Pratahkal-Delay in sending Property Tax bills due to Supreme Court decision
मुंबई । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court ) ने इस साल मार्च में पूंजी मूल्य आधारित प्रॉपर्टी टैक्स (Property Tax) संबंधी पुनर्विचार और समीक्षा याचिका खारिज कर दी थी। इससे राज्य में बीएमसी (BMC) के सामने दिक्कत खड़ी हो गई है। बीएमसी को अब मुंबई की सारी संपत्तियों के पूंजी मूल्य के निर्धारण पर फिर से कार्य करना होगा। इतना ही नहीं, बीएमसी को अब मुंबई के टैक्सपेयर्स से साल 2010 से 2012 के बीच वसूला गया हजारों करोड़ रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स भी लौटाना होगा। इसी दिक्कत के चलते हर साल मई में जारी होनेवाले प्रॉपर्टी टैक्स के बिल जारी करने में देरी हो गई है।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में मुंबई उच्च न्यायालय ने पूर्व तिथि से टैक्स मूल्यांकन के लिये निर्धारित चुनिंदा नियमों को दरकिनार कर दिया था जिसके बाद बीएमसी ने मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुये समीक्षा याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार बीएमसी ने नये नियम बनाये और टैक्सपेयर्स को नये बिल जारी किये थे। अदालत ने वर्ष 2010 से नये सिस्टम अंतर्गत जारी विशेष मूल्यांकन आदेश और बिलों को भी खारिज कर दिया है। इसके बाद नागरिकों से वसूली गई अतिरिक्त रकम का समायोजन करना या फिर इस रकम को लौटाना बीएमसी के लिये जरूरी हो गया है।
हालांकि सरकारी अधिकारियों की मानें तो हजारों करोड़ रुपये की वसूली को इस तरह से लौटाना मुमकिन नहीं होगा। यही वजह है कि बीएमसी ने राज्य सरकार से बीएमसी एक्ट में आवश्यक सुधार करने की गुजारिश की है। इस प्रक्रिया में कम से कम एक महीना लग जायेगा। जिसके बाद प्रॉपर्टी टैक्स बिल अगस्त में ही जारी हो सकेंगे। हालांकि पहले ही पिछले तीन महीनों में प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन में विलंब हो चुका है। डाटा के अनुसार, इस साल 1 अप्रैल से 16 जुलाई तक करीब 260 करोड़ रुपये का राजस्व इकट्ठा हुआ है। पिछले साल इसी अवधि में बीएमसी ने करीब 399 करोड रुपये कमाये थे।
Editorial

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