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भगवान महावीर से मिले प्रेरणा और पथदर्शन
By EditorialPublished on
तीर्थंकर समवसरण (Tirthankar Samavasaran) में मंगलवार को अपने प्रवचन में आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने कहा कि भगवान महावीर (Lord Mahavir) 24वें और अंतिम तीर्थंकर हुए हैं। उनकी स्तुति अनेक प्रकार से की जाती है। उनमें एक स्तुति है ‘महावीर तुम्हारे चरणों में, श्रद्धा के कुसुम चढ़ाएं हम’ गीत भी है। इसमें भगवान महावीर को श्रद्धा के सुमन चढ़ाने की बात कही गई है।

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मुंबई : तीर्थंकर समवसरण (Tirthankar Samavasaran) में मंगलवार को अपने प्रवचन में आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने कहा कि भगवान महावीर (Lord Mahavir) 24वें और अंतिम तीर्थंकर हुए हैं। उनकी स्तुति अनेक प्रकार से की जाती है। उनमें एक स्तुति है ‘महावीर तुम्हारे चरणों में, श्रद्धा के कुसुम चढ़ाएं हम’ गीत भी है। इसमें भगवान महावीर को श्रद्धा के सुमन चढ़ाने की बात कही गई है। सचित्त फूल का स्पर्श भी साधुचर्या के विरुद्ध है तो भगवान महावीर के चरणों में हमें अपने श्रद्धाभावों के सुमन को चढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। उनके बताए गए मार्ग पर आगे बढ़ने का प्रयास हो और उनके द्वारा दिए गए उपदेशों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास हो, तो कल्याण हो सकता है। श्रद्धा के साथ आदमी को अपने आचरण को अच्छा बनाने का प्रयास करना चाहिए। ज्ञान के साथ आचार भी अच्छा हो, ऐसा प्रयास करना चाहिए। अपने आदर्शों को उच्च बनाते हुए भगवान महावीर के दिखाए गए मार्ग पर चलने का प्रयास हो। आदमी के भीतर लोलुपता न हो, निष्काम भाव से सेवा करने का प्रयास करना चाहिए। विकृतियों से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए। अपने देव, गुरु और धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा हो और उनके द्वारा दिखाए गए सत्पथ पर चलने का प्रयास हो। जीवन में अहिंसा हो, सच्चाई हो, सभी प्राणियों के प्रति मैत्री की भावना का विकास हो। आदमी की कथनी और करनी में एकरूपता हो। आदमी को सद्कार्यों में लगे रहने की प्रेरणा लेने का प्रयास करना चाहिए। भगवान महावीर से सभी को प्रेरणा और पथदर्शन प्राप्त हो तो आदमी के जीवन का कल्याण हो सकता है।

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