Pratahkal-Suresh Goyal-Alaska Cruise 08 : First time saw someone smoking e cigarette
खाने के पश्चात रंगारंग कार्यक्रम थे। थियेटर में कोई फिल्म चल रही थी। डिटोरियम में नृत्य एवं गीतों का कोई कार्यक्रम था। प्रीति की इसमें काफी सची थी। मुझे तो हाल में बैठते ही नींद आ जाती है इसलिये मना कर दिया। मुनीश उसके साथ चला गया। राजा को खाने के बाद सिगरेट की तलब रहती है। पूरा जहाज धूम्रपान मुक्त क्षेत्र था, सिर्फ उपर के डेक में खुली हवा में जरूर इसकी इजाजत थी।
पिछले 20-25 वर्षों में धूम्रपान के खिलाफ जन चेतना में बहुत वृद्धि हुई है। अमेरिका में धूम्रपान से होने वाले केन्सर और फिर उससे मौत के खिलाफ मुकदमों की बाढ आ गई। सिगरेट कम्पनियों द्वारा मुआवजों में भारी भरकम रकम अदा करना आम बात हो गई। ये मुआवजे करोड़ों डालर तक पहुँच गये। वकीलों को इन मुआवजों का भारी हिस्सा मिलने से वकील लोग धूम्रपान करने वाला कोई व्यक्ति सामान्य मौत भी मर जाता तो उसके परिजनों को भारी मुआवजा दिलाने का लालच दे सिगरेट कम्पनियों के खिलाफ मुकदमा ठोकने लगे।
धीरे धीरे सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने पर रोक लगनी शुरू हो गई। किसी रेस्टोरेन्ट, सिनेमा, बाजार, हवाई अड्डे वगैरा कहीं भी धूम्रपान करो तो भारी दंड का प्रावधान हो गया। इसी कारण धूम्रपान करने वालों की सुविधा के लिये ज जगह स्मोकिंग जोन बनने लगे। सिगरेटों पर इतना करारोपण कर दिया गया कि कीमतें दस गुना तक पहुँच गई। जो सिगरेट का पेकेट एक डालर में मिलता था 10 डालर में मिलने लगा।
जहाज में एक डयूटी फ्री शोप थी जहां सिगरेटें बिक रही थी। अमे सिगरेट खरीदना आसान नहीं होता। हमारे यहां तो पान की दुकानें जन जीवन का अभिन्न अंग है। पान की दुकान के बिना किसी बाजार की कल्पना तक नहीं कर सकते मगर यहां तो एसी पान की दुकानें नहीं होतीं। सिगरेट खरीदने के लि • मार्केट जाना पड़ता है या पेट्रोल पम्पों पर लगे डिपार्टमेन्टल स्टोर से सिगरेट ली जा सकती है। बच्चों को सिपेट नहीं मिलती। दुकानदार को जरा भी शक हो जाये वह आई.डी. मांग लेता है, उसमें उम्र देखकर ही वह सिगरेट देता है। लाटरी के टिकट के साथ भी लागू है, 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को ही लाटरी टिकट या सिगरेट बेची जा सकती है। बार में यह आयु सीमा 21 सिगरेट व शराब का शौक किशोर उम्र के होते होते बढ़ने लगता है। कई 14-15 साल की लड़कियां जिनका शारीरिक विकास अच्छा हो जाता है वे अपनी उम्र के जाली आई.डी. कार्ड बनवा कर रोब से बार में जाती है और सिगरेट शराब पीती है।
न्यूयार्क में मैं जिस डगलस के लिये वियाग्रा की गोलियां लाया था उसके भाई की पोतियों ने यही कर रखा है। उम्र तो मुश्किल से उनकी 13-14 की होंगी मगर उठ अच्छी है इसलिये एकदम युवतियां लगती हैं। इन्होंने अपनी उम्र के जाली आई.डी. बना रखे हैं। एक दिन जोएल ने पकड़ लिया तो पता चला।
वैसे यहां कहीं कहीं स्मोक शोप जरूर नजर आती है मगर ये जन सामान्य के लिये नहीं होती। इनके ग्राहक उच्च वर्ग के लोग ही होते हैं। यहां सिगरेटों के अलावा खास करके सिगार, पाईप, चूरट वगैरह मिलती हैं।
डछूटी फ्री शोप पर सिगरेट की कीमत जानकर राजा का सिर चकरा गया। वह न्यूयार्क से पूरा का पूरा सिगरेट का डण्डा खरीद कर लाया था, यही सोच कर कि जहाज पर तो सिगरेट मिलेगी नहीं। राजा जिस कीमत में एक डण्डा खरीद कर लाया था उतनी कीमत में यहां पांच डण्डे मिल रहे थे। उसने ठान लिया कि जाने से पहले जितने अधिक डण्डे वह अपनी अटेची में ठूस सके लेकर जायगा। कम से कम साल भर का कोटा तो जमा कर ही लेगा।
