Pratahkal-Acharya Mahashraman discussed about Aradhana and Viradhana
मुंबई । शनिवार को आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने भगवती सूत्र का विवेचन करते हुए कहा कि आराधना और विराधना के संदर्भ में चर्चा करते हुए बताया गया है कि एक साधु से कोई अकरणीय कार्य हो जाता है, कोई दोष लग जाता है। वह उन दोषों का प्रायश्चित, आलोचना और प्रतिक्रमण आदि नहीं करता और कालधर्म को प्राप्त हो जाता है तो वह विराधना को प्राप्त हो जाता है तथा जो साधु अकरणीय कार्य के सेवन का प्रायश्चित आलोचना और प्रतिक्रमण आदि कर लेता है और वह कालधर्म को प्राप्त करता है तो आराधना को प्राप्त करता है। कोई साधु दोष लगने के बाद यह सोचे कि बाद में प्रायश्चित्त लूंगा। भावना रखी, किन्तु कालधर्म प्राप्त होने से पहले प्रायश्चित, आलोचना, प्रतिक्रमण आदि नहीं कर पाया तो भी वह विराधना को ही प्राप्त होता है, उसे आराधना की प्राप्ति नहीं हो सकती। यदि कोई गलती करने के बाद भी यह सोचे कि प्रायश्चित क्या लेना, साधु हूं तो देवगति में कहीं- कहीं स्थान तो प्राप्त हो ही जाएगा तो उसके भी विराधना हो जाती है। इसमें चारित्रात्माओं को अच्छा दिशा-निर्देश दिया है कि साधु को ध्यान देने का प्रयास करना चाहिए कि यदि कोई अकरणीय का आसेवन हो जाए तो साधु को सरल मन से प्रायश्चित्त, आलोचना और प्रतिक्रमण कर लेने का प्रयास करना चाहिए। तत्काल प्रतिक्रमण आदि से उसकी शुद्धि हो जाएगी और वह आराधना को प्राप्त हो जाएगा। चिन्तन ऐसा होना चाहिए कि जो भी कार्य है, वह समय पर पूरा हो जाए। दोषों को बाद पर नहीं छोड़ना चाहिए। दोष लग जाए तो अपने गुरु से सरल मन से अपने दोषों का प्रायश्चित्त लें, आलोचना और प्रतिक्रमण के द्वारा अपने साधुत्व को निर्मल बनाने का प्रयास करना चाहिए।
राजस्थान के पूर्व मंत्री एवं पूर्व सांसद रघुवीर मीणा नंदनवन पहुंचे। उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मुझे आपके दर्शन करने का सौभाग्य मिला। मीणा का स्वागत प्रवास व्यवस्था समिति महामंत्री महेश बाफना अरविंद धाकड़ नितेश धाकड़ शांतिलाल चौधरी सुनील संचेती ओमप्रकाश सामोता ने किया।
Editorial

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