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सीयेटल 01 : पहली बार किसी सक्रिय ज्वालामुखी को देखने का रोमांच
By EditorialPublished on
हमने अलास्का एयर लाईन्स की उड़ान ली थी। यह क्षेत्रीय विमान सेवा मगर सियेटल क्षेत्र में इसका संजाल सघनता से फैला हुआ है। यह अपे सस्ती विमान हैं। इसकी खासियत यह है कि यह एक की बजाय दो हाथों में दिये जाने वाले बेग साथ ले जाने की अनुमति देती है, अन्य सेवाएं एक बेग ही ले जान देती है। अमरीकी विमानों की घरेलू सेवाओं में चेक इन सामान का शुल्क अलग वसूला जाता है। चेक इन किये जाने वाले प्रत्येक बेग का 25 डालर अलग चुकाना पड़ता है। इस कारण अधिकांश यात्री अपना सारा सामान साथ ले जाने वाले बेग में ही रख देते हैं। हम तो क्र

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हमने अलास्का एयर लाईन्स की उड़ान ली थी। यह क्षेत्रीय विमान सेवा मगर सियेटल क्षेत्र में इसका संजाल सघनता से फैला हुआ है। यह अपे सस्ती विमान हैं। इसकी खासियत यह है कि यह एक की बजाय दो हाथों में दिये जाने वाले बेग साथ ले जाने की अनुमति देती है, अन्य सेवाएं एक बेग ही ले जान देती है। अमरीकी विमानों की घरेलू सेवाओं में चेक इन सामान का शुल्क अलग वसूला जाता है। चेक इन किये जाने वाले प्रत्येक बेग का 25 डालर अलग चुकाना पड़ता है। इस कारण अधिकांश यात्री अपना सारा सामान साथ ले जाने वाले बेग में ही रख देते हैं। हम तो क्रूज पर जा रहे थे इसलिये सामान ज्यादा था टिकिट बुक कराते समय ही दागिनों की संख्या के अनुसार उनका शुल्क ब लिया गया था।
क्षेत्रीय विमान सेवा होने के बावजूद विमान आरामदायक था। सीटों के बीच की दूरी ज्यादा थी इस कारण पांव आसानी से फैला सकते थे। यात्रा के दौरान निशुल्क अल्पाहार दिये जा रहे थे। कोक, सेवन अप, जूस, चिप्स, प्रिंगल्स, पीनट्स वगैराह जितना चाहे यात्री ले सकते थे। यह अन्य सेवाओं से भिन्न था तो समझा कोई एक चीज ही ले सकते हैं इसलिये डाइट कोक ले लिया मगर जब देखा कि अन्य यात्री तो कोक भी ले रहे, जूस भी ले रहे तो मैं पछताने लगा कि मैं भी ज्यादा सामान ले सकता था।
हालांकि पूरे विमान में दो पारिचारिकाएं थी मगर वे निरन्तर धूम घूम कर यात्रियों की सेवा कर रही थी। एक सामान वितरीत कर रही थी तो दूसरी प्लास्टिक का एक बड़ा बेग लेकर खाली प्लेटें, केन्स, थैलीयां वगैराह एकत्रित कर रही थी। अक्सर विमान सेवाओं में खाद्य पदार्थों की झूठी प्लेटें यात्री के समक्ष पड़ी रहती है। मगर काफी देर तक उन्हें उठाया नहीं जाता जिससे यात्री परेशान हो जाता है। सामने का टेबल खुला होता है तो वह उठ कर तब तक बाथरूम भी नहीं जा सकता जब तक कोई आकर ये प्लेटें नहीं उठा लेता। इस दृष्टि से इस विमान में एक युवती निरन्तर झूठी प्लेटें उठाने का काम कर रही थी। अन्य सेवाओं को भी इससे सबक लेना चाहिये।
यह प्रक्रिया चालू ही थी कि परोसने वाली युवती वापस वही सामान लेकर हाजिर हो गई। मैं अचरज में पड़ गया कि यह दोबारा परोस रही हैं या उन्हें दे रही है। जिन्हें पहली बार नहीं दिया। मैंने पास बैठी प्रीति से पूछा था तो वो बोली आपको लेना है तो जो मर्जी ले सकते हैं। यह सुनकर में खुश हो गया, इस बार पहले वाली गलती नहीं करूंगा और दो तीन चीजें एक साथ उठा ली। पूरी यात्रा में एक पारिचारिका परोसती रही, कभी खाद्य तो कभी चाय-कॉफी, तो दूसरी खाली प्लेटें उठाती ही रही।
दो ढाई घंटे की यात्रा का समय कैसे पूरा हो गया पता ही नहीं चला। हमारा विमान सीएटल हवाई अड्डे पर उतर गया। खिड़की से दूर एक सुन्दर पहाड़ नजर आ रहा था, आश्चर्य इस बात का था कि यह जापान के प्रसिद्ध पर्वत माउन्ट फ्यूजी की हूबहू प्रतिकृति नजर आ रहा था। अभी तो हम सीएटल में उतरे ही नहीं थे जिसके पूर्व ही यह शहर मन मोहने लगा था। यह माउन्ट रेनियर है जो विश्व के खतरनाक ज्वालामुखियों में से एक माना जाता है।
