्र - चंवर, तलवार, ढाल, बन्दुक, मोर पंखी आदि धारण करवाए गए। भक्त संध्या का आयोजन हुआ जिसमें देर रात तक भजन गायकों ने भजन पेश किए। सुबह दीप प्रज्वलन के बाद शक्ति पूजन, खड़क पूजन और गादी पूजन हुआ।
काटा 51 किलो मावे का केक
मंदिर के सेवक राजेंद्र सेन ने बताया कि मंदिर परिसर में आकाशवाणी के कलाकार रेखा सोनार्थी पार्टी द्वारा बावजी के रजवाड़ी भजनों की प्रस्तुति दी गई। भक्तगण भजनों पर नृत्य कर बावजी को रिजा रहे थे। जन्मोत्सव के अवसर पर 56 तरह के व्यंजनों का भोग धराया गया, 51 किलो मावे का केक भी काटा गया। मंदिर में दर्शनार्थियों के लिए पीने के पानी, अतिथियों के स्वागत एवं अन्य व्यवस्थाओं में सहयोगी के रूप में सेवाएं दे रहे थे हेमंत चित्तौड़ा, नवीन सेन, भावेश चित्तौड़ा, मनीष पोखरा, आयुष टेलर, धीरज लावटि शांतिलाल चित्तौड़ा, चिराग चित्तौड़ा, विभूति शर्मा आदि टीम लगी हुई थी। देर रात तक भक्तों का जन सैलाब बावजी के दर्शनों को के लिए चला ।

सगसजी की स्वर्ण रजत झांकी
लोक देवता सगसजी श्रीअर्जुन सिंहजी गुलाबबाग बावड़ी वाले स्थानक पर जन्मोत्सव शुक्रवार को ठाट-बाट हर्षोल्लास के साथ भक्तिभाव से मनाया गया। सुबह से जन्मोत्सव के दर्षन को लेकर भक्तों की आवाजाही शुरु हुई। सेवेरे 9 बजे हवन, ध्वजारोहण, भोग आरती के साथ भव्य दर्शन शुरु हुए। श्रृंगार में स्वर्ण रजत वर्क, डंक, इमली, चन्द्रमा, धाल, तलवार धारण करवाए गए। श्रृंगार ललित श्रीमाली द्वारा द्वारा किया गया। सुबह शुरु हुए दर्शन रात भर चले। रात्रि जागरण में भजन किर्तन एवं नृत्य राजेष वैष्णव द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसी श्रृंगार के दर्षन शनिवार को भी होंगे। भक्तों एवं सेवा समिति द्वारा नुक्ती एवं खीर का प्रसाद वितरण किया गया। दर्शनार्थियों की सवेरे से ही भीड़ लगी जो दोपहर तक व शाम से रात्रि तक लम्बी कतारें लगी रही।
Editorial

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