डेक के एक हिस्से पर थोड़ी सी छत थी जिस पर सबसे उपर का खुला डेक था। यहां गोल टेबल व उसके चारों तरफ कुर्सियां लगी हुई थीं। पहले से ही कुछ लोग बैठे यहा धूम्रपान कर रहे थे। एक तरफ एक छोटा सा काउन्टर लगा था जहां शराब बिक रही थी। इसी के बगल में दोनों तरफ अलमारियों के बड़े बड़े खंड में कम्बले रखी हुई थीं। कई बार जब तेज हवाएं चलती है तब यात्री ये कम्बल ले कर ओढ लेते हैं और यहां बैठ कर समन्दर का नजारा देखते हैं। डेक का तीन चौथाई से अधिक हिस्सा खुला हुआ था। दोनों तरफ की तथा पिछवाड़े की रेलिंग पकड़ कर कई लोग खड़े थे और पानी को चीर कर आगे बढते जहाज से बनती लहरों का आनन्द उठा रहे थे। अन्धकार में सफेद लहरों की पट्टी की पट्टी नजर आ रही थी।
हम लोग भी कुर्सियां खींच कर एक टेबल पर बैठ गये। इस डेक पर आने के लिये केटेरिया रेस्टोरेन्ट को पार करके आना पड़ता था। केफेटेरिया में रात्रीकालीन सपर शुरू हो गया था। कई लोग अन्दर से काफी के प्याले भर भर कर ले आये थे और धूम्रपान के साथ चुस्कियां भी लेते जा रहे थे।
कुछ देर यहां बैठे रहे तभी सामने धूम्रपान करते एक व्यक्ति पर मेरी नजर गई। उसकी सिगरेट मुझे अजीब सी लगी। मैंने राजा को पूछा कि वह व्यक्ति क्या पी रहा है, मुझे लगा चूस्ट वा पाईप जैसी ही कोई चीज आती होगी। राजा ने बताया यह ई सिलरेट है, इलेक्ट्रोनिक सिगरेट अमेरिका में पिछले तीर चार सालों से इसका चलन बढ़ गया है। मैंने भी ई सिगरेट का नाम तो बहुत सुना था पर देखने का मौका पहली बार मिला था। मैंने अब उसे गौर से देखा - डंडी तो सिगरेट जैसी ही थी मगर उसके नीचे कांच की नली जैसी कोई चीज लगी थी जिसमें कोई तरल पदार्थ भरा था। वह व्यक्ति आम सिगरेट पीने वालों जैसे ही कश ले रहा था और धुंआ निकाल रहा था। मैंने सोचा कि जब यह धुंए का कश लेता है तो बात तो वो की वो ही है, इसमें फर्क क्या हुआ। राजा ने बताया कि आम सिगरेट में तम्बाकू होती है। जिसका निकोटीन स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होता है, यही फेंफड़ों को प्रभावित करता है और केन्सर का कारण बनता है। ई सिगरेट के अन्दर जो तरल पदार्थ होता है, उसका इलेक्ट्रोनिकल्ली धुंआ बन जाता है। जब कश लिया जाता है तो पीने वाले को वही सन्तुष्टि मिलती है जो तम्बाकू की सिगरेट पीने से मिलती है।
ई सिगरेट अभी नई ही हैं इसलिये इसके उपयोग से होने वाली दूरगामी हानियों का अभी पता नहीं चल पाया है फिर भी कई लोगों का मानना है कि चूंकि धुआ फेंकड़ों में जाता है इसलिये कुछ न कुछ नुक्सान तो होता ही होगा। इसके बढ़ते प्रयोग से यह आशा तो जगी है कि तम्बाकू से होने वाली आयी। ई सिगरेट का आविष्कार 2003 में एक चीनी द्वारा किया गया था। भी अधिकांश ई सिगरेटें चीन में ही बनती है। मोबाइल फोनों की तरह इन्हें किया जाता है और उपयोग में लिया जाता है। जिस निकोटीन से छुटकार ई मिनेट बनी, आजकल उसी निकोटीन से भरे तरल पदार्थ की भी ई आने लगी है।
दरअसल सिगरेट पीने की जिन्हें लत पड़ जाती है उनकी तल निकोटीन की सिगरेट पीने से पूरी नहीं होती। हमारे यहां जिस तरह पान आदि से भी तम्बाकू का शौक पूरा कर लिया जाता है उसी तरह यहां निकोटीन गोलियां, चाकलेट, च्यूंगम और टॉफियां आने लगी हैं। तम्बाकू से छुटकारा प लौंग, इलायची तथा सॉफ की सिगरेट भी आती हैं। ये आम सिगरेटों की तरह जलती है और इनका कश खींच धुंआ निकाला जाता है।
हमारे यहां भी कई लोग हुक्कों में तम्बाकू की जगह सॉफ तथा अन्य एसे ही हानिरहित उत्पाद प्रयोग करते हैं। हुक्के में चूंकि पानी चलता है इसलिये इस अपेक्षाकृत सुरक्षित माना गया है क्यूंकि धुंआ पानी से छन जाता है।
Editorial

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