Pratahkal-Acharya Mahashraman-lifestyle of sacrifice and self-control
मुंबई । रविवार को आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) के सानिध्य में तेरापंथी सभा के त्रिदिवसीय प्रतिनिधि सम्मेलन का शुभारम्भ हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश की 400 से अधिक सभा और उपसभाओं के 1400 प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
आचार्य महाश्रमण ने प्रवचन के पूर्व महासभा के पदाधिकारियों सहित प्रतिनिधियों को मंगलपाठ प्रदान किया। साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा ने महासभा के सामाजिक अवदानों के विकास और आगे बढ़ाने की कामना की।
इसके बाद आचार्य महाश्रमण ने कहा कि भगवती सूत्र में भगवान महावीर ने बताया कि श्रावक का जीवन कैसा होना चाहिए। श्रावक सामान्य गृहस्थ नहीं होता। वह साधुओं का उपासक होता है। श्रमण की उपासना करने वाला श्रावक होता है। वह सत्संग करने वाला होता है। सत्संग जीवन का कल्याण करने में सहायक होता है। मानव जीवन में संगति का बहुत प्रभाव होता है। सत्संगति से भाव जगत का शुद्धिकरण हो जाता है। आंख और कान के सत्संगत के लिए सशक्त माध्यम बनते हैं। श्रावक की जीवनशैली त्याग, संयम और सादगी से परिपूर्ण होनी चाहिए। जीवन में सदाचार का प्रवास हो। श्रावक अपने प्रकार में बदलाव लाने का प्रयास करे और जितना संभव हो सके, समाज, धर्म और आत्मकल्याण का प्रयास करता रहे।
Editorial

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