Pratahkal - Lekh Update - Return of License Reg
नारायण कृष्णमूर्ति
पिछले हफ्ते केंद्र सरकार ने कंप्यूटर, सर्वर और कुछ अन्य वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर मिला-जुला असर पड़ सकता है। लेकिन सरकार ने इस फैसले को फिलहाल स्थगित कर दिया है और अब यह फैसला आगामी एक नवंबर से लागू होगा। कई अन्य देशों की तरह भारत भी कंप्यूटर और उससे जुड़े उपकरणों का आयात करता है, जो कई क्षेत्रों और लोगों के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण हैं। आजकल कार्यस्थल पर लोगों को लैपटॉप उपलब्ध कराना एक मानक बन गया है। बाइक, बस, मेट्रो और हवाई अड्डों के सुरक्षा काउंटरों पर लोगों को लैपटॉप लेकर जाते हुए देखा जा सकता है। और हमारे आसपास जितनी मात्रा में डाटा संबंधी लेन-देन एवं गतिविधियां होती हैं, वे सर्वर को हमारे कामकाज का अभिन्न अंग बनाती हैं।
इसके अलावा, लॉकडाउन के दिनों से कामकाज, शिक्षा और यहां तक कि मनोरंजन के लिए कंप्यूटर स्क्रीन का लोगों के जीवन में महत्व बढ़ गया है। इसलिए कंप्यूटर के आयात पर प्रतिबंध लगाए जाने पर दीर्घकालीन असर पड़ेगा। सरकार के फैसले में कहा गया कि उसने आयात लाइसेंसिंग का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत जो कंपनियां कंप्यूटर, डाटा प्रोसेसिंग मशीन और सर्वर जैसी सामग्रियां आयात करना चाहती हैं, उन्हें लाइसेंस लेना होगा। यह एक नियमित कागजी कार्रवाई जैसी लगती है, जो बड़ी कंपनियों को लाइसेंस के लिए आवेदन करने और अपना नियमित व्यवसाय जारी रखने की अनुमति देगी।
हालांकि बड़े ब्रांडों को इस नई जरूरत को पूरा करने में परेशानी नहीं हो सकती है, लेकिन कम ज्ञात ब्रांडों को, जो बड़े पैमाने पर बाजार के निचले स्तर की जरूरतें पूरी करते हैं, चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कंप्यूटर और उसके उपकरणों का बाजार कीमत के लिहाज से बहुत संवेदनशील है और कुछ हजार रूपये का अंतर भी खरीदारों एवं उनकी जरूरतों को प्रभावित कर सकता है। इसका मतलब यह होगा कि डिजिटल इंडिया अभियान से जुड़ने में लोगों के सामने बड़ी बाधाएं हो सकती हैं। छोटे शहरों और यहां तक कि गांवों में जो छात्र अपनी शिक्षा के लिए लैपटॉप या टैबलेट का खर्च उठा सकते हैं, उन्हें भी पढ़ाई और रोजगार के अवसरों तक पहुंचने में मुश्किल हो सकती है। लेकिन एक ऐसा वर्ग भी है, जो इस आयात प्रतिबंध से खुश है और वह है कंप्यूटर एवं लैपटॉप का घरेलू निर्माता वर्ग । वे इस कदम को आईटी हार्डवेयर के लिए सरकार की हालिया नवीनीकृत उत्पादन- संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को बढ़ावा देने के रूप में देखते हैं। सरकारी तंत्र का मानना है कि यह कदम बड़े ब्रांडों को तैयार कंप्यूटर, लैपटॉप और सर्वर आयात करने के बजाय पीएलआई से लाभ उठाने के लिए भारत में निर्माण करने और स्थानीय स्तर पर बेचने के लिए प्रेरित करेगा। यह इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में घरेलू उत्पादन को मजबूत करने का एक उपाय हो सकता हैं, लेकिन इसका फायदा मिलने में काफी समय लग सकता है। सरकार के इस कदम को इस तरह से भी देखा जा सकता है कि वह चीन से कंप्यूटर टैबलेट और सर्वरों के कल-पुर्जों पर निर्भरता को सीमित करना चाहती है। सरकार ने बार-बार चीन में बने