Pratahkal - News Update - If the government and the administration did not listen to the pain
जोधपुर : मानसूनी सीजन में सडकों (Road) का टूटना तय माना जाता है, लेकिन शहर से सटा एक गांव ऐसा भी है, जहां पिछले 20 साल से सड़क नहीं है । खोखरिया गांव के ग्रामीण (Rural) जब शिकायत करते करते-करते थक गए तो उन्होंने खुद ही इस समस्या का हल निकालने की ठानी। आखिरकार यहां के लोगों ने चंदा एकत्र कर 40 हजार रुपए जुटाए और अपने दम कर सड़कों को सूरत बदलने का कार्य शुरू कर दिया। दरअसल, खोखरिया गांव में करीब 3500 घर हैं, जहां की आबादी 15 हजार के करीब है। स्थानीय लोग क्षेत्र में टूटी सड़कों (Broken Roads) के चलते परेशान थे। समस्या को देखते हुए स्थानीय लोगों के साथ ही सरपंच ने अपने स्तर पर ही गांव में आवागमन के लिए कच्ची सड़क बनाने का निर्णय किया। उसके बाद गांव के लोगों ने करीब 40 हजार रुपए चंदा करके जुटाए । सरपंच प्रतिनिधि गोविंद सियाग ने उनका साथ दिया। सड़क निर्माण के दौरान करीब 60 हजार की सहायता करने की बात कही।
डेढ किमी सड़क में लगेगी 30 गाड़ी रेत, 20 गाड़ी मुरड़ :
क्षेत्रवासियों के अनुसार पहले डेढ़ किमी की सड़क तैयार करवाई जा रही है। इसमें 30 गाड़ी रेत, 20 गाड़ी मुरड़ लगेगी। इस अलावा जेसीबी को प्रतिदिन 3 हजार और ट्रैक्टर कराली के लिए प्रतिदिन 4 हजार रुपए दिए जा रहे है। इसके अलावा रोड रोलर पर प्रतिदिन 10-12 हजार रुपए का खर्चा आएगा। यह सारा खर्चा अब गांव के लोग ही वहन कर रहे हैं। गांव के लोगों ने मंगलवार से यहां पर कार्य शुरू करवाया दिया । स्थानीय निवासी पन्नालाल सोनी ने बताया कि न तो हमारी समस्या पर प्रशासन ने ध्यान दिया और न ही सरकार ने। आखिरकार मजबूर होकर गांव के लोगों ने चंदा करके रुपए जुटाए। अब आवागमन के लिए कच्ची सड़क बनना शुरू हुई है।

Editorial

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