Pratahkal-Acharya Mahashraman gave message from the place of stay in heavy rain
मुंबई । तेरापंथ धर्मसंघ (Terapanth Sangh) के अधिशास्ता आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) बुधवार को भारी बरसात के कारण निर्धारित समय पर तीर्थंकर समवसरण में नहीं आ पाए तो उन्होंने अपने प्रवास स्थल ‘भिक्षु विहार’ से ही प्रवचन दिया। लगातार हो रही बरसात के कारण नन्दनवन परिसर में स्थान-स्थान पर जलभराव की स्थिति बन गई है।
उन्होंने कहा कि भगवती सूत्र में बताया गया है कि भगवान महावीर के स्थविर साधुओं से दूसरे साधुओं ने कहा कि आप लोग असंयमी हैं। भगवान महावीर के साधुओं ने पूछा कि हम असंयमी कैसे हुए तो उन आरोप लगाने वाले साधुओं ने बताया कि आप लोग अदत्त का सेवन करते हैं और उसकी अनुमोदना भी करते हैं। स्थविर साधुओं ने पूछा कि ऐसा कह सकते हो तो उन लोगों का कहना था कि आपके पात्र में जो दान देते हैं, उसे आपके पात्र के पास ऊपर से ही छोड़ देते हैं तो आपके पात्र में आने से पहले और उस दानदाता के हाथ से छूटने के बीच के समय के कारण तो वह अदत्त ही हो जाता है।
इस पर भगवान महावीर ने कहा कि जो आदमी साधुओं को दान देने की नियत से भोजन आदि उठाया और साधु के पात्र के पास लाकर छोड़ता है तो उसने तो साधु को दान देने की नियत से ही भोजन को उठाया और पात्र तक लाया तो वह क्रिया तो दत्त ही हो जाती है। इसलिए साधु संयमी होते हैं और अदत्तादान के पूर्णतया पालक होते हैं। कोई वस्तु जब देनी प्रारम्भ कर दी गई तो वह दत्त ही होती है।
उन्होंने कहा कि चर्चा में राग-द्वेष की भावना न हो तो चर्चा-वार्ता से ज्ञान का विकास हो सकता है और अच्छा प्रतिफल भी प्राप्त हो सकता है। अणुव्रत विश्व भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष अविनाश, प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष मदनलाल तातेड़ व अणुव्रत समिति-सरदारशहर अध्यक्ष पृथ्वी सिंह ने विचार रखे। प्रवास व्यवस्था समिति महामंत्री सुरेन्द्र कोठारी एवं महेश बाफना भी सक्रिय रहे।
Editorial

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