✕
भाजपा कार्यकर्ताओं का सचिवालय कूच, वॉटर कैनन से खदेड़ा
By EditorialPublished on
भाजपा (BJP) ने मंगलवार को राज्य सरकार के खिलाफ जयपुर में बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदेश बीजेपी ऑफिस पर सभा के साथ ही पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सचिवालय घेराव के लिए कूच किया। स्टेच्यू सर्किल पर पुलिस ने वॉटर कैनन (Water Cannon) का इस्तेमाल कर बीजेपी कार्यकर्ताओं को खदेड़ दिया। वहीं, उप नेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) समेत कई नेताओं की पुलिस से झड़प हो गई। पुलिस के साथ धक्का-मुक्की में कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें आई हैं।

जयपुर ( कार्यालय संवाददाता) । भाजपा (BJP) ने मंगलवार को राज्य सरकार के खिलाफ जयपुर में बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदेश बीजेपी ऑफिस पर सभा के साथ ही पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सचिवालय घेराव के लिए कूच किया। स्टेच्यू सर्किल पर पुलिस ने वॉटर कैनन (Water Cannon) का इस्तेमाल कर बीजेपी कार्यकर्ताओं को खदेड़ दिया। वहीं, उप नेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) समेत कई नेताओं की पुलिस से झड़प हो गई। पुलिस के साथ धक्का-मुक्की में कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें आई हैं।
प्रदर्शन में प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी (CP Joshi), केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat), नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, उप नेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया, सांसद राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़, सांसद सुमेधानंद सहित बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने गिरफ्तारियां दीं। सचिवालय घेराव से पहले प्रदेश बीजेपी कार्यालय के बाहर सभा आयोजित की गई। यहां नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा- प्रदर्शन में आया एक-एक कार्यकर्ता गहलोत सरकार के ताबूत में आखिरी कील ठोकने का काम करेगा। वहीं, राजस्थान की जनता सीएम अशोक गहलोत के दोनों पैरों में बंधी पट्टियां खोलने का काम करेगी। भाजपा का दावा है कि इस घेराव कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रदेशभर से लाखों लोग जयपुर आए। भाजपा के 'चलो जयपुर ' नारे को पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने भी समर्थन दिया। इस आंदोलन के जरिए बीजेपी के 'नहीं सहेगा राजस्थान' अभियान का समापन हो गया। घेराव से पहले आयोजित सभा में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा- जब किसी टायर में कील लग जाती है तो गाड़ी चलाने के लिए टायर बदला जाता है। उसी तरह से सीएम अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) के पैरों में भी कील चुभ गई है। ऐसे में अ हमें उन्हें बदलने की जरूरत है।

Editorial
Next Story
Related News
X


