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आचार्य महाश्रमण की आर्षवाणी के साथ चातुर्मासकाल की स्थापना
By EditorialPublished on
रविवार प्रातः नन्दनवन में आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने तीर्थंकर समवसरण में आर्षवाणी का उच्चारण करते हुए 2023 के पांच महीने के चातुर्मासकाल (Chaturmasakal) की विधिवत स्थापना की। उन्होंने इस सवाये चातुर्मास की स्थापना करते हुए धर्मसंघ को प्रेरणा प्रदान कीं तथा धार्मिक-आध्यात्मिक लाभ उठाने को अभिप्रेरित किया। उन्होंने चातुर्मासिक चतुर्दशी के संदर्भ में हाजरी का वाचन करते हुए चारित्रात्माओं को उद्बोधित किया।

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मुंबई : रविवार प्रातः नन्दनवन में आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने तीर्थंकर समवसरण में आर्षवाणी का उच्चारण करते हुए 2023 के पांच महीने के चातुर्मासकाल (Chaturmasakal) की विधिवत स्थापना की। उन्होंने इस सवाये चातुर्मास की स्थापना करते हुए धर्मसंघ को प्रेरणा प्रदान कीं तथा धार्मिक-आध्यात्मिक लाभ उठाने को अभिप्रेरित किया। उन्होंने चातुर्मासिक चतुर्दशी के संदर्भ में हाजरी का वाचन करते हुए चारित्रात्माओं को उद्बोधित किया।
चातुर्मासकाल की स्थापना की घोषणा करते हुए आचार्य महाश्रमण ने कहा कि मुम्बई (Mumbai) महानगर का इस चतुर्मास के कल्प क्षेत्र मीरा-भायंदर और बृहन्मुम्बई महानगरपालिका (Municipal Corporation) तक होगा। उन्होंने कहा कि जीवन में मार्ग सही लिया जाए तो अभिष्ट मंजिल की प्राप्ति हो सकती है। यदि मार्ग ही गलत हो जाए तो अभिष्ट मंजिल की प्राप्ति की संभावना न के बराबर हो जाती है। मानव जीवन की परम मंजिल तो मोक्ष है। मोक्ष की प्राप्ति के लिए ही आदमी साधुत्व को स्वीकार करता है। साधु-साध्वियों को चारित्रात्मा कहा जाता है। इस बार पांच महीने का चातुर्मास है। चारित्रात्माओं को एकबार के लिए स्थिरता का समय है। शेष आठ महीने तो विहार का होता है। दोनों समयों की अपनी-अपनी उपयोगिता होती है। इस काल में आगम के अध्ययन, तप, साधना की जा सकती है। स्वाध्याय और ध्यान आदि का भी प्रयास किया जा सकता है। 50 साधु और 127 साध्वियां अनेकों समणियां आदि उपस्थित हैं। इस दौरान ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप रूपी चतुष्टयी मार्ग को पुष्ट और प्रशस्त बनाने का प्रयास होना चाहिए।

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