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अलास्का जहाज यात्रा 06 : चलता-फिरता फाईव स्टार होटल है जहाज
By EditorialPublished on
थोड़ी ही देर में मुनीश वाई फाई की जानकारी लेकर आ गया। उसने एक कागज आगे करते हुए कहा कि इसमें वाई फाई की दरें दी गई हैं, अपने को कितना लेना है तय कर लो फिर लोग इन कर देते हैं। मैंने कागज हाथ में ले दे

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थोड़ी ही देर में मुनीश वाई फाई की जानकारी लेकर आ गया। उसने एक कागज आगे करते हुए कहा कि इसमें वाई फाई की दरें दी गई हैं, अपने को कितना लेना है तय कर लो फिर लोग इन कर देते हैं। मैंने कागज हाथ में ले देखा तो दरें बहुत मंहगी थी। सिर्फ 500 एम.बी. के 55 डालर थे। मैंने सोचा 500 एम.बी. तो दो दिन भी नहीं चलेंगे। दिन भर की घटनाओं हेतु नेट खंगालता हूं जिसमें सो सवा सौ एम.बी. आसानी से उड़ जाते हैं।
मुनीश ने कहा अपने लिये कोई विकल्प नहीं है, गहरे समुद्र में यह सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं तो पैसे तो लेंगे ही। इसमें भी सिर्फ डेटा सर्फिंग और मेल, ट्विटर वगैरा भेजने के हल्के फुल्के काम ही हो सकते हैं। डाउनलोड आदि करना संभव नहीं। लेना तो था ही। हमारे कमरे की जो चाबी का कार्ड था, वही जहाज का क्रेडिट कार्ड था। जहाज पर किये जाने वाला कोई भी व्यय, सिवाय केसीनो में जुआ खेलने के, सब इसी कार्ड से ही करना था। अभी जहाज शहर के इलाके में ही था, सिग्नल आ रहे थे इसलिये वाई फाई के लिये बाद में लोग इन करने का स से उठे।
कार्यक्रम देखा तो पता लगा कि शाम का डिनर एक अलग रेस्टोरेन्ट में है। जहाज में कुल पांच रेस्टोरेन्ट थे। दो तो आते ही हमने देख लिये थे। एक तो पू साइड पर था जहां फास्ट फूड मिल रहा था, दूसरा कैफेटेरिया था जहां हमने लंच लिया था। डिनर को छोड़ कर दिन भर के 5 खाने-पीने इन्हीं दोनों रेस्टोरेन्ट में ही करने थे। लंच-डिनर के अलावा 4 नाश्ते थे। एक तो सुबह की चाय, उसके साथ हर तरह का हल्का फुल्का नाश्ता। उसके बाद ब्रेक फास्ट जिसमें उसके बाद दोपहर की चाय तथा रात को डिनर के बाद फिर चाय नाश्ता। खाने पीने के शौकीन लोगों की एक तरह से मौज थी। माले मुफ्त दिले बेरहम वाली स्थिति थी। जहाज क्या था - चलता फिरता फाईव स्टार होटल था।
जहाज में दो रेस्टोरेन्ट एसे थे जहां पैसे देकर खाना खाया जाता था। यहा चाय, काफी, हर तरह का खाना उपलब्ध रहता था। कई लोग एकान्त में अलग थलग खाना चाहते थे तो वे यहीं खाना पसन्द करते थे। डिनर के लिये यात्रियों को अपना टेबल रिजर्व करवाना पड़ता था और समय बताना पड़ता था। हम लोग चार थे, जबकि टेबल 6 लोगों के लिये था, हमने कह दिया कि कोई भी दो अन्य यात्री। हमारी टेबल पर समायोजित कर सकते हैं।
जहाज में एक बहुत बड़ा कैसीनो था। जहाज चूंकि अभी अमरीकी जल क्षेत्र में था इसलिये केसीनो बन्द था। अमेरिका में एक दो राज्यों को छोड़ कर कैसीनों चलाना अपराध है। ज्यूही जहाज अन्तर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र में प्रवेश करेगा केसीनो हो जायगा। यहां कई तरह की स्लोट मशीनें थी, डोलर मशीनों के अलावा एक सेन्ट, 5 सेन्ट व 10 सेन्ट की भी मशीनें थी। रूलेट थे और ताश के टेबल थे।
यहीं पास में एक लाइब्रेरी भी थी। यहां सभी विषयों पर पुस्तकें उपलब्ध थीं। कई लोग यहीं बैठ कर पुस्तकें पढ़ रहे थे। वैसे कोई भी यात्री पुस्तक जारी करवा कर ले सकता था। यात्रा समाप्त के पूर्व उसे वापस जमा करानी पड़ती थी वरना उसके कार्ड में इसका पैसा चढ़ जाता था।
