vasundhara raje
नई दिल्ली (एजेंसी)।राजस्थान (Rajasthan) विधानसभा चुनाव (Vidhansabha election) में कुछ महीने ही बचे हैं। भाजपा (BJP) ने चुनाव के लिए चुनाव प्रबंधन कमिटी और संकल्प पत्र यानी घोषणा पत्र कमिटी बना ली है। गौरतलब है कि इसमें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) को जगह नहीं मिली । हालांकि अभी प्रचार कमिटी की घोषणा का ऐलान होना बाकी है। वसुंधरा के समर्थकों को उम्मीद है कि इसकी कमान उन्हें दी जा सकती है।
  • प्रचार कमिटी क्यों है अहम
किसी भी चुनाव में प्रचार कमिटी काफी अहम होती है। किसी नेता को प्रचार कमिटी का प्रमुख बनाकर अप्रत्यक्ष तौर पर यह संदेश भी दिया जाता है कि चुनाव उसके नेतृत्व में लड़ा जा रहा । समर्थकों को उम्मीद है कि इसकी कमान वसुंधरा को मिलेगी। वहीं, दूसरी तरफ पार्टी में वसुंधरा विरोधी गुट का कहना है कि ऐसा जरूरी नहीं है। एक तरफ वसुंधरा और उनके समर्थक अपनी नाराजगी का इजहार कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से यह कहा जा रहा है कि वसुंधरा पार्टी के लिए प्रचार करेंगी और पार्टी जो जिम्मेदारी देगी वह निभाएंगी।
  • भाजपा बोली- वसुंधरा पार्टी को जिताएंगी
प्रबंधन कमिटी और संकल्प पत्र कमिटी के ऐलान के बाद जब राजस्थान भाजपा की कोर कमिटी की मीटिंग हुई तो उसमें वसुंधरा राजे नहीं पहुंचीं। माना जा रहा है कि वह अपनी नाराजगी का इस तरह इजहार कर रही हैं। इससे पहले भी कई बार उनके समर्थक खुलकर यह बात बोल चुके हैं। साथ ही उन्हें सीएम कैंडिडेट बनाने की मांग के साथ दबाव डाल रहे हैं हालांकि भाजपा के राजस्थान प्रभारी अरूण सिंह ने मीडिया से कहा कि वसुंधरा राजे हमारी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, दो बार की मुख्यमंत्री हैं, वो पार्टी को जिताने के लिए पूरा काम करेंगी। पार्टी के लिए प्रचार करेंगी और पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी वह करेंगी ।
  • पांच साल पुराना है मनमुटाव
भाजपा आलाकमान और वसुंधरा के बीच 2018 से मनमुटाव होने लगा था। तब भाजपा जिसे पार्टी प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहती थी, उसका वसुंधरा ने विरोध किया। इसके बाद पार्टी को फैसला बदलना पड़ा। उस वक्त वसुंधरा अपनी बात मनवाने में सफल रहीं, लेकिन पार्टी नेतृत्व से उनकी तल्खी बढ़ती चली गई। कुछ दिनों पहले भाजपा ने उन्हें फिर से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है। माना जा रहा है पार्टी की तरफ से उन्हें संदेश दिया गया है कि वह राज्य की राजनीति की बजाय राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय हों, लेकिन वसुंधरा की तरफ से भी साफ संदेश दे दिया गया है कि वह राज्य की राजनीति को नहीं छोड़ेंगी।
  • क्या भाजपा ले सकती है जोखिम
यह भी सवाल है कि क्या वीजेपी वसुंधरा को दरकिनार कर सकती है और क्या चुनाव से पहले ऐसा करने का जोखिम पार्टी उठाएगी। भाजपा ने लगभग यह तो साफ कर दिया है कि वह राजस्थान चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के चेहरे पर लड़ेगी। लेकिन पार्टी वसुंधरा को एकदम दरकिनार नहीं कर सकती। उनका बड़ा जनाधार है। अगर बगावत खुलकर हुई तो इसे संभालना मुश्किल हो सकता है। वैसे भी वीजेपी ने कर्नाटक चुनाव से सबक लिया है। वहां येदियुरप्पा (Yediyurappa) को साइडलाइन करने का नतीजा भाजपा देख चुकी है। साथ ही हिमाचल प्रदेश के नतीजों से भी साफ है कि सिर्फ प्र.म. के चेहरे पर राज्य का चुनाव जीतना आसान नहीं है। पार्टी को इसलिए राज्य में राज्य के ही नेताओं की जरूरत है। हालांकि यह भी लगभग तय है कि भाजपा राजस्थान में किसी एक नेता को आगे नहीं करेगी पार्टी ने जिस तरह परिवर्तन यात्रा की योजना बनाई है उससे भी यही संदेश जाता है।
  • इस बार अलग है सूरत
भाजपा राज्य में चार परिवर्तन यात्राएं निकालेगी। यह यात्रा चार अलग-अलग नेताओं की अगुवाई में होगी। इससे पहले जब 2003 और 2013 में भाजपा ने परिवर्तन यात्रा निकाली थी उस वक्त इसकी अगुवाई वसुंधरा राजे ने की थी। 2018 के चुनाव के वक्त भाजपा सत्ता में थी तो भाजपा ने सुराज यात्रा निकाली और वसुंधरा ने इसकी अगुवाई की, जिससे साफ था कि पार्टी का सीएम चेहरा वसुंधरा राजे ही हैं। लेकिन इस बार स्थिति और रणनीति दोनों पहले के मुकाबले अलग दिख रही है।
Editorial

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