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पाकिस्तान के मंसुबे
By EditorialPublished on
मारूफ रजा बीते कुछ समय से जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में व्याप्त ड्रग्स की समस्या धीरे- धीरे एक महामारी का रूप लेती जा रही है। यह ड्रग्स दरअसल अफगानिस्तान (Afghanistan) से आती है और इसे भारत (India) की सीमाओं के भीतर भेजने का काम
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मारूफ रजा । बीते कुछ समय से जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में व्याप्त ड्रग्स की समस्या धीरे- धीरे एक महामारी का रूप लेती जा रही है। यह ड्रग्स (Drugs) दरअसल अफगानिस्तान (Afghanistan) से आती है और इसे भारत (India) की सीमाओं के भीतर भेजने का काम पाकिस्तानी सेना (Pakisthan Army) कर रही है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) और पंजाब की सीमाएं पाकिस्तान (Pakisthan) से मिली हुई हैं। हालांकि चीन की सीमाएं भी भारत (India) से मिलती हैं। लेकिन चीन, भारत की सीमाओं के भीतर ड्रग्स का अवैध कारोबार करने की मंशा रखता हो, इस बात के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।
दूसरी ओर, पाकिस्तानी सेना (Pakisthan Army) पिछले 20-25 वर्षों से ड्रग्स के व्यापार में संलग्न है और वह अफगानिस्तान(Afghanistan) से ड्रग्स लाकर पूरे यूरोपीय क्षेत्र व भारत समेत दूसरे देशों में भी भेजती है। इससे पाकिस्तान (Pakisthan) को आर्थिक फायदा तो होता ही है, भारत के युवाओं (Youth of india) को ड्रग्स का आदी बनाकर, वह एक तरह से भारत (India) के खिलाफ परोक्ष युद्ध भी लड़ रहा है। परोक्ष युद्ध का आशय है आमने-सामने आने के बजाय पीठ के पीछे से वार करना। पाकिस्तान (Pakisthan) जानता है कि सीधी लड़ाई में वह भारत (India) से नहीं जीत सकता। इसलिए, वह ड्रोन के जरिये ड्रग्स व हथियारों को भारत (India) की सीमाओं के भीतर भेजकर ठीक यही कर रहा है।
कुछ साल पहले इसे लेकर एक फिल्म भी बनी थी, जिसका नाम था, उड़ता पंजाब। इसमें यह दिखाया गया था कि कैसे पंजाब के युवाओं को ड्रग्स के जरिये कमजोर व पथभ्रष्ट किया जा रहा है। हथियारों व ड्रग्स को भारतीय (India) सीमाओं में भेजने के लिए जिन ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है, वे छोटे या मध्यम आकार के होते हैं। ये ड्रोन पांच से 50 किलोग्राम तक का सामान लेकर 30-40 किलोमीटर (KM) तक उड़कर ड्रग्स व हथियार पहुंचाने का काम आसानी से कर लेते हैं ।
पिछले कई वर्षों से यह सुना जाता रहा है कि एलओसी के ऊपर से ड्रोन के जरिये हथियार भेजकर पाकिस्तान कश्मीर (Pakistan Kashmir) में आतंकवाद फैलाने का काम कर रहा है। हालांकि, पंजाब की सरकार इन ड्रोन से जिस तरह से निपट रही है, उसे गृह मंत्रालय ने भी काफी बेहतर माना है। पंजाब (Panjab) में जो रणनीति लागू की जा रही है, उसके तहत या तो ड्रोन को हवा में ही उड़ा दिया जाता है, या फिर उसे पकड़कर उसके पीछे पाकिस्तान का हाथ साबित किया जाता है। हालांकि पाकिस्तान के खिलाफ अब तक हजारों सुबूत मिल चुके हैं। लेकिन वह अपने स्वभाव के मुताबिक कभी इन्हें मानता नहीं है। हालांकि, जब भारत, पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट या उरी जैसे बड़े अभियान चलाता है, तो वह शांत भी हो जाता है। लेकिन कुछ समय बाद वह फिर से पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने लगता है।
