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जीएसटी काउंसिल गोल्ड ट्रांसपोर्ट पर नये नियमों को देगी मंजूरी?
By EditorialPublished on
टैक्स कलेक्शन में चोरी और चूक की रोकथाम के लिये जीएसटी काउंसिल (GST Council) ने अब गोल्ड और रत्नों के परिवहन के लिये नियमों में कुछ बदलाव करने का फैसला किया है। दो लाख से ज्यादा कीमतों के गोल्ड और रत्नों के परिवहन करनेवाले कारोबारियों पर कड़ी नजर रखी जायेगी और इस दौरान होनेवाली घपलेबाजी को रोकने की कोशिश की जायेगी।

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मुंबई । टैक्स कलेक्शन में चोरी और चूक की रोकथाम के लिये जीएसटी काउंसिल (GST Council) ने अब गोल्ड और रत्नों के परिवहन के लिये नियमों में कुछ बदलाव करने का फैसला किया है। दो लाख से ज्यादा कीमतों के गोल्ड और रत्नों के परिवहन करनेवाले कारोबारियों पर कड़ी नजर रखी जायेगी और इस दौरान होनेवाली घपलेबाजी को रोकने की कोशिश की जायेगी। इसके लिये जो नियम प्रस्तावित किये गये हैं, उनके मुताबिक, रुपये 2 लाख या उससे अधिक कीमत के गोल्ड और रत्नों के यातायात की जानकारी देना अब कारोबारियों के लिये अनिवार्य हो सकता है। सरकार इस अनिवार्यता को लागू कर सकती है। यह राज्य के अंतर्गत परिवहन के लिये लागू होगा और इसके लिये परिवहन शुरू होने से पूर्व ई-वे चालान या इलेक्ट्रॉनिक परमिट्स जनरेट करना होगा। मंगलवार को इस बाबत बैठक होगी जिसमें केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर विभाग द्वारा केंद्र और राज्य जीएसटी कानूनों में इस बाबत बदलाव करने पर विचार किया जायेगा। हालांकि राज्यों को इस तरह की अनिवार्यता लागू करने देने का प्रस्ताव भी केंद्रीय समिति द्वारा पेश किये जाने की खबर है। अंतिम मसौदे पर काउंसिल फैसला लेगी जिसमें उम्मीद की जा रही है कि निर्धारित सीमा से ज्यादा गोल्ड की अंतिम उपभोक्ताओं को बिक्री के लिये इलेक्ट्रॉनिक परमिट हासिल करना विक्रेता की जिम्मेदारी होगी। दरअसल बहीखाते से इतर सौदों और टैक्स चोरी के मद्देनजर गोल्ड और रत्नों के परिवहन पर नजर रखना जरूरी है। जीएसटी सिस्टम में ई-वे बिल डाटा का इस्तेमाल किया जाता है और इसमें ऑडिट के नजरिये से भी मदद मिलेगी। राज्य के भीतर गोल्ड और कीमती पत्थरों के परिवहन में ई-वे बिल्स सिस्टम लागू करने से अधिकारियों को इन आइटमों की परिवहन गतिविधि की जानकारी रखने में मदद होगी। हालांकि यह प्रस्ताव लागू होने के बाद कितना कारगर साबित होता है, यह देखना होगा।

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