Pratahkal-Railway one station, one product scheme to promote local and indigenous products


मालीगांव। भारत सरकार (Indian government) के 'वोकल फॉर लोकल' विजन को बढ़ावा देने, स्थानीय/स्वदेशी उत्पादों के लिए बाजार प्रदान करने और समाज के वंचित वर्गों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर सृजन करने के उद्देश्य से भारतीय रेल ने 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' (one station, one product) (ओएसओपी) योजना शुरू की है।
स्वदेशी/स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित करने, बिक्री और उच्च दृश्यता प्रदान करने के लिए रेलवे स्टेशनों पर राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान द्वारा डिजाइन ओएसओपी स्टॉल का आवंटन रेलवे द्वारा किया जाता है। इस उत्पाद श्रेणी में उन स्थानों के स्वदेशी/भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग/स्थानीय उत्पाद होते हैं और इन क्षेत्र के स्थानीय कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों, जनजातियों आदि द्वारा बनाई गई कलाकृतियां, हस्तशिल्प, कपड़ा एवं हथकरघा, खिलौने, चमड़े के उत्पाद, पारंपरिक उपकरण/यंत्र, वस्त्र, रत्न और आभूषण इत्यादि तथा स्वदेशी रूप से निर्मित/उत्पादित प्रसंस्कृत, अर्ध-प्रसंस्कृत और अन्य खाद्य उत्पाद शामिल हो सकते हैं। समाज के निचले पायदान के लोगों/हाशिए पर रहने वाले एवं कमजोर वर्ग तथा स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना में भागीदारी के लिए मामूली पंजीकरण शुल्क के साथ 15 दिनों से लेकर 3 महीने तक की अवधि के लिए स्टॉल का आवंटन प्रदान किया जाता है।
एकल कारीगर, एकल शिल्पकार, एकल बुनकर, जनजातियों, किसानों, स्वयं सहायता समूह के सदस्यों, महिला स्वयं सहायता समूह के सदस्यों, पंजीकृत सूक्ष्म उद्यमों से जुड़े सदस्य और सामाजिक संगठनों, राज्य सरकार के निकायों आदि से जुड़े सदस्य इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
पू.सी.रे. के क्षेत्राधिकार के अधीन 06 जुलाई तक 86 रेलवे स्टेशनों पर 122 ओएसओपी स्टॉल चल रहे हैं। अलीपुरद्वार मंडल के 27 स्टेशनों पर 39 ओएसओपी आउटलेट्स, कटिहार मंडल के 12 स्टेशनों पर 26 आउटलेट्स; लामडिंग मंडल के 15 स्टेशनों पर 16 आउटलेट्स, रंगिया मंडल के 20 स्टेशनों पर 27 आउटलेट्स और तिनसुकिया मंडल के 12 स्टेशनों पर 14 आउटलेट्स हैं। सभी स्टॉल स्थानीय स्तर पर निर्मित विशिष्ट और अमूल्य उत्पादों की किस्मों का प्रदर्शन और विपणन कर रहे हैं। कुछ प्रमुख स्टेशनों में असम के गुवाहाटी, डिब्रुगढ़, न्यू तिनसुकिया, पश्चिम बंगाल के न्यू अलीपुद्वार, न्यू जलपाईगुड़ी शामिल हैं। विभिन्न प्रकार के असमिया पीठा, पारंपरिक असमिया गमछा, पारंपरिक राजबंशी पोशाक, जापी, स्थानीय कपड़ा, जूट उत्पाद (टोपी, गमछा, गुड़िया), हथकरघा, दार्जिलिंग चाय, स्थानीय निर्मित डिजाइनर चूड़ियाँ, हार, कान की बाली, बाल क्लिप आदि के साथ-साथ अन्य स्थानीय खाद्य उत्पाद यात्रियों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। इसकी पायलट योजना 25 मार्च को शुरू हुई थी और वर्तमान में, देश भर के 21 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 850 ओएसओपी केंद्रों के साथ 782 स्टेशनों को शामिल किया गया हैं।
Editorial

Editorial

Next Story