Pratahkal-Suresh Goyal-Alaska Cruise 09 : Enjoyed Losing $25 At The Casino
डेक पर हवा अच्छी चल रही थी इसलिये यहां से उठने का मन ही नहीं कर रहा था। राजा को कैसीनो जाने की जल्दी थी। जहाज कब का अमरीकी सीमा से निकल चुका था इसलिये कैसीनो भी शुरू हो गया था। मेरी इच्छा थी कि एक बार प्रीति जिस शो में गई है वो थोड़ी देर के लिये देखें। केसीनो भी उधर ही था। शो के ऑडिटोरियम में पहुँचे तो हाल खचाखच भरा था, अंधेरा अलग था, कहीं भी बैठने की सीट नजर नहीं आई तो खड़े होकर ही देखने लगे। मंच पर कुछ युवक व युवतियां संवाद बोलते हुए नृत्य कर रहे थे और गीत गा रहे थे। यहां ज्यादा देर नहीं कैसीनो पास में ही था, उसमें घुस गये।
मैं तो लाटरी तो क्या ही फाडनी तक का टिकट नहीं लेता मगर राजा राजा है कहाँ मानने वाला था। यहां कई स्लोट मशीनें थी। डोलर की थी, सेन्ट की थी। सब जानते हैं कि यहां से कोई जीत के नहीं जाता। जो जीतता भी है। और अधिक जीतने के चक्कर में जो कुछ जीता है वह भी गंवा देता है। कई लोग के लिये ही खेलते हैं और तय कर लेते हैं कि इतनी राशि से अधिक हार येसो उठ जायेंगे। जो इस सोच पर अडिग रहते हैं वे कोई नुक्सान नहीं उठाते, जितना गंवाते हैं उतने का मनोरंजन हो जाता है।
राजा ने इसीलिये डोलर की मशीन नहीं चुनी, 10 सेन्ट की मशीन चुनी। 10 डॉलर से ज्यादा नहीं खेलना तय किया। उसने एक डोलर का नोट मशीन में डाला और बटन दबाया। मशीन के स्क्रीन पर तरह तरह के तीन चित्र आते हैं, कभी फल तो कभी अंक तो कभी कुछ। यदि दो चित्र जैसे चित्र आ जाते हैं तो पैसा डबल हो जाता है, जैसे 10 सेन्ट के 20 सेन्ट हो जाते हैं। इसी तरह के अलग अलग नियम- तीनो चित्र एक जैसे आ जायें तो बहुत पैसा मिलता है, किसी में चार गुना, किसी में और भी ज्यादा, मुझे तो पता भी नहीं था, राजा सब जानता था।
राजा ने दो तीन बार बटन दबाया, हर बार गंवाया तो उसने मुझे कहा- आप दवाओं, मैंने मना कर दिया तो लड़ने लगा, पैसा मैंने लगाया है, खेल में रहा हू आपको सिर्फ बटन दबाना है, इसमें कौन सा पाप लग रहा है। मैंने बटन दबाया कुछ नहीं आया, उसने कहा और दबाओ, फिर भी कुछ नहीं आया। दस प्रयासों में तो डालर पूरा हो गया। मैंने कहा हो गया काम अब चलो। वो कहां मानने वाला था। अब उसने एक एक डालर के तीन चार नोट एक के बाद एक मशीन में डाल मुझे तो यह देखने में मजा आया ज्यू ही वह एक डोलर का आधा हिस्सा मशीन में डालता, बाकी आधा हिस्सा मशीन तुरन्त हड़प लेती मशीन को इस तरह डोलर गप करते देख एसा लगा जैसे कोई मुँह में लड्डू गप करता है।
तीन चार डालर डालने से अब 30-40 मौके मिल गये। दो तीन बार बटन माने के बाद कुछ ऐसे चित्र आये जिससे एक डालर मिल गया। स्क्रीन पर एक तरफ निरन्तर हिसाब आता रहता था कि आपके कितने पैसे बाकी हैं, जीती हुई राशि भी इसमें शामिल हो जाती थी। थोड़ी ही देर में कुल पांच डालर के बदले सात में डालर हो गये। मैंने कहा ये सात डालर ले लो और चलो। वो कहने लगा यहां से पैसे लेकर कोई जाता है क्या, और बटन दबाओ। वो सातों डालर जब तक शून्य नहीं हो वो खेलता रहा तभी हम इस मशीन से उठे।
आजकल तो सभी स्लोट मशीनें कम्प्यूटराइज व डिजीटल हो चुकी हैं। इसलिये सारा काम ओन लाईन हो जाता है। पहले इन मशीनों में सिक्के भरे रहते थे। डोलर मशीन में डोलर के, सेन्ट मशीनों में सेन्ट के खेलने वाले भी मशीन में बने खड्डे में सिक्के डालते थे और फिर हेण्डल दबाते थे। ज्यू ही कोई जीतता तो खनखनाते हुए सिक्के मशीन से उगल पड़ते। यह खनखनाहट एसी आकर्षक होती कि सारे केसीनो के लोगों की निगाहे उस मशीन पर बैठे व्यक्ति की तरफ उठ इससे अन्य लोगों को प्रेरणा अलग से मिल जाती, इसके भाग खुल गये तो हमारे खुल सकते हैं। हार कर उठने वाले लोग भी मशीन पर वापस बैठ जाते।
