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इन्द्रियों के प्रयोग में संयम और जागरूकता रखने का प्रयास हो
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आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) के सानिध्य में शनिवार को ‘बेटी तेरापंथ की’ सम्मेलन आयोजित हुआ। पूरे परिसर में स्नेह, संस्कार और समन्वय की त्रिवेणी को प्रवाहित हुई।

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मुंबई । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) के सानिध्य में शनिवार को ‘बेटी तेरापंथ की’ सम्मेलन आयोजित हुआ। पूरे परिसर में स्नेह, संस्कार और समन्वय की त्रिवेणी को प्रवाहित हुई।
मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान सम्मेलन के शुभारम्भ में आचार्य महाश्रमण ने उपस्थित जनता संग बेटियों को आशीष प्रदान किया। वहीं बेटियों ने इस दौरान वक्तव्यों और परिसंवादों के माध्यम से ऐसी प्रस्तुति दी कि पूरा वातावरण स्नेह भावों से आप्लावित बन गया।
आचार्य महाश्रमण ने अपने प्रवचन में भगवती सूत्र के आधार पर कहा कि मानव जीवन में पांचों इन्द्रियों का प्राप्त होना एक उपलब्धि होती है। कितने-कितने जीवों को तो पांच इन्द्रियां ही नहीं प्राप्त होतीं। कुछ मनुष्य आदि जीव जो पंचेन्द्रिय तो होते हैं, परन्तु उनमें कुछ कमी भी पाई जा सकती है। जैसे कोई सुन नहीं सकता, कोई प्रज्ञाचक्षु हो जाए आदि-आदि रूप में, किन्तु जिसे पांचों इन्द्रियों की शक्तियां अच्छे रूप में प्राप्त है, मानों वह अच्छी बात है। भगवती सूत्र में इन इन्द्रियों से संबंधित बात बताई कि इन्द्रियों का प्रयोग यदि आसक्ति के वशीभूत होकर किया जाए तो सघन कर्म का बंध होता है, इसलिए आदमी को इन्द्रियों के प्रयोग में जागरूकता रखने का प्रयास करना चाहिए। इन्द्रियां ज्ञान का माध्यम बनती हैं तो राग व द्वेष के कारण पाप कर्म का बंध कराने वाली भी हो सकती हैं। आदमी को अपने इन्द्रियों के प्रयोग में संयम और जागरूकता रखने का प्रयास करना चाहिए। कानों से आर्षवाणी, शास्त्रवाणी और कल्याणीवाणी के श्रवण का प्रयास हो। नेत्रों से गुरुदर्शन, आगम, शास्त्र, साहित्य आदि के अध्ययन के रूप में उपयोग, जिह्वा से भक्ति गीतों, मंत्रों आदि का जप अथवा संगान आदि के रूप में हो तो अच्छा लाभ हो सकता है।
आचार्य महाश्रमण ने ‘बेटी तेरापंथ की’ के संभागियों से कहा कि यह सम्मेलन संस्कार और शिक्षा को पुष्ट बनाने वाला है। पुरानी स्मृतियों को ताजा करने के साथ-साथ अच्छे धार्मिक संस्कार, अहिंसा, संयम, शांति, समन्वय आदि रहे तो जीवन अपने सुखी रह सकता है। परिवार और बच्चों में अच्छे संस्कार देने का प्रयास होना चाहिए। संयोजिका कुमुद कच्छारा ने विचार रखे। सहसंयोजिका वन्दना बरड़िया व महासभा अध्यक्ष मनसुखलाल सेठिया ने भी अभिव्यक्ति दी।

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