Pratahkal - Mumbai News Update - Attempt should be made to avoid consumption of non-vegetarian food
मुंबई : रविवार को भगवती आगम के सूत्रों की व्याख्या करते हुए आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने कहा कि जीव के नरक गति के आयुष्य बंधन के पांच हेतु बताए गए हैं - महाआरंभ, महा परिग्रह, पंचेंद्रीय वध, मांसाहार, एवं नेरियक आयुष्य नाम कर्म का उदय। चेतना में विकृति होने पर हिंसा और परिग्रह जब सघनता को प्राप्त होते है तब वे नरक गति आयुष्य बंधन के कारण बन जाते है। अहिंसा परम धर्म है।

उन्होंने आगे कहा कि मांसाहार, अभक्ष्य सेवन से भी बचने का प्रयास होना चाहिए। इसमें हिंसा से बचने के साथ साथ संयम का भी पक्ष है। परिग्रह की भी अति ना हो। आवश्यकता अनुसार पदार्थ रखने पड़ते है, संग्रह भी करना पड़ता है। इसमें ध्यान रखे की पदार्थों के प्रति मूर्छा की भावना ना आए, मोह का भाव ना आए।

तेरापंथ किशोर मंडल के राष्ट्रीय अधिवेशन में उपस्थित किशोरों को संबोधित करते उन्होंने कहा कि जीवन में कुछ विशेष बनने एवं करने की उग्र इच्छा होती है। किशोरों में सेवा, त्याग एवं तपस्या की भावना आएं वह एक अच्छी खबर होती है। उन्होंने निडरता, मैत्री भाव, उत्सुकता के साथ संतुलन बनाए रखते हुए समस्याओं के समाधान हेतु प्रेरणा दी।

कार्यक्रम में किशोर मंडल के राष्ट्रीय प्रभारी विशाल पितलिया एवं युवक परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज डागा ने प्रस्तुति दी।


Editorial

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