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इक्कीस रंगी तप का किया सामूहिक पारणा
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नन्दनवन (Paradise) में विराजमान आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahasramana) को मुम्बईवासियों ने तपस्या की भेंट समर्पित की जो तेरापंथ धर्मसंघ में इतिहास का सृजन कर गई। एक जुलाई से इक्कीस रंगी तप का क्रम प्रारम्भ हुआ। तपस्या का क्रम आरम्भ हुआ तो लोग जुड़ते चले गए।

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मुंबई : नन्दनवन (Paradise) में विराजमान आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahasramana) को मुम्बईवासियों ने तपस्या की भेंट समर्पित की जो तेरापंथ धर्मसंघ में इतिहास का सृजन कर गई। एक जुलाई से इक्कीस रंगी तप का क्रम प्रारम्भ हुआ। तपस्या का क्रम आरम्भ हुआ तो लोग जुड़ते चले गए। शनिवार को जब तपस्वियों के पारणे (Parna) का समय आया तो कुल 1282 तपस्वियों ने आचार्य महाश्रमण से मंगलपाठ और पाथेय प्राप्त कर सामूहिक पारणा किया। तपस्वियों को साध्वीप्रमुखा, मुख्यमुनि व साध्वीवर्या ने भी उद्बोधित किया। साध्वीवृंद ने गीत का संगान किया।
इसके बाद आचार्यश्री ने कहा कि भगवती सूत्र में कुल, गण और संघ के प्रत्यनित भी बताए गए हैं। संघ अथवा संगठन में जो वृद्ध, बीमार और शैक्ष को अनुकंपनीय बताया गया है। इनको सेवा न देने वाला, संगठन को विघटित करने का प्रयास करने वाला प्रत्यनित होता है। आदमी को अपने भीतर सेवा की भावना का विकास करना चाहिए और सेवा व सहयोग के लिए निरंतर जागरूक रहने का प्रयास करना चाहिए। सहयोग की भावना और सेवा का आश्वासन हो तो संगठन मजबूत हो सकता है।
इसके बाद उन्होंने आचार्य कालूगणी की मेवाड़ यात्रा और उनकी पैर की समस्या का भी वर्णन किया।

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