Pratahkal-Acharya Mahashraman-Best form of feeling of affection in mother

प्रातः काल संवाददाता मुंबई । नन्दनवन (Nandanvan) परिसर में तीर्थंकर समवसरण में आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने कहा कि आज से लगभग 2550 वर्ष पूर्व भगवान महावीर (Bhagwan Mahavir) इस धरा पर विचरण करते और स्थान-स्थान पर उनकी मंगलवाणी के श्रवण का लाभ जनता को मिलता। एक बार वे ब्रह्मकुण्ड गांव के पास से गुजर रहे थे।
उस गांव में ऋषभदत्त नामक ब्राह्मण धन-धान्य से सम्पन्न होने के साथ वेद, शास्त्र, नियम और सिद्धांतों के अच्छे जानकार थे और साथ में श्रमणोपाषक भी थे। उनकी भार्या देवानंदा भी एक धर्मवान महिला थीं। उन लोगों को जब भगवान महावीर के उस ओर आने की सूचना मिलती है तो वे लोग दर्शन को जाते हैं। बड़े ही विनम्र भाव से वे भगवान महावीर के दर्शन कर उनकी उपासना के लिए बैठ जाते हैं। इस दौरान उपासना में बैठी देवानंदा के आंखों से अश्रुधारा और स्तन से दूध की धारा प्रवाहित होने लगती है । यह देख गौतम ने भगवान महावीर से प्रश्न किया कि ऐसा क्यों हो रहा है। भगवान महावीर ने उत्तर प्रदान करते हुए कहा कि मैं इस धरती पर सर्वप्रथम इनके ही गर्भ में आया था। इसलिए मेरी यह मां और पिता हैं। इनका अपने पुत्र के प्रति ममत्व भाव इतना चरम पर पहुंचा है, जिसके कारण ऐसा हो रहा है। भगवान महावीर प्रवचन देते हैं, जिससे दम्पत्ति बड़े हर्षित होते हैं और साधु- साध्वी के रूप में दीक्षा प्राप्त कर तपस्या, साधना करते सिद्ध, बुद्ध और मुक्त बन गए। इस प्रसंग से यह प्रेरणा ली जा सकती है कि मां का अपने पुत्र के प्रति कितना अगाध प्रेम होता है। मां की ममता बड़ी निर्मल होती है । पुत्र भले ही कितना बड़ा क्यों न हो जाए, कितना बड़ा पद भी क्यों न प्राप्त कर ले, वह अपनी मां के लिए उसका पुत्र ही होता है। स्नेह की भावना का सर्वोत्तम रूप में मां में देखा जा सकता है। उसके पुत्र के प्रति मां की हमेशा ही स्नेह की भावना बनी रहती है। मां तो मां ही होती है। इसलिए भगवान महावीर की मां देवानंदा प्रेम अगाध था। दूसरी बात है कि वह पुत्र भी बड़ा भाग्यशाली होता है कि उसके समक्ष उसके माता-पिता को मोक्ष की प्राप्ति हो जाए। भगवान महावीर ने अपने माता-पिता का कल्याण किया । गुरुदेव तुलसी ने अपनी माता वदनाजी को दीक्षित कर उनके कल्याण का प्रयास किया था। कार्यक्रम में साध्वीवर्या ने भी उपस्थित जनता को उद्बोधित किया।
Editorial

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