Try to be a follower of Guru's footsteps: Ambassador of Peace Acharyashree Mahashraman
मुम्बई । मूसलाधार बरसात में भी नन्दनवन गुरुवाणी से गुंजायमान रहा। आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने गुरुवार को श्रद्धालुओं पर ज्ञानवृष्टि की तो वे निहाल हो उठे। वर्षा के कारण प्रवास स्थल भिक्षु विहार से ही प्रवचन कार्यक्रम हुआ।
उन्होंने कहा कि भगवती सूत्र में तीन प्रकार के प्रत्यनित बताए गए हैं। गुरु प्रत्यनित, उपाध्याय प्रत्यनित और स्थविर प्रत्यनित। प्रत्यनित का अर्थ होता है-प्रतिकूल या अवीनित। गुरु की अवमानना, उल्लघंन, अपमान करने वाले, उपाध्याय के प्रतिकूल और स्थविरों के प्रतिकूल व्यवहार करने वाले प्रत्यनित होते हैं। आदमी को प्रत्यनित बनने से बचने का प्रयास करना चाहिए। गुरु के प्रतिकूल नहीं, गुरुचरणानुगामी बनने का प्रयास करना चाहिए। आचार्य तुलसी छोटी अवस्था में आचार्य बने। उनसे बड़े धर्मसंघ में अनेक संत थे, किन्तु सभी उनके सम्मान आदि के प्रति सजग रहते थे। इससे यह सीख लेनी चाहिए कि आचार्य भले ही उम्र अथवा दीक्षा पर्याय में छोटे हों, किन्तु उनके प्रति, समर्पण, श्रद्धा का भाव रखने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने इसके बाद आचार्य कालूगणी के कांठा क्षेत्र में विहार-प्रवास के दौरान आचार्य कालूगणी और मुनि तुलसी के मध्य हुए प्रसंगों का वर्णन किया तो श्रद्धालु निहाल हो उठे।
Editorial

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