केसीनो के बाहर ही दो गिफ्ट शोप थी। एक में तो ज्यूलरी और वस्त्र मिल रहे थे जबकि दूसरी में खाने पीने के कोल्ड ड्रिंक, चाकलेट, जूस वगैरा के साथ सोवेनियर आईटम थे। इनमें जहाज की यात्रा के प्रतीक के रूप में कई तरह मैगनेट, ब्रॉच ,टी शर्ट बनाने में क्या तकलीफ। मगर कहीं स्वर ही नहीं आते। कई पर्यटक एसे होते हैं कि वे जहां जहां जाते हैं वहां की कोई यादगार चीज जरूर लेकर आते हैं। राजा भी एसा ही पर्यटक है। हम कनाडा में पूर्व में गये तो उसने क्यूबेक व मोन्ट्रीयल का मेग्नेट खरीदने के लिये दुकानों की एक छान ली। कहीं नहीं मिला तो मैंने अपनी पोती पलक को फोन किया जिसने पर आर्डर देकर उसे भिजवाये। उसके घर के फ्रीज़ पर जहां जहां वो गया उन केट चिपके हुए है, नहीं है तो सिर्फ उदयपुर के।
जहाज में दो बार भी थे। यहां कई लोग स्टूल पर बैठे ले रहे थे। एक म रूम भी था जिसमें लोग ताश, शतरंज आदि टेबल गेम खेल रहे थे। एक थियेटर था जिसमें रोज अलग अलग फिल्म का प्रदर्शन होता था। एक ही फिल्म के दो शो होते हो। फिल्में भी लोकप्रिय चुनी जाती थी जिससे यात्री रूचीपूर्वक आनन्द ले एक और थियेटर था जिसमें संगीत-नृत्य, नाटक, प्रतियोगिताएं आदि होते थे। हमें हर वक्त कहीं न कहीं कोई न कोई कार्यक्रम चलता ही था। बच्चों के मनोरंजन के लिये भी कार्यक्रम थे, कई प्रतियोगिताएं भी थी। एक डान्स फ्लोर भी था, एक तरफ माईक और वाद्य यंत्र लगे थे। संगीत की धुन पर यात्री यहां डान्स कर सकते थे।
जहाज के सबसे उपरी दो डेक्स पर तो खुला ओब्जर्वेशन एरिया था। यह हज के पिछवाड़े में है। इस क्षेत्र को स्टेन एरिया कहते हैं। यहां हवाओं के थपेड़ों और ठंड की वजह से ज्यादा देर रुका नहीं जा सकता था फिर भी यात्री यहां खड़े रह कर समुद्र का आनन्द ले रहे थे। शहर पीछे छूट चुका था, पहाड़ भी अब दूर होते जा रहे थे, जहाज अनन्त जल क्षेत्र की तरफ अग्रसर था। यहां डेक पर कई लोग, टाइटेनिक फिल्म के उस प्रसिद्ध दृश्य की तरह जिसमें लेनाहों व केट जहाज के छोर पर एक साथ खड़े होते हैं. सेल्फी ले रहे थे। लेनार्डो व केट तो उपर चढ़ने का जोखिम उठाते हैं मगर यहां ऐसा कोई उपर चढ़ने का स्थान नहीं था इसलिये ये लोग कोने में खड़े होकर ही इसका आनन्द ले रहे थे।
एक खुला ओब्जर्वेशन डेक चौथी मंजिल पर था, यह जहाज के दूसरे छोर यानि जहाज के अग्र भाग जिसे बो कहते हैं, पर था। इसके अलावा सातवीं मंजिल व आठवीं मंजिल पर इन्डोर ओब्जर्वेशन डेक थे। यहां कुर्सियां व सोफ लगे थे, जिन्हें बाहर के मौसम से कष्ट था वे यहां बैठकर आरामी से समुद्र का नजारा देख रहे थे।
घूम घूम कर थक गये तो सोचा कहीं बैठकर थोड़ी देर आराम कर लिया। जाय। हम लोग केफेटेरिया में पहुँच गए। यहां कई लोग चाय-काफी का आनन्द ले रहे थे। मुझे तो पानी वाली चाय पसन्द ही नहीं आती। दूध में बनी चाय की पत्तियों के साथ उबाली हुई चाय नहीं मिले तब तक मजा ही नहीं आता। काफी भी यहां की इतनी कड़वी होती है कि पी ही नहीं जाती, उपर से दूध ये लोग ठंडा देते हैं, मन मार कर यहां की चाय-काफी पीने की कोशिश भी करें तो इतनी ठंडी बनती है कि गटागट पी जाओ। गर्म गर्म चाय की चुस्कियां लेने का जो आनन्द है वो अलग ही है।

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