Pratahkal - Udaipur News Update - Mukhyamantri Jal Swavalamban Yojana should be adopted across the country: KK Gupta
उदयपुर : जल हमारी धरती पर उपलब्ध अमूल्य संसाधनों में से एक है। बिना जल के धरती पर जीवन की कल्पना करना भी नामुमकिन है। जल धरती पर सीमित मात्रा में ही उपलब्ध हैं और धरती पर आबादी निरंतर बढ़ती ही जा रही है। आने वाले समय में हमें जल की कमी का सामना ना करना पड़े इसीलिए हम सबको आज जल को बचाना है। जल संरक्षण (Water Conservation) एवं जल संचय जल की कमी हम देख रहे हैं कई शहरों में तो पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं है धरती में भी पानी खत्म हो चुका है।
ऐसी स्थिति में मात्र एक ही रास्ता है कि बरसात के पानी को शहरों में वाटर हार्वेस्टिंग (Water Harvesting) के माध्यम से धरती में डालना तथा गांव में वर्षा के पानी को रोककर जगह-जगह कुंड, तालाब व कुआं में पानी ले जाकर धरती को सींचना होगा। छोटे-छोटे तरीकों से पानी को बचाना होगा तभी हम धरती में घट रहे जलस्तर को बढ़ा पाएंगे तथा आने वाले समय को सुखद बना पाएंगे। यह उद्गार स्वच्छ भारत मिशन
(Clean India Mission)
ग्रामीण भारत सरकार (Government of Rural India) एनएसएससी (NCSC) के सदस्य और पूर्व सभापति नगर परिषद डूंगरपुर केके गुप्ता ने व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम जल को बचाना चाहते हैं, तो हमें अपने जल स्त्रोतों को भी बचाने की आवश्यकता है। डूंगरपुर का जल संरक्षण व जल संचय मॉडल देशभर को जलयुक्त बनाने में मददगार साबित होगा । गुप्ता बताते हैं कि राजस्थान जैसे मरू प्रदेश में पानी की किल्लत कई दशकों से बनी हुई थी वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान चलाया था। इसके परिणामस्वरूप मात्र दो वर्षों में ही भूजल स्तर 1.3 मीटर बढ़ गया तथा अन्य देशों ने भी राज्य सरकार के इस नवाचार को अपनाया था। इस अभियान के तहत नगर परिषद डूंगरपुर द्वारा भी प्रत्येक घटक पर कार्य करते हुए योजना के उचित क्रियान्वयन पर बल दिया गया।
सबसे पहले शहर ही पुरानी बावे एवं कुओं की सफाई करवाकर गहरे कर उनसे शुद्ध जल की नियमित शहरों में सप्लाई की व्यवस्था की। जिससे प्रतिदिन 8 लाख लीटर पानी नियमित मिलने लगा । वाटर हार्वेस्टिंग कार्य हर घर के लिए अनिवार्य एवं पुरानी मकानों में जहां एवरेज वाटर हार्वेस्टिंग में रूपये 16 हजार का प्रतिघर खर्चा आता था नगर परिषद् द्वारा जिसने भी घर पर वाटर हार्वेस्टिंग लगाया उसको 50 प्रतिशत सब्सिडी दी गई अर्थात मात्र 8 हजार रूपयों में ही वाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध करवाई दिल्ली सरकार ने भी हमारे नवाचार को अपनाया तथा पानी की लेवल को बढ़ाने के लिए दिल्ली से एक इंजीनियर टीम को डूंगरपुर भेजा जिसने डूंगरपुर की तर्ज पर दिल्ली में भी पानी को संचय करने का कार्य किया तथा जिसने दिल्ली में डूंगरपुर की तर्ज पर काम किया। उसे 50 हजार रुपए की सब्सिडी तथा 10 प्रतिशत पानी के बिलों में कटौती से बिल लेने की घोषणा की।
शहरों में पानी संचय की जिम्मेदारी निकायों को दी जानी चाहिए डूंगरपुर शहर जो ब्लेक जॉन में था राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की प्रभावी योजना वर्ष 2016 की मुख्यमंत्री जल स्वावलंब योजना ने डूंगरपुर शहर का भाग्य ही बदल दिया पहले धरती के पानी में 800 मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना' व डूंगरपुर मॉडल को देशभर में अपनाया जाए : केके गुप्ता (KK Gupta) टी.डी.एस. हुआ करते थे धीरे-धीरे घटते हुए वर्ष 2019 में टी. डी. एस. 540 तक आ गया। ज्यादा टी. डी. एस. से आमजन का जीना दुर्लभ हो जाता था शरीर के जॉइंट एवं घुटनों में दर्द होने लगता हैं तथा दांत गल जाते हैं, दांतों का गिरना, बालो का उड़ना, खुजली होना तथा अन्य बीमारियाँ विशाल रूप धारण कर रहीं हैं पानी में फ्लोराइड एवं नाइट्रेड ज्यादा होने से कैंसर जैसी बीमारियाँ भी ज्यादा हो रही हैं राजस्थान के 11 शहरों में यह बीमारियाँ खराब पानी से हो रही हैं तथा 28 शहरों में भी आंशिक रूप से पानी खराब हो रहा है जैसे-जैसे गहराई में जा रहे है जल स्तर घटने के साथ-साथ पानी की क्वालिटी भी खराब हो रही हैं।
Editorial

Editorial

Next Story