इस समस्या का एक हल यह हो सकता है कि पाकिस्तान (Pakisthan) से बात करके एक समझौता किया जाए। उसे समझाया जाए कि लड़ाई से दोनों देशों का नुकसान होगा। हम शांति चाहते हैं। पाकिस्तान को अपनी बदहाली दूर करने के लिए पैसा चाहिए, वह हम देंगे। लेकिन बदले में पाकिस्तान (Pakisthan) को भी अपने हथकंडों से बाज आना होगा । अगर फिर भी पाकिस्तान (Pakisthan) हमारे खिलाफ कोई कदम उठाता है, तो भारत उसको आर्थिक मदद बंदकर कड़ी कार्रवाई करेगा। गौरतलब है कि 1960 और 70 के दशक में जब मिस्र और इस्राइल की लड़ाइयां होती थीं, तब अमेरिका ने भी यही रणनीति अपनाई थी।
दूसरा उपाय यह है कि ड्रोन पर नजर रखने के लिए उच्च तकनीकी विकसित की जाए। अमूमन ड्रोन एलओसी या पंजाब सीमा (Punjab Border) के बाहर से उड़ाए जाते हैं। लेकिन वे इतने छोटे होते हैं कि रडार उन्हें पकड़ ही नहीं पाता। फिर, भारत (India)अब तक ऐसी तकनीक भी विकसित नहीं कर पाया है, जिससे पूरा एलओसी या पंजाब (Panjab) की सीमा कवर की जा सके। समझने वाली बात है कि ड्रोन के जरिये पाकिस्तान (Pakisthan) दो तरह के सामान भारत (India) भेजता है। एक हथियार और दूसरा ड्रग्स, जिनके जरिये पाकिस्तान क्रमशः जम्मू-कश्मीर और पंजाब के युवाओं की जिंदगियां बर्बाद कर रहा है।
अनुच्छेद-370 हटने से पहले कश्मीर के राजनेता या स्थानीय लोग पुलिस प्रशासन या सैनिकों को सही ढंग से काम नहीं करने देते थे। फिर, स्थानीय सरकार (local government) और भारत सरकार(India Army) में भी तालमेल नहीं था, जिससे वहां की स्थिति दयनीय बनी हुई थी। लेकिन अनुच्छेद 370 हटने के बाद वहां के हालात में काफी सुधार आया है। इसके बावजूद पंजाब और जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान अव्यवस्था फैलाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। कभी अमृतपाल जैसों की मदद करके, तो कभी ड्रग्स का जाल बिछाकर पाकिस्तान भारत (Pakisthan-India) को नुकसान पहुंचाना चाहता है। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में केंद्र सरकार (Government) की नीति बहुत ही सराहनीय रही है और बहुत काबिलियत से हमने वहां स्थिति सामान्य करने की कोशिश की है। लेकिन इस समस्या से पार पाना इतना आसान नहीं होगा ।
दरअसल, पाकिस्तान के पास अपने लोगों को दिखाने के लिए कुछ है नहीं । इसलिए, वह लगातार भारत को क्षति पहुंचाने की कोशिश करता रहता है। ऐसे में, जरूरी है कि भारत कुछ नीतिगत कदम उठाए। सबसे पहले हमें जम्मू-कश्मीर की समस्या को जमीनी स्तर पर समझना होगा और उसे सुलझाना पड़ेगा। केंद्र सरकार वहां पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराए, जैसे- स्कूल, सड़क, ब्रिज, आधारभूत संरचना आदि। इससे वहां जीवन स्थिति व रहन-सहन में सुधार हो सकेगा और वहां के लोग खुशहाल जीवन जी सकेंगे। इससे वहां की जनता % आजादी% के नारे लगाने के बजाय हमारे साथ मिलकर वहां विकास की नई इबारत लिखने में हमारी मदद करेगी। अगर, हम वहां के पर्यटन और स्थानीय व्यवसाय को बढ़ावा दें, जिससे वहां पर रोजगार पैदा हो सके, तो यह समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।
साथ ही केंद्र सरकार वहां के बजट को बढ़ाए और ऐसी योजनाएं बनाए, जिससे वहां पर समुचित विकास हो सके और अन्य प्रदेशों के लोग भी वहां जाने के लिए उत्सुक हों। इसके अलावा वहां पर सुरक्षा-व्यवस्था में भी सुधार के लिए बेहतर रणनीति बनाई जाए और उसका सतर्क क्रियान्वयन भी हो । अच्छी बात यह है कि केंद्र सरकार इसी विजन पर काम भी कर रही है।
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