✕
आज एतिहासिक दिन चांद पर होगा भारत
By EditorialPublished on
भारत (India) का चंद्र (Moon) अभियान यानी चंद्रयान-3 (Chandrayaan -3) का लैंडर 23 अगस्त को अपने तय समय पर यानी शाम 6.04 बजे ही चंद्रमा पर लैंड करेगा। मंगलवार को इसरो (ISRO) ने मिशन की जानकारी देते हुए कहा कि सभी सिस्टम को समय-समय पर चेक किया जा रहा है।
_202308231009135979.jpg)
x
बेंगलुरू (एजेंसी)। भारत (India) का चंद्र (Moon) अभियान यानी चंद्रयान-3 (Chandrayaan -3) का लैंडर 23 अगस्त को अपने तय समय पर यानी शाम 6.04 बजे ही चंद्रमा पर लैंड करेगा। मंगलवार को इसरो (ISRO) ने मिशन की जानकारी देते हुए कहा कि सभी सिस्टम को समय-समय पर चेक किया जा रहा है। ये सभी सही तरह से काम कर रहे हैं। इसके साथ ही इसरो ने चांद की नई तस्वीरें शेयर की हैं, जो चंद्रयान-3 ने क्लिक की हैं। चंद्रयान ने 70 किमी की दूरी से लैंडर पोजिशन डिटेक्शन कैमरा (एलपीडीसी) की मदद से चांद से ये तस्वीरें खींचीं हैं। चंद्रयान- 3 फिलहाल चांद पर लैंडिंग (Landing) के लिए सटीक जगह खोज रहा है। इसे 25 किमी की ऊंचाई से लैंड किया जाएगा।
- लैंडिंग के आखिरी 15 मिनट सबसे मुश्किल होंगे
चंद्रयान- 3 के लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग में 15 से 17 मिनट लगेंगे। इस ड्यूरेशन को '15 मिनिट्स ऑफ टेरर यानी 'खौफ के 15 मिनिट्स कहा जाता है। अगर भारत का चंद्रयान-3 मिशन सक्सेसफुल होता है तो वो चंद्रमा के साउथ पोल (South Pole) पर उतरने वाला पहला देश बन जाएगा। चंद्रमा पर उतरने से दो घंटे पहले, लैंडर मॉड्यूल की स्थिति और चंद्रमा पर स्थितियों के आधार पर यह तय करेंगे कि उस समय इसे उतारना उचित होगा या नहीं। अगर कोई भी फैक्टर तय पैमाने पर नहीं रहा तो लैंडिंग 27 अगस्त को कराई जाएगी। चंद्रयान का दूसरा और फाइनल डीबूस्टिंग ऑपरेशन रविवार रात 1 बजकर 50 मिनट पर पूरा हुआ था। इसके बाद लैंडर की चंद्रमा से न्यूनतम दूरी 25 किमी और अधिकतम दूरी 134 किलोमीटर रह गई है। डीबूस्टिंग में स्पेसक्राफ्ट की स्पीड को धीमा किया जाता है।
नई दिल्ली (एजेंसी) । भारत का मून मिशन (Moon Mission) चंद्रयान- 3 अब अपने अंतिम चरण में है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों के साथ-साथ देश के लोगों की धड़कनें अब तेज होती जा रही हैं। इस बीच इसरो की टीमों में घबराहट भरी उत्तेजना के बीच, अध्यक्ष एस सोमनाथ (S Somnath) ने 23 अगस्त को सफल सॉफ्ट-लैंडिंग का विश्वास जताया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार महत्वपूर्ण लैंडिंग दिवस से पहले समय निकालते हुए एस सोमनाथ ने कहा, यह आत्मविश्वास लॉन्च से पहले की सभी तैयारियों और चंद्रमा की यात्रा में एकीकृत मॉड्यूल और लैंडिंग मॉड्यूल द्वारा की गई बाधा - मुक्त प्रगति से उपजा है। उन्होंने कहा, 'हम आश्वस्त हैं क्योंकि अब तक सब कुछ ठीक रहा है और इस मोड़ तक किसी भी आकस्मिकता का सामना नहीं करना पड़ा है।
इसरो चीफ ने कहा, 'हमने सभी तैयारियां कर ली हैं और इस चरण तक सभी प्रणालियों ने हमारी आवश्यकता के अनुरूप प्रदर्शन किया है। अब हम कई सिमुलेशन, सत्यापन और सिस्टम के दोहरे सत्यापन के साथ लैंडिंग की तैयारी कर रहे हैं, उपकरणों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। अब दुनिया की नजर चंद्रयान-3 की लैंडिंग पर है। क्योंकि रूस का मून मिशन लूना - 25 (Russia's Moon Mission Luna - 25) चांद से टकराकर क्रैश हो गया है। साल 2019 और 2023 के बीच चार चंद्रमा लैंडिंग मिशनों में से तीन विफल हो गए हैं। चीन के चांगई 5 (CHINA K CHANGAI 5) को छोड़कर, अन्य सभी आई इजराइल का बेरेशीट (Beresheit of Israel), जापान का हकुतो आर (Hakuto R of Japan), भारत का चंद्रयान -2 (Chandrayaan-2) और अब रूस का लूना -25 इस समय अवधि में लैंडिंग प्रयास करने में विफल रहे हैं। एस सोमनाथ ने यह भी पुष्टि की कि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर के साथ लैंडिंग मॉड्यूल को जोड़ने का महत्वपूर्ण काम पूरा हो गया है। जो 2019 से चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है। उन्होंने कहा, लैंडर को चंद्रयान-2 ऑर्बिटर से जोड़ने का परीक्षण और सत्यापन पूरा हो गया है। इसरो ने बाद में विस्तार से बताया कि इससे लैंडर और चंद्रयान-2 ऑर्बिटर के बीच दो- तरफा संचार स्थापित हो गया है।

Editorial
Next Story
Related News
X
