Pratahkal - Mumbai News Update - Laws to be tougher against misuse of Aadhaar and PAN
मुंबई : स्थायी खाता संख्या (पैन) और आधार के दुरूपयोग की जांच-पड़ताल और पहचान चुराने की वारदातों पर लगाम कसने के लिये जारी कार्यवाही के तहत केंद्र सरकार (Central Government) अब दंडात्मक कार्यवाही को और ज्यादा सख्त कर एक कड़े कानूनी प्रावधान की तैयारी में जुटी है। वित्त मंत्रालय ने इस बाबत एक प्रस्ताव पेश किया है जिसमें जुर्माने की रकम को बढ़ाने और सजा देने का प्रावधान है। यह प्रस्ताव इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (एमईआईटीवाई) को पेश किया गया है ताकि इसे प्रस्तावित डाटा प्रोटेक्शन बिल में शामिल किया जा सके। यह बिल संसद के मानसून सत्र में पेश होगा। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अभी पैन या आधार कार्ड
(Aadhar Card)
के बेजा इस्तेमाल पर लगनेवाला जुर्माना काफी कम है। केंद्र और राज्य सरकार को इसके तहत घपलों के जरिये जितना नुकसान पहुंचता है उसके मद्देनजर और ज्यादा कड़े कानूनी प्रावधानों की जरूरत है। वर्तमान में पैन के बेजा और अवैध इस्तेमाल पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना या फिर छह महीने तक की सजा का प्रावधान है। हाल के समय में चोरी की पहचान के जरिये पंजीकृत जाली कंपनियों की जांच में हुये खुलासे के बाद इस तरह के कड़े कदम उठाने की जरूरत और ज्यादा महसूस हो रही है। अधिकारियों के मुताबिक, यह चिंता का विषय है और प्रौद्योगिक की मदद से जांच और कामकाज भले ही बेहतर हो रहा है लेकिन इस तरह की अवैध कार्यप्रणालियों पर सख्त कानूनों के जरिये लगाम कसने की जरूरत भी ज्यादा है। यही वजह है कि जुर्माने की रकम और सजा की मियाद को बढ़ाने सहित तमाम सिफारिशें विभाग द्वारा भेजी गई हैं। अभी जो दो महीने का जीएसटी
(GST)
चोरी विरोधी अभियान जारी है उसमें बड़े पैमाने पर फर्जी गुड्स एंड सर्विसेस एक्ट रजिस्ट्रेशन का खुलासा हुआ है। टैक्स अधिकारियों ने भारत (India) में 12 हजार से ज्यादा बोगस कारोबारी संस्थाओं की पहचान की है, जिनसे कि सरकारी खजाने को 30 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। इस तरह के घपलों की रोकथाम के लिये, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड अब देशभर में बायोमैट्रिक प्रमाणन और जीएसटी पंजीकृत फर्मों की जियोटैगिंग को लागू करने की तैयारी में है। इस बाबत सिफारिशें पिछले महीने ही की गई हैं। एमईआईटीवाई ने संशोधित मसौदा कानून पर काम करना शुरु कर दिया है और तमाम हितधारकों से इस बाबत सलाह-मशविरा किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, तैयार होने के बाद इसे केबिनेट की मंजूरी के लिये रखा जायेगा। आगामी 17 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरु होने जा रहा है जिसमें इसके पेश होने की संभावना है।
Editorial

Editorial

Next Story