अब ऐसा नहीं है। पहले तो लॉस वेगस जैसे स्थानों के बड़े बड़े ट्रक की ट्रकें भर कर सिक्के आते थे। खेलने वाले भी बड़े बड़े डिब्बों में सिक् लेकर मशीनों पर बैठे रहते थे। अब सिक्कों का उत्पादन भी उनके मूल्य से पड़ने लगा है। सोसाइटी धीरे धीरे कैश लेस होती जा रही है तो भी स्वाभाविक रूप से कम ही हो रहा है। मशीनों की खनखनाहट के बदले अब स्लिप निकल आती है जिसे काउन्टर पर जाकर कैश किया जा सकता है।
जहाज का केसीनो छोटा था मशीनें व अन्य गेम्बलिंग टेबलें सीमीत संख्या में ही थी। केसीनो एसी जगह रखा गया था जहा से जहाज के हर व्यक्ति को गुजर कर जाना ही पड़ता था। खाना खाने जाओ, शो देखने जाओ, किसी भी महत्वपूर्ण गतिविधि में भाग लो तो इससे होकर ही गुजरना पड़ता था। चलते चलते कई लोगों का मन हो जाता और वो खेलने लगते खाने के लिए थोड़ी प्रतीक्षा करनी है लोग उतनी देर के लिये हाथ आजमा लेते। लोगों की मनोवेज्ञानिक स्थिति का पूरा ध्यान रखते हुए इसका स्थान तय किया गया था। केसीनो 24 घन्टे चलता रहता था। जहाज में ज्यादातर वरिष्ठ नागरिक ही थे। युवा लोगों को इतना धैर्य कहां कि वे 7 दिन तक अपनी घटनापूर्ण दुनिया से अलग हो सकें। कुछ युवा जरूर नजर का रहे थे मगर बहुत कम जहाज के यात्रियों की औसत आयु लेते तो 50 से ज्यादा है आती। पश्चिम में तो क्रूज पर जाने का मतलब ही यह है कि आप की उम्र हो चुकी । वरिष्ठ नागरिक केसीनो में बैठे रह कर अपना वक्त गुजारते हैं। यहां एक सेन्ट की मशीन भी थी, इसमें सौ बार खेलो तो भी एक डालर ही जाता है। दो चार डालरों में दो तीन घन्टे निकल जाते हैं। ड्रिंक्स वगैरह मशीनों पर ही लाकर दे दी जाती है तो लोग इसका भी आनन्द लेते हैं। बड़े केसीनो में जिस तरह शिल्स अत्यल्प वस्त्रों में ड्रिंक्स परोसती रहती है वैसा यहां कुछ नहीं था। एक गरिमा बनी हुई थी।
स्लोट मशीन से उठे तो राजा एक रूलेट पर रूक गया। रूलेट एक चक्कर सा होता है जिस पर अलग अलग अंकों के हिस्से होते हैं। एक गोटी होती है, रूलेट के चक्कर को घुमाते हैं और गोटी जिस अंक में आकर गिर जाती है, उस अंक पर पैसे लगाने वाले जीत जाते हैं। हम यहां थोड़ी देर खेल देखते रहे तभी राजा ने अपनी जेब में हाथ डाला। मैं उसका मकसद भांप गया, पांच डालर हम गंवा चुके थे, पांच डालर और बचे थे, मैं समझा बाकी पांच डालर यहां लगा रहा है, मगर उसने बीस डालर निकाल कर दे दिये। मैं देखता ही रह गया। सबके सामने कुछ कहना अच्छा भी नहीं था, मगर मेरे भाव वो समझ गया और शरारती की तरह हंसने लगा जैसे मुझे चिढा रहा हो।
उसने 20 डालर के चिप्स खरीद लिये। ये केरम की गोटियों जैसी पतली होती है। राजा ने 26 नम्बर पर दाव लगाया। रूलेट घूमा, गोटी 26 न. पर न किसी अन्य नम्बर पर जा गिरी। 20 डालर गये पानी में उसकी तो और हो रही थी मगर मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। इस बीच एक और चक्कर हो इस बार गोटी 26 न. पर गिरी तो कहने लगा देखा मैं कितना सही था। मैंने • क्या फायदा जीता तो कोई और।
कैसीनो में ब्लेक जेक व पोकर के टेबलों पर भी यात्रियों की भीड़ थी। स्लोट बादले कही सबसे लोकप्रिय खेल होता है। यह तीन पत्ती की तरह का खेल होता है मगर इसमें हर पत्ते के अंक निर्धारित होते हैं। इस खेल कहते हैं क्यूंकि जिसके पत्तों के 21 अंक हो गए वो जीत जाता है। जिसके 21 अंक से अधिक आ गये वो बाहर हो जाता है। यह खेल आपस में न खेल इसके साथ खेला जाता है जो केसीनो का कर्मचारी होता है। खेल की इतनी है कि इसे ओन लाईन भी खेला जाता है।
केसीनो का एक अन्य लोकप्रिय खेल क्रेप्स होता है। वह यहां नजर नहीं आ रहा था। इसमें पासे फेंके जाते हैं, पासों या डाईस पर नम्बर अंकित होते हैं। एक खेल पोकर भी बहुत लोकप्रिय है, उसके भी यहां टेबल लगे थे। पोकर पांच यती का फ्लेश खेल है। जहाज पर पोकर का टूर्नामेन्ट भी एक दिन आयोजित होने चला था। पोकर खेल टी.वी. पर भी खेला जाता है। ई.एस.पी. एन. जैसी खेल चैनलों पर कई लोग खेलते हैं।
Editorial

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