उपकरणों का उपयोग करते समय सुरक्षा खतरों का हवाला दिया है। इसके अलावा, यह भारत में लैपटॉप एवं कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं के आयात को प्रतिबंधित कर सकता है, जो हाल के वर्षों में बढ़ा है । उदाहरण के लिए, इस वर्ष अप्रैल-जून के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं का आयात एक वर्ष पहले की अवधि के 4.73 अरब डॉलर से बढ़कर 6.96 अरब डॉलर हो गया, जिसकी कुल आयात में चार से सात फीसदी की हिस्सेदारी है। और भारत के पर्सनल कंप्यूटर और लैपटॉप के आयात में चीन की हिस्सेदारी लगभग 70 से 80 फीसदी है।
यह आयात बिल भारत के निर्यात की तुलना में बहुत कम है, जो काफी हद तक आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं के माध्यम से सॉफ्टवेयर और प्रौद्योगिकी पर निर्भर है। इससे हार्डवेयर की तत्काल आपूर्ति प्रभावित नहीं हो सकती, लेकिन कुछ समय बाद मौजूदा स्टॉक की कमी इनकी कीमतों को प्रभावित कर सकती है, जो अधिकतम खुदरा मूल्य की तुलना में काफी कम कीमत पर बेचे जाते हैं। आपूर्ति पर किसी भी तरह का प्रतिबंध कीमतों को प्रभावित कर सकता है और इसका व्यापक प्रभाव होगा। बड़े पैमाने पर गिग इकोनॉमी (मुक्त बाजार व्यवस्था) से संचालित होने वाले स्टार्ट- अप सभी प्रकार के हार्डवेयर पर निर्भर होते हैं विशेष रूप से लैपटॉप, टैबलेट और सर्वर पर । सरकार के इस कदम से उपकरणों की आपूर्ति में देरी हो सकती है और आयात शुल्क के राजस्व में भी कमी हो सकती है। हालांकि उच्च कीमत वाले कंप्यूटर्स और लैपटॉप का आयात निरंतर जारी रहेगा और संभवत: जो लोग इस फैसले से निराश हैं, वे नया तरीका अपनाते हुए अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को विदेशी दौरों से लौटते वक्त इन वस्तुओं को लाने के लिए कह सकते हैं। खासकर जब इंटरनेट 5जी होने जा रहा है, तब जैसे-जैसे सर्वर को भारी मात्रा में डाटा को संभालना पड़ेगा और लैपटॉप या कंप्यूटर प्रोसेसर की गति क्षमता बढ़ाने की जरूरत होगी, तब इस तरह के प्रतिबंध से हमें नुकसान उठाना पड़ेगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के चरण के दौरान लोग उन मशीनों पर ज्यादा निर्भर होंगे, जो एक-दूसरे के साथ प्रसंस्करण और संचार करने में तेज होंगी। अनुसंधान व विकास और उच्च-स्तरीय कंप्यूटर और सर्वर पर निर्भर महत्वपूर्ण कार्यों में देरी कई व्यवसायों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसके अलावा, उचित उपकरणों की कमी के कारण भारत की कंप्यूटर इंजीनियरिंग प्रतिभा के लिए अड़चनें पैदा हो सकती हैं। इसी तरह से क्लाउड कंप्यूटिंग की बदौलत मानक अभ्यास बन चुका घर से काम और अन्य कार्य भी प्रभावित होंगे। यह भी संभव है कि इस आयात प्रतिबंध के लागू होने से कुछ बड़े गैजेट निर्माता भारत को अपना प्रमुख मैन्यूफैक्चरिंग केंद्र बनाने पर विचार करें, क्योंकि अब हम सर्वाधि आबादी वाला देश हैं और गैजेट की अंतहीन मांग पैदा कर सकते हैं। इसके प्रभाव को समझने के लिए इस क्षेत्र के घटनाक्रमों को बारीकी से देखने की आवश्यकता होगी और यह भी देखना होगा कि यह प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत की भावी विकास क्षमता को कितना कम प्रभावित करता है।
Editorial

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