Pratahkal-Soul is the fundamental element of the spiritual world
मुंबई । गुरुवार को तीर्थंकर समवसरण उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने भगवती सूत्र आगम के आधार पर प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि भगवती सूत्र में प्रश्न किया गया कि आत्मा कितने प्रकार की होती है? उत्तर दिया गया कि आत्मा आठ प्रकार की होती है। इन आठ प्रकार की आत्माओं की उन्होंने व्याख्या करते हुए कहा कि पहली आत्मा द्रव्य आत्मा होती है। यह सबसे मूल आत्मा होती है। द्रव्य आत्मा होती है, तो प्राणी की प्रत्येक गतिविधियां संचालित होती हैं। इसे ऐसा भी कहा जा सकता है कि द्रव्य आत्मा ही सभी प्रकार की आत्माओं का मूल है। द्रव्य आत्मा मूल है और शेष सात आत्माएं पर्याय हैं। दूसरी आत्मा कषाय आत्मा है। राग, द्वेष, घृणा, ईर्ष्या, लोभ, माया से घिरी हुई आत्मा कषाय आत्मा होती है। तीसरी आत्मा योग आत्मा होती है। चौथी आत्मा उपयोग आत्मा होती है। यह आत्मा सिद्ध और संसारी दोनों में होती है। चेतना के व्यापार के उपयोग कहा जाता है। इसलिए यह उपयोग आत्मा सभी में पाई जाती है। पांचवीं प्रकार की आत्मा ज्ञान आत्मा होती है। यह आत्मा सम्यक्त्वी में हेाती है, मिथ्यात्वी में नहीं। छठी आत्मा दर्शन आत्मा है। यह आत्मा सभी आत्मा होती है। सातवीं आत्मा चरित्र आत्मा होती है। यह आत्मा केवल साधुओं में होती है। साधु चारित्र के पालक होते हैं। इसलिए साधु में चरित्र आत्मा है। तभी तो बोलचाल की भाषा में उन्हें चारित्रात्मा भी कहा जाता है। आठवीं आत्मा वीर्य आत्मा होती है। यह सिद्धों में नहीं होती। वीर्य अर्थात् बल वहीं होता है, जहां शरीर होती है। मनुष्य को आत्माओं के विषय में जानकर कषाय आत्मा का त्याग और शुभ योग आत्मा को रखने का प्रयास करना चाहिए।
जैन विश्व भारती द्वारा यहाँ समण संस्कृति सकाय का 23वां दीक्षांत समारोह समायोजित किया जा रहा है। उसके तीसरे दिन पदाधिकारियों द्वारा आचार्यश्री के समक्ष गीत की प्रस्तुति की गई। विभागाध्यक्ष मालचंद बैंगानी ने अपनी अभिव्यक्ति दी। जैन विश्व भारती के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि कीर्तिकुमार ने भी अभिव्यक्ति दी। महामंत्री सलिल लोढ़ा ने भी विचार रखे। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने कहा कि स्वाध्याय के द्वारा कर्म की निर्जरा भी होती है और चित्त की निर्मलता का विकास भी हो सकता है। जैन विश्व भारती के अंतर्गत समण संस्कृति संकाय जैन विद्या का अच्छा ज्ञान कराने वाला है।
Editorial

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