माउन्ट रेनियर की गिनती डिकेड वोल्केनो में की जाती है। एसे ज्वालामुखियों को खतरनाक समझा जाता है इसलिये इनका अध्ययन करने की सलाह दी जाती है जिससे ज्वालामुखियों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त हो सके। ऐसे ज्वालामुखियों से सतर्क रहने को कहा जाता है क्यूंकि इनसे लाया आदि पदार्थों के निकलने की आशंका बनी रहती है। इस तरह के ज्वालामुखी आसपास की आबादी के लिये खतरा हो सकते हैं।
आश्चर्य की बात है कि इन खतरों के बावजूद लगभग 35 लाख लोग इस ज्वालामुखी के घेरे में रहते हैं, उनमें भी 6-7 लाख तो सीएटल जैसे घने बसे शहर माँ यह गनीमत है कि 1894 में धधकने और आग उगलने के पश्चात इस ज्वालामुखी के सक्रिय होने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। आज यह ज्वालामुखी पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बन गया है। इसे देखने के लिये पूरा दिन अलग रखना पड़ता है। पर्यटक बसें पहाड़ के उपर तक ले जाती हैं। पहाड़ की चोटियों पर बर्फ जमा होने के कारण पर्यटक स्कीइंग का भी आनन्द लेते हैं।
विमान एरोब्रिज से नहीं जोड़ा गया। यह थोड़ा अजीब था। विमान के आगे सीढीयां लगा दी गई तो हम उसीसे नीचे उतरे। उतरते ही जी भर कर माउन्ट रेनियर ज्वालामुखी के दर्शन किये और रोमांच की अनुभूति ली। किसी सक्रिय ज्वालामुखी को इस तरह देख पाने का अवसर अनूठा था। मैं जापान भी गयी हो मगर वहां भी माउन्ट फ्यूजी के दर्शन नहीं कर पाया था।
सीएटल अमेरिका के राज्य वाशिंगटन की राजधानी है। पूरे अमेरिका की राजधानी जो वाशिंगटन डी.सी. शहर है वो अलग है जो पूर्व में स्थित है। यह प्रदेश पश्चिम में है। वाशिंगटन राज्य में माउन्ट रेनियर के अतिरिक्त माउन्ट सेन्ट लेन्स मैं भी है। यह सक्रिय ज्वालामुखी है जो 1980 में फूट पड़ा था। इससे भारी तबाही। मची थी और 57 लोग काल कवलित हो गये थे। पूरे अमेरिका के समकालीन इतिहास की यह बहुत बड़ी विध्वंसकारी घटना थी। कई घर, दर्जनों पूल, कड़ी किलो मीटर रेल लाईनें और सड़कें इससे ध्वस्त हो गये।
यह भी मजेदार तथ्य है कि इस राज्य का नाम टेरीटेरी ओफ कोलम्बिया रखा जाना था मगर डिस्ट्रिक्ट ओफ कोलम्बिया पहले ही अमेरिका का राजधानी क्षेत्र था। किसी प्रकार का भ्रम न हो इसलिये यह नाम नहीं रख कर अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जार्ज वाशिंगटन के नाम पर रख दिया गया। यह भी देश की राजधानी के शहर का नाम था, इससे भी वैसे ही भ्रम की संभावना थी फिर भी वाशिंगटन नाम रख लिया गया। आज भी कई लोग वाशिंगटन राज्य को वाशिंगटन राजधानी समझ भ्रमित हो जाते हैं।
सीएटल एयरपोर्ट बहुत बड़ा है। ज्यू ही हम टर्मिनल में पहुँचे एसी भीड़ भाड़ और गहमागहमी देखी जैसी हमारे किसी अत्यन्त व्यस्त रेल्वे स्टेशन पर नजर आती है। हमें लेने कादम्बरी के पति मयंक आने वाले थे मगर उससे पहले हमें अपना सामान एकत्र करना था। बेगेज एकत्र करने के साईन बोर्ड पढ़ते पढ़ते हम आगे बढे जा रहे थे, मगर कहीं छोर ही नजर नहीं आ रहा था। दोनों तरफ एक से बढ़ कर एक खाने पीने की दुकानें, रेस्टोरेन्ट, पुस्तकों, उपहारों वगैरा की दुकानें नजर आ रही थी और सब पर ग्राहकों की भीड़ भी थी। एसा लग रहा था जैसे हम एयरपोर्ट पर नहीं वरन किसी मॉल में हो।
अब हम चलित सीढ़ीयों से नीचे उतरे तो सामान एकत्र करने के बेल्ट नजर आये। हमें बेल्ट न. 10 से सामान एकत्र करना था। वहां पहुँचे तो बेल्ट घूम रहा था। उस पर तीन चार अटेचियां पड़ी हुई थी। बार बार घूम कर वही नजर आ रही थी। हम आशंकित हो गये कि हमारा सामान कोई अन्य उठा कर तो नहीं ले गया तभी किसी ने बताया कि हमारी उड़ान का बेल्ट न बदल गया है, अब 14 पर हमारा सामान मिलेगा। हम भागते हुए 14 की तरफ गए। मैं मन ही मन प्रसन्न हो रहा था कि अव्यवस्था यहां भी होती है।

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