Pratahkal-Due to the negligence of the officials of the water supply department, the Drinking Water system is getting disturbed in the village Alipur Khatipura Nagla Bhavla.

भुसावर ( प्रा.सं.) । भुसावर उपखंड की ग्राम पंचायत अलीपुर के गांव खातीपुरा नगला भावला में इन दिनों जलदाय विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार की लापरवाही से पेयजल संकट बना हुआ है। गांव के लोगों ने बताया कि गांव अलीपुर में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से गांव में लगे डीपबोर से कोई पानी (Water) की सप्लाई नही हो रही है। उन्होंने बताया कि गांव अलीपुर में केवल एक डीप बोर चालू हालत में है जिस से गांव में सब जगह पानी की सप्लाई नही हो पा रही हैं और जलदाय विभाग की ओर से लगे हैंड पंप खराब पड़े हुए हैं। ऐसे में गांव की महिलाओ को दूरदराज से पानी लाना पड़ रहा है। गांव में सरपंच द्वारा निजी खर्चा कर टैंकरों से पानी की सप्लाई मंगाकर जरूरतमंद क्षेत्रों में की जा रही है।
गांव वालो ने बताया कि गांव की पानी की समस्या को लेकर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सहायक अभियंता तेज सिंह मीणा इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। गांव अलीपुर में सरकार की ओर पानी की बड़ी स्कीम बनाकर 268.75 लाख की लागत की योजना विभागीय अधिकारियों के माध्यम से सरकार द्वारा स्वीकृत की गई थी। गांव वालो ने बताया कि गांव में पानी की टंकी भी बन चुकी है और आधे गांव में कनेक्शन भी हो चुके है। ठेकेदार द्वारा पूरे गांव में पाइप लाइन भी डाली जा चुकी है पर ठेकेदार द्वारा ना तो बाउंड्री वॉल को पूरा कराया गया है और ना ही पाइप लाइन के लिए खोदी गई सड़क को सही कराया गया। गांव अलीपुर में केवल दिखावे के लिए नल कनेक्शन किए गए है।
गांव के लोगों ने बताया कि नल कनेक्शन होने के बाद भी नालों में एक या दो बाल्टी से ज्यादा पानी नही आता है जिससे पानी की पूर्ति क नही हो पाती है। सरपंच द्वारा गांव में पानी की पूर्ति के लिए टैंकर लगा रखे हैं जिससे गांव के लोगों की पानी की थोड़ी बहुत पूर्ति हो रही है ।
इधर गांव नगला भावला में भी पेयजल संकट छाया हुआ है। सरकार द्वारा नगला भावला के लिए पानी की टंकी सेंशन हुई थी जो कागजों में ही दफन हो गई। नगला भावला और खातीपुरा में लोग पीने के पानी को तरस रहे है परंतु जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी मौन धारण करे हुए बैठे है । इसी तरह अलीपुर में जनता को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
